Friday, 16 August 2019

 Rajasthan Ke Mele Part 7

वर्ष मे एक बार से ज्यादा भरने वाले मेले 

 Rajasthan Ke Mele Part 7
 Rajasthan Ke Mele Part 7

जाम्भोजी का मेला 

  • यह मेला मुकाम (नोखा) (बीकानेर) मे लगता है ।
  • यह फाल्गुन एवं आसोज में लगता है ।

वीरातरा मेला 

  • यह मेला बाड़मेर में लगता है ।
  • यह मेला चैत्र, भाद्र, माघ चौदस में भरता है ।

मारकंडेश्वर मेला 

  • यह मेला अंजारी गाँव (सिरोही) में लगता है ।
  • यह मेला भाद्रपद शुक्ल एकादशी और बैशाख पूर्णिमा को लगता है ।

सैपऊ महादेव मेला 

  • यह मेला धौलपुर में लगता है । 
  • यह मेला फाल्गुन व श्रावण मास की चतुर्थी को भरता है ।

चन्द्रप्रभा जी का मेला

  • यह मेला तिजारा (अलवार) में लगता है।
  • यह मेला फाल्गुन शुक्ल सप्तमी व श्रावण शुक्ल दशमी को भरता है ।

लोहार्गल मेला

  • यह मेला झुंझुनूं में लगता है ।
  • यह मेला भाद्र कृष्ण नवमी से अमावस्या तथा चैत्र की सोमवती अमावस्या को भरता है ।

Tuesday, 13 August 2019

राजस्थान के प्रमुख पशु मेले | Rajasthan Ke Mele Part 6
राजस्थान में पशुओं के लिए निम्नलिखित मेले आयोजित होते है

राजस्थान के प्रमुख पशु मेले | Rajasthan Ke Mele Part 6

राजस्थान के प्रमुख पशु मेले
राजस्थान के प्रमुख पशु मेले

मल्लीनाथ पशु मेला 


यह पशु मेला तिलवाडा (बाड़मेर) में लगता है । 
यह मेला चेत्र कृष्ण 11 से चैत्र शुक्ल 11 ( अप्रैल ) को लगता हैं । 
यह पशु मेला थारपारकर नस्ल के लिए प्रसिद्ध है । 
राज्य का सबसे प्राचीनतम पशु मेला मल्लीनाथ पशु मेला है जो लूणी नदी के किनारे पर लगता है । 
बजरंग पशु मेला - यह पशु मेला सिणधरी ( बाडमेर ) में लगता है । 

सेवडिया पशु मेला 

यह पशु मेला रानीवाड़ा ( जालौर ) में लगता है । 
यहाँ कांकरेज व मुर्रा नस्ल का क्रय-विक्रय होता है । 
रघुनाथपुरी पशु मेला - यह पशु मेला सांचौर ( जालौर ) में लगता है । 

गोमती सागर पशु मेला 

यह पशु मेला झालरापाटन ( झालावाड ) मालवी में लगता है । 
यह मेला बैशाख शुक्ल 13 से ज्येष्ठ कृष्ण 5 ( मई ) तक लगता है । 

ब्राह्मणी माता का मेला 

यह पशु मेला सोरसण ( बारां ) में लगता है । 
यह पशु मेला गधों के मेले के रूप में प्रसिद्ध है ।  

चंद्रभागा पशु मेला 

यह पशु मेला झालरापाटन ( झालावाड ) में लगता है । 
यह पशु मेला मालवी नस्ल के लिए प्रसिद्ध है । 
चंद्रभागा पशु मेला कार्तिक शुक्ल 11 से मार्गशीर्ष कृष्ण 5 ( नवम्बर ) तक लगता है । 

महाशिवरात्रि पशु मेला 

यह पशु मेला करौली में लगता है । 
यह पशु मेला हरियाणवी नस्ल के लिए प्रसिद्ध है ।

बसंती पशु मेला यह पशु मेला रूपवास ( भरतपुर) में लगता है । 

जसवन्त पशु मेला 

यह पशु मेला भरतपुर में लगता है ।
जसवन्त पशु मेला हरियाणवी नस्ल के लिए प्रसिद्ध है ।
यह मेला आश्विन शुक्ल 5 से 14 तक ( अक्टूबर ) लगता है 

