Maharana Raj Singh History in Hindi | Mewar Vansh Part - 9

Maharana Raj Singh History in Hindi  - नमस्कार दोस्तों ये पोस्ट Mewar Vansh के इतिहास का Part - 9 है इस पोस्ट में आप Maharana Raj Singh History in Hindi, मेवाड़ के महान राजा Maharana Raj Singh के बारे में जानकारी प्राप्त करोगे हमारी ये पोस्ट Rajasthan GK की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है जो की पटवारी राजस्थान पुलिस और rpsc में पूछा जाता है

Maharana Raj Singh History in Hindi


Maharana Raj Singh History in Hindi
Maharana Raj Singh History in Hindi |  Mewar Vansh Part - 9 


राज सिंह I, मेवाड़ साम्राज्य के महाराणा थे।
जन्म: 24 सितंबर 1629, उदयपुर
निधन: 22 अक्टूबर 1680
उत्तराधिकारी: मेवाड़ के जय सिंह
शासनकाल: 1652-1680
पिता: जगत सिंह I
बच्चे: मेवाड़ के जय सिंह

राजसिंह (1652-1682)


राज्यभिषेक 10 अवटूबर 1652
1652-1662 ई. में अकाल राहत कार्यो के लिए गोमती नदी के पानी को रोककर राजसिंह ने राजसमन्द जिले में राजसमन्द झील का निर्माण करवाया ।
राजसमन्द झील की नींव घेवर माता द्वारा रखवाई गई । 
घेवर माता बिना पति के सती होने वाली देवी है । 
इसका मन्दिर राजसमन्द झील के किनारे बना है ।

राजप्रशस्ति


राजसमन्द झील का उत्तरी किनारा नौ चौकी पाल कहलाता है । जिस पर 25 काली शिलाओं पर संसार का सबसे बड़ा शिलालेख "राजप्रशस्ति' रणछोड़ भट्ट तैलंग द्वारा संस्कृत में लिखा गया है ।
रजप्रशस्ति 1676 में लिखवाया गया । 
इस शिलालेख में बप्पारावल से लेकर राजसिंह के समय तक का मेवाड़ का इतिहास मिलता है । 
मेवाड़ इतिहास जानने का सबसे अच्छा स्त्रोत राजप्रशस्ति है । 

औरंगजेब राजसिंह का विरोधी हो गया जिसके निम्न  कारण थे 

  1. राजसिंह ने चितौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण करवाकर 1615 ई की मुगल मेवाड संधि तोड दी ।
  2. Raj Singh ने मेवाड में जजिया कर (गैर मुस्लमानों से लिया जाने वाला धार्मिक कर) नहीं वसूला ।
  3. राजसिंह ने मारवाड़ के राजा अजीतसिंह की सहायता की थी ।
  4. Raj Singh ने किशनगढ़ की राजकुमारी चारूमति से विवाह किया जिससे औरंगजेब विवाह करना चाहता था । (मुख्य कारण ) ।

नाथद्वारा 


राजसिंह ने मथुरा (वृंदावन) से 1671 ई में औरंगजेब के विरोध से दो कृष्ण जी की मूर्तिया मेवाड लाया तथा सिहाड़ ( नाथद्वारा) व द्वारिकाधीश, कांकरोली (राजसमन्द) में कृष्णजी की दोनों प्रतिमाएं स्थापित की । नाथद्वारा में स्थित श्री नाथ जी का मंदिर राजस्थान में वल्लभ सम्प्रदाय ( पुष्टिमार्ग ) की मुख्य पीठ हैं । नाथद्वारा की पिछवाई कला कृष्णलीला से सम्बन्धित है । नाथद्वारा का अन्नकूट महोत्सव तथा डांग नृत्य प्रसिद्ध है ।
श्रीनाथ जी की सेवा सातरूपों में की जाती है  मंगला, ग्वाल, उत्थापन, राजभोग, आरती, भोग और शयन । यहा श्रीनाथ जी को सात ध्वजानाश कहा जाता है । नाथद्वारा मंदिर की केले की साँझियां प्रसिद्ध है ।
यह मंदिर कृष्ण जी की आठ झाँकी के लिए प्रसिद्ध है । नाथद्वारा बनास नदी के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 ( सबसे व्यस्तम राजमार्ग ) पर स्थित है
नाथद्वारा चित्रकला की शुरुआत राजसिंह द्वार की गई । केलो के वृक्षों के चित्र इस शैली की मुख्य विशेषता है । कांकरोली ( राजसमन्द ) में टायर ट्यूब बनाने का सबसे वहा कारखाना है ।