बहरोड़ पशु मेला 

यह पशु मेला अलवर में लगता है ।
यह पशु मेला मुर्रा नस्ल के लिए प्रसिद्ध है ।

गधों का मेला 

यह पशु मेला लूणियावास (जयपुर) में लगता है ।
यह पशु मेला गधों के लिए प्रसिद्ध है ।

गोगामेडी पशु मेला 

यह पशु मेला गोगामेडी ( हनुमानगढ ) में लगता है ।
यह पशु मेला हरियाणवी नस्ल के लिए प्रसिद्ध है ।
गोगामेडी पशु मेला श्रावण पूर्णिमा से भाद्र पूर्णिमा ( अगस्त ) तक लगता है ।
राज्य का सबसे लम्बा पशु मेला गोगामेडी पशु मेला नोहर  हनुमानगढ मे लगता है । 

बलदेव पशु मेला 



यह पशु मेला मेड़ता ( नागोर ) में लगता है ।
यह पशु मेला नागौरी नस्ल के लिए प्रसिद्ध है ।
बलदेव पशु मेला चैत्र शुवल 1 से पूर्णिमा तक ( अप्रेल )लगता है । 

वीर तेजा पशु मेला 

वीर तेजा पशु मेला परबतसर ( नागौर ) मे लगता है ।
यह पशु मेला नागौरी नस्ल के लिए प्रसिद्ध है ।
यह मेला श्रावण पूर्णिमा से भाद्र अमावस्या ( अगस्त ) तक लगता है ।
राजस्थान मे आमदनी की दृष्टि से वीर तेजा जी पशु मेला सबसे बड़ा मेला माना जाता है । 

रामदेव पशु मेला 

रामदेव पशु मेला मानसर  (नागौर ) मे लगता है
यह पशु मेला नागौरी नस्ल के लिए प्रसिद्ध है ।
यह मेला मार्ग शुक्ल 1 से माघ पूर्णिमा ( फरवरी ) तक लगता है ।

आमेट का पशु मेला - यह मेला आमेट ( राजसमंद ) में लगता है 

कार्तिक पशु मेला 

यह पशु मेला पुष्कर ( अजमेर ) में लगता है । 
कार्तिक पशु मेला गिर नस्ल के लिए प्रसिद्ध है । 
यह मेला कार्तिक शुक्ल 5 से मार्गशीर्ष 2 ( नवम्बर ) तक  लगता है । 
पुष्कर पशु मेला - यह पशु मेला पुष्कर ( अजमेर) में लगता है । 

चंद्रसेन पशु मेला 

यह पशु मेला टोंक में लगता है । 
Note राजस्थान में सर्वाधिक पशु मेले नागौर में आयोजित किये जाते है ।
राज्य मे सर्वाधिक मेले डूंगरपुर ( 21 ) में लगते है ।

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Thursday, 8 August 2019

राजस्थान में प्रमुख लोक देवताओं के मेले | Rajasthan Ke Mele Part 5

प्रमुख लोक देवताओं के मेले 

राजस्थान में प्रमुख लोक देवताओं के मेले | Rajasthan Ke Mele Part 5
राजस्थान में प्रमुख लोक देवताओं के मेले | Rajasthan Ke Mele Part 5

जसनाथ जी का मेला - यह मेला कतरियासर (बीकानेर) में लगता है ।
जाम्भोजी का मेला - यह मेला मुकाम (नोखा) (बीकानेर) में लगता है
  • यह फाल्गुन एवं आश्विन अमावस्या में लगता है ।
  • यह बिश्नोई सम्प्रदाय का मेला है ।
  • यह मेला वर्ष में दो बार भरता है ।

रामदेवरा का मेला - यह मेला पोकरण (जैसलमेर) में लगता है
पनराज जी का मेला जैसलमेर
मल्लीनाथ पशु मेला - यह तिलवाड़ा (बाडमेर) में लगता है
  • यह मेला चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी में लगता है ।
  • मल्लीनाथ पशु मेला लूनी नदी पर आयोजित होता है ।

वीर फता जी का मेला सांथू गाँव ( जालौर) ।
ऋषभदेव/केसरियानाथ जी का मेला - धुलैव (उदयपुर)

गोतमेश्वर मेला आरनोद (प्रतापगढ)

  • यह मेला प्रतिवर्ष बैशाख पूर्णिमा को लगता है ।
  • गोतमेश्वर नामक स्थल पर गौतम ऋषि ने तपस्या की थी ।
  • आदिवासी इस मेले के अवसर पर अपने दिवंगत परिवारजनों की अस्थियों को विसर्जित करते है ।

देवनारायण जी का मेला आसीन्द ( भीलवाडा) । 

सवाई भोज मेला आसींद ( भीलवाडा) । 

यह मेला भाद्र शुक्ल अष्टमी को लगता है ।
देव बाबा का मेला नगला जहाज (भरतपुर) । 

जगन्नाथ जी का मेला रूपवास ( अलवर) ।  

आषाद सुदी 8 से 13 तक भरता है । 
दादू जी का मेला - नारायणा (जयपुर) । 
मामदेव का मेला - स्यालोदड़ा गांव (सीकर) । 
बाबा झुंझार जी का मेला - स्यालोदड़ा गाँव( सीकर) । 

गोगामेडी मेला गोगामेडी (हनुमानगढ) 

गोगानवमी (भाद्रपद कृष्ण नवमी) को भरता है ।  
यहाँ गोगाजी का थान बना हुआ है । 
गोगाजी को सपों का देवता के रूप में पूजा जाता है ।
एक अन्य गोगाजी का मेला गोगाजी की ओल्डी साचौर (जालौर) में भरता है । 

वीर तेजाजी का पशु मेला - परबतसर नागौर । 

यह मेला भाद्र शुक्ल पक्ष की दशमी को भरता है ।
यह मेला नागौरी बैल से सम्बन्धित है । 
आय की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बडा मेला है । 

पाबूजी का मेला - जोधपुर । 
माकड़ जी का मेला अजमेर । 
यह मेला आषाढ शुक्ल द्वितीया को भरता है ।

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The blue city of india - Jodhpur

The blue city of india - Jodhpur

The blue city of india - Jodhpur
The blue city of india - Jodhpur

Jodhpur is second biggest city in the Indian province of Rajasthan and has for quite some time been a prevalent goal among universal voyagers. Be that as it may, shockingly couple of guests know the beginnings of its sobriquet, "the blue city". The old town is a brilliant case of striking hues giving a photogenic setting to regular day to day existence.

However upon landing in Jodhpur, it isn't evident why this clamoring city is so intently connected with only one shading. All things considered, numerous different tones can likewise be seen on the bustling boulevards and in the bazaars. Most of Rajasthani ladies wear long, bright skirts and you can see this while visiting the shops of the Nai Sadak and looking at products on the slows down of the Sardar Market. Eye-getting, splendid oranges and yellows are famous hues for their textures. What's more, the Rajasthani custom for ladies to cover their heads with scarves – in light materials of correlative shades – adds to the multi-hued impressions of life here. That is likewise exacerbated by nearby men wearing sizeable turbans. The yellows and reds of their conventional headgear is the same amount of an attract to the eye as ladies' pieces of clothing.
The blue city of india
The blue city of india


To comprehend why Jodhpur is known as "the blue city" you ought to meander away from the commercial centers and new town, and head into the more established quarters of Jodhpur. Here, under the hundreds of years old insurance of Mehrangarh Fort, whose establishments were laid in 1459, on the sets of the city's originator, Rao Jodha, a considerable lot of the houses are painted blue.