रत्नसिंह चूंडावत or सहलकंवर ( हाडी रानी )


राजसिंह के सैनिक रत्नसिंह चूंडावत को राजसिंह ने किशनगढ़ पर आक्रमण करने हेतु भेजा लेकिन युद्ध में अपनी पत्नी की याद आने पर वह युद्ध नहीं करना चाहता था तम इसकी पत्नी सहलकंवर ( हाडी रानी ) ने अपना सिर काटकर निशानी के रूप में भेजा । 
हाडी रानी सहलकंवर का स्मारक सलूम्बर ( उदयपुर ) मे बना है राजस्थान की पहली महिला बटालियन हाडी रानी महिला बटालियन थी
प्रसिद्ध कवि मेघराज मुकुल ने हाडी रानी पर सेनानी कविता लिखी

चूंडावत मांगी सेनाणी, सिर काट दे दियो क्षत्राणी

राजसिंह की मृत्यु 1680 ई ० में कुंभलगढ़ दुर्ग में हुई  यहा राजसिंह की छतरी बनी है

जयसिंह (1680-1698 ई)


जयसिंह ने (1687-91 ई) के बीच आकाल राहत कार्यो के लिए गोमती नदी के पानी को रोककर जयसमन्द झील/ढेबर झील  ( उदयपुर ) का निर्माण करवाया ।
जयसमन्द झील राजस्थान की सबसे बडी मीठे पानी की कृत्रिम झील है । (एशिया की दूसरी) ।
जयसमंद झील में सात टापू बने है । जिनमें सबसे बड़ा टापू बाबा का भागडा व सबसे छोटा टापू प्यारी है ।

अमरसिंह द्वितीय (1698-1710)


महाराणा जयसिंह की मृत्यु के पश्चात अमरसिंह द्वितीय मेवाड का राजा बना ।
अमर सिंह द्वितीय के शासनकाल में मारवाड़, मेवाड़ व आमेर के मध्य ' देबारी समझौता ' हुआ
देबारी समझौते के तहत् एक ओर समझौता हुआ जिसमें आमेर के सवाई जयसिंह के द्वारा अमरसिंह द्वितीय की पुत्री चंदकुंवरी से विवाह करने का वचन दिया गया । इस विवाह ने आमेर में कालांतर में उत्तराधिकार के संघर्ष को जन्म दिया ।

संग्रामसिंह द्वितीय (1710-1734 ई.)


संग्रामसिंह द्वितीय ने उदयपुर मे फतेहसागर झील के किनारे सहेलियों की बाडी बनवायी ।
संग्रामसिंह द्वितीय ने उदयपुर में "सहेलियों की बाडी' एवं सीसारमा गांव में वैद्यनाथ का मंदिर व वैद्यनाथ प्रशस्ति ( 1719 ईं॰ ) का निर्माण करवाया ।

जगतसिंह द्वितीय (1734-1751 ई )


इसके समय अफगान आक्रमणकारी नादिरशाह ने 1739 ईं में दिल्ली  पर आक्रमण किया ।
जगतसिंह द्वितीय ने 1743-1746 के बीच पिछोला झील में जगनिवास महलों का निर्माण करवाया
इनके दरबारी कवि नेक राम ने जगत विलास ग्रंथ लिखा ।
17 जुलाई 1734 ई. को हुरडा सम्मेलन ( भीलवाड़ा ) की अध्यक्षता जगतसिंह द्वितीय ने की । यह सम्मेलन जयपुर के सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बुलवाया गया ।

हुरडा सम्मेलन में राजपूताना के निम्नलिखित शासकों ने भाग लिया


  1. नागौर बख्तसिंह
  2. किशनगढ़ रायसिंह
  3. करौली गोपालदास
  4. बीकानेर जोरावर सिंह
  5. बूंदी दलेल सिंह (जयसिंह द्वितीय के दामाद)
  6. जोधपुर अभयसिंह
  7. कोटा दुर्जनशाल


मराठो द्वारा राजपूताना मे सर्वप्रथम आक्रमण बूंदी पर किया गया किंतु महाराणा जगतसिंह द्वितीय के काल मे चौथ वसूली सर्वप्रथम मेवाड से की गई 

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