That, clearly, clarifies why Jodhpur is known as "the blue city" however even experienced visit aides can't concede to the fundamental reason regarding why blue was picked. Some state the shading is related intimately with the Brahmins, India's clerical standing, and the blue places of the old city have a place with groups of that rank. Thusly, you may well hear the properties alluded to as the 'Brahmin Houses'.

There's likewise a contention that termites are the genuine reason. Defenders of this hypothesis accept that, truly, termites made critical auxiliary harm countless the structures of Jodhpur. The creepy crawlies are said to have crunched their way into the dividers of abodes and organizations. Occupants attempted to dispose of the unwelcome visitors, repulsed them and debilitated their arrival and further harm by including synthetic substances, including copper sulfate, to their standard whitewash.

The individuals who advance the termite hypothesis state that it's simple incident that a significant number of the blue houses are claimed by Brahmins, and that various families from different ranks likewise live in blue-painted homes. Some even trash the hypothesis that synthetic mixes are added to the colourwash, swearing that Jodhpur is a fine case of a naturally neighborly city. Only indigo, a characteristic color, is the reason for the blue tint, they state.

At last there might be no chance to get of building up the genuine reason about why the houses are blue. Walking around the lanes of the old town does, be that as it may, give you chances to look into the homes. A large number of the entryways stay open, permitting a knowledge into snapshots of ordinary Rajasthani family life.

Tuesday, 6 August 2019

राजस्थान में माताओं के मेले Rajasthan Ke Mele Part 4

राजस्थान में माताओं के मेले

राजस्थान में माताओं के मेले Rajasthan Ke Mele Part 4
राजस्थान में माताओं के मेले Rajasthan Ke Mele Part 4

नागणेची का मेला बीकानेरा - यह मेला नवरात्रों में लगता है
वीरातरा माता का मेला - बाड़मेर । 
यह मेला चैत्र भाद्र माघ चौदस में भरता है ।

सीतामाता मेला - प्रतापगढ । 

यह मेला ज्येष्ठ अमावस्या को लगता है ।

धनोप माता का मेला - भीलवाडा

यह मेला चैत्र कृष्ण एकम से दशमी को लगता है ।

ब्राह्मणी माता का मेला - सोरसन ग्राम बारा

यह मेला माघ शुक्ल सप्तमी को भरता है ।
ब्रह्माणी माता का मेला हाडौती कस्बे का एकमात्र गधों का मेला है ।

चौथ माता का मेला - चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर) । 

यह मेला माघ कृष्ण चतुर्थी को भरता है । 

कैलादेवी का लक्खी मेला - करौली । 

यह मेला चैत्र शुक्ल एकम् से दशमी को भरता है । 
यह मार्च-अप्रेल में भरता है । 
इस दिन लांगुरिया के गीत गाये जाते है । 
लाखों भक्त मेले में आते है अत: यह लक्खी मेला कहलाता है । 
नारायणी माता का मेला - सरिस्का ( अलवर) । 
यह मेला बैशाख शुक्ल एकादशी को भरता है । 

जिलाणी माता का मेला - अलवर  । 

शीतला माता का मेला - चाकसू (जयपुर)
शीतला अष्टमी (चैत्र कृषण-8) को यह मेला भरता है ।
शीतला माता के मन्दिर का पुजारी कुम्हार जाति का होता है ।
राजस्थान में सेढ़ल माता और शीतला एक ही है ।

बाणमाता मेला विराटनगर/ बैराठ (जयपुर) ।

यह मेला बैशाख पूर्णिमा को भरता है ।

खलकानी माता का मेला - जयपुर

रानी सती का मेला झुंझुनूं
यह मेला भाद्रपद अमावस्या में लगता है ।
मार्च 1988 में भारत सरकार द्वारा सती (निवारण) अधिनियम पारित कर देने के पश्चात् इस मेले पर भी रोक लगा दी गई ।

साण्डन कालका माता का मेला - चूरू । 

Monday, 5 August 2019

नवरात्रों में माताओं के मेले Rajasthan Ke Mele Part 3

नवरात्रों में माताओं के मेले 

नवरात्रों में माताओं के मेले Rajasthan Ke Mele Part 3
नवरात्रों में माताओं के मेले Rajasthan Ke Mele Part 3

  • करणी माता का मेला देशनोक (बीकानेर) में लगता है । 
  • यह मेला चैत्रा व अश्विन माह के नवरात्रों में भरता है । 
  • महोदरी माता का मेला मोदरा (जालौर) में लगता है । 
  • यह मेला चैत्र व आश्विन माह के नवरात्रों में भरता है ।
  • शीला माता का मेला जयपुर मे लगता है । 
  • यह मेला चैत्र व आश्विन माह के नवरात्रों में भरता है । 
  • जीणमाता का मेला रेवासा (सीकर) में लगता है । 
  • यह मेला चैत्र व आश्विन माह के नवरात्रों में भरता है ।
  • जीणमाता के मन्दिर मे अष्ट भुजा की मूर्ति है । 
  • जीणमाता के मंदिर का निर्माण 1064 ई में मोहित के हठड द्वारा करवाया गया । 
  • शाकम्भरी माता का मेला झुंझुनूं में लगता है । 
  • यह मेला चैत्र व आश्विन माह के नवरात्रों में भरता है । 
  • मनसा माता का मेला इन्द्रगढ़ में लगता है । 
  • यह मेला चैत्र व अश्विन माह के नवरात्रों में भरता है ।  
  • दधिमाता मेला गोठ मांगलोद (नागौर) में लगता है ।
  • यह मेला चैत्र व अश्विन माह के नवरात्रों में भरता है ।

Sunday, 4 August 2019

राजस्थान में प्रमुख मुस्लिम मेले और उर्स‬ | Muslim Mele in Rajasthan

राजस्थान में प्रमुख मुस्लिम मेले

राजस्थान में प्रमुख मुस्लिम मेले और उर्स‬ | Muslim Mele in Rajasthan
राजस्थान में प्रमुख मुस्लिम मेले और उर्स‬ | Muslim Mele in Rajasthan

मलिक शाह पीर का उर्स 

  • यह उर्स जालौर दुर्ग में लगता है 
  • यह उर्स अजमेर उर्स के पश्चात लगता है । 

गलियाकोट का उर्स 

  • यह उर्स डूंगरपुर में लगता है । 
  • यह उर्स दाउदी बोहरा संमप्रदाय का सबसे बडा उर्स है ।
  •  गलियाकोट डूंगरपुर में माही नदी के किनारे स्थित है ।

गागरोन का उर्स 

  • यह उर्स गागरोन दुर्ग (झालावाड) में मीठेशाह की दरगाह पर लगता है ।

नरहड़ के पीर का उर्स

  • यह उर्स नरहड़ (झुंझुनू) में लगता है । 
  • यह उर्स भाद्रपद कृष्ण अष्टमी जन्माष्टमी के दिन लगता है । 
  • यहाँ पर हजरत हाफिज शक्कर बाबा शाह की प्राचीन दरगाह है । 
  • शक्कर बाबा को बागड का धनी के उपनाम से भी जाना जाता है । 
  • इस दरगाह में जाल का वृक्ष है, जिस पर जायरिन अपनी मन्नतों के डोरे टांग देते है उनकी मन्नतें पूरी हो जाती है ।

तारकीन का उर्स

  • यह उर्स नागौर में लगता है । यह उर्स राज्य का दूसरा सबसे बड़ा उर्स है । 

चौटीला पीर का उर्स

  • यह उर्स पाली जिले में पीर दुल्लेशाह की दरगाह पर लगता है । 
  • यह उर्स कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा व द्वितीया को लगता है ।

पंजाबशाह का उर्स  

  • यह उर्स अजमेर में ढाई दिन का झोंपड़ नामक स्थान पर लगता है ।

ख्वाजा साहब का उर्स

  • यह उर्स ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर में लगता है ।
  • यह उर्स अजमेर में रज्जब माह की 1 से 6 तारीख को लगता है । 
  • अजमेर में 2016 में 804वाँ उर्स लगा । 
  • यह मुस्लिम धर्म का सबसे बड़ा उर्स है । 
  • इस उर्स का उद्घाटन भीलवाडा का गौरी परिवार करता है ।

Saturday, 3 August 2019

प्रमुख जातीय मेले | Rajasthan ke Mele Part 2

प्रमुख जातीय मेले 

प्रमुख जातीय मेले | Rajasthan ke Mele Part 2
प्रमुख जातीय मेले | Rajasthan ke Mele Part 2

  • मीणा का सबसे बड़ा मेला रामेश्वर धाम (सवाई माधोपुर) में लगता है ।
  • रामेश्वर में चम्बल, बनास, सीप का त्रिवेणी संगम होता है ।
  •  इस स्थान को मीणा प्रयाग के नाम से जाना जाता है । 
  • सहारिया जनजाति का सबसे बड़ा मेला सीताबाडी मेला बारां में लगता है । 
  • यह मेला ज्येष्ठ माह की अमावस्या को लगता है ।
  • गरासिया जनजाति का सबसे बडा मेला सियावा का मेला या मनखा रो मेलो सियावा (सिरोही) में लगता है ।
  • यह मेला बैशाख शुक्ल चतुर्थी को लगता है । 
  • डामोर जनजाति का सबसे बडा मेला ग्यारसी की रेवाडी का मेला डूंगरपुर में लगता है ।
  • डामोर जनजाति का एक अन्य महत्वपूर्ण मेला झेला बावसी मेला गुजरात के पंचमहल जिले में लगता है ।

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Friday, 2 August 2019

Rajasthan ke mele Part 1 | क्षेत्र व जाति विशेष मेले

क्षेत्र व जाति विशेष मेले

Rajasthan ke mele Part 1 क्षेत्र व जाति विशेष मेले

कपिलमुनि का मेला

  • जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा मेला कपिलमुनि का मेला कोलायत (बीकानेर) में लगता है ।
  • यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को लगता है ।
  • हिन्दू-सिक्ख धर्म का सबसे बडा मेला कपिलमुनि का मेला कोलायत (बीकानेर) में लगता है ।

रामदेवरा मेला

  • मारवाड़ प्रदेश का सबसे बडा मेला रामदेवरा मेला (बाबा रामदेव जी का मेला) पोकरण (जैसलमेर) में लगता है ।
  • यह मेला भाद्र शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक लगता है ।
  • साम्प्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा मेला रामदेवरा मेला जैसलमेर में लगता है ।

ऋषभदेव जी का मेला

  • हिन्दु-जैन सद्भाव का सबसे बड़ा मेला ऋषभदेव जी का मेला थुलेव (उदयपुर) में लगता है ।
  • यह मेला चैत्र कृप्या अष्टमी-नवमी को लगता है ।
  • धुलेव (उदयपुर) में जैन तीर्थकर ऋषभदेव जी की काले पत्थर की मूर्ति है ।

बेणेश्वर का मेला

  • वागड प्रदेश का सबसे बड़ा मेला बेणेश्वर का मेला नवाटापुरा (डूंगरपुर) में लगता है ।
  • बैणेश्वर मेला माघ शुक्ल एकादशी से माघ शुक्ल पूर्णिमा तक भरता है ।
  • बैणेश्वर नामक शिवलिंग पर आधारित है । यह शिवलिंग  स्वयं अद्भुत माना गया है ।
  • यह मेला आदिवासियों का सबसे बड़ा मेला है । 
  • बेणेश्वर के मेले को बागड प्रदेश का पुष्कर तथा आदिवासियों का कुंभ भी कहा जाता है ।
  • बैणेश्वर मेला डूंगरपुर जिले में बैणेश्वर के नवाटापुरा नामक स्थान पर सोम-माही-जाखम नदियों के संगम पर शिवलिंग की पूजा हेतु लगता है ।
  • आदिवासी जातियों में यह मेला मुख्यत भील जनजाति है इस मेले में मुख्यत डूंगरपुर, बांसवाडा जिले के लोग भाग लेते है ।
  • इस मेले को जनजातियों का लोक मेला के नाम से भी जाना जाता है ।
  • वेणेश्चर नामक स्थान पर राजा बलि की यज्ञ स्थली है ।

सीताबाडी का मेला

  • हाड़ौती प्रदेश का सबसे बडा मेला सीताबाडी का मेला शाहबाद (बारां) में लगता है
  • यह मेला ज्येष्ठ माह को अमावस्या को लगता है ।
  • सीताबाडी का मेला सहरिया जनजाति का कुंभ मेला माना जाता है ।
  • यह मेला हाड़ौती अंचल का सबसे बड़ा मेला है 
  • सीताबाडी में सात कुण्ड है ।

महावीर जी का मेला

  • जैनियों का सबसे बड़ा मेला महावीर जी का मेला (करौली) में लगता है।
  • यह मेला चैत्र शुक्ल 13 से बैशाख कृष्ण 2 तक लगता है इस मन्दिर का चढावा चमार जाति के लोग लेते है तथा रथ यात्रा के समय चर्मकार के वशजों का हाथ लगवाना पहली परम्परा है।

भर्तृहरि का मेला

  • मत्स्य प्रदेश का सबसे बडा मेला भर्तृहरि का मेला अलवर में लगता है ।
  • यह मेला भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को लगता है ।
  • यहाँ पर भर्तृहरि का समाधि स्थल स्थित है ।

साहवा का मेला

  • सिक्ख धर्म का सबसे बडा मेला साहवा का मेला साहवा (चूरू) में लगता है ।
  • यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को लगता है ।
  • साहवा गुरूद्वारे के साथ नानक देव एवं गुरूगोविन्द सिंह के आने एवं रहने की स्मृतियां जुडी हुई है ।

षुष्कर का मेला

  • मेरवाड़ा प्रदेश का सबसे बडा मेला षुष्कर का मेला पुष्कर (अजमेर) में लगता है ।
  • यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को लगता है ।
  • पुष्कर मेले को राजस्थान का रंगीला मेला कहा जाता है ।
  • विश्व का सबसे बड़ा पशु मेला पुष्कर अजमेर में लगता है पुष्कर मेले में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक आते है ।
  • इस मेले में ऊँटों की सर्वाधिक बिक्री होती है ।

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Rajasthan ke Pramukh Festival 

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Thursday, 1 August 2019

Rajasthan ke Pramukh Festival | राजस्थान के प्रमुख त्यौहार
नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में आप राजस्थान के प्रमुख त्यौहार के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगे तो अपने दोस्तों को जरूर शेयर करें साथ ही PDF notes free download करे

Rajasthan ke Pramukh Festival | राजस्थान के प्रमुख त्यौहार

राजस्थान में हर महीने में कोई ना कोई त्यौहार जरूर होता है यहां हर महीने के प्रमुख त्यौहार दिए गए है

चैत्र

धुलंडी ( चैत्र कृष्ण प्रतिपदा )

  • चैत्र माह की कृष्ण प्रतिपदा को होली के दूसरे दिन धुलंडी मनायी जाती है । 
  • इस दिन होली की अवशिष्ट राख की वंदना की जाती है व रंग व गुलाल आदि से सभी होली खेलते है 

भिनाय की होली 

  • यह भीलवाडा व अजमेर के बीच मनाई जाती है । 
  • इसमें दो दल एक दूसरे को कोडा मारते है । 

ब्यावर की होली 

  • मोची जाति के देवर-भाभी के बीच खेली जाती है ।
  •  इसमें देवर रंग लगाता है तथा भाभी कोडा मारती है ।  

श्री महावीर जी की लट्ठमार होली

  • इसमें पुरुष महिलाओं के साथ खेलते है । महिलाएँ लट्ठ मारती है । 

बाडमेर की होली 

  • यह पत्थर-मार होली के रूप में प्रसिद्ध है । इस अवसर पर ' इलोजी ' की सवारी निकाली जाती है ।

मेवाड़ की होली 

  • यहाँ पर आदिवासियों के द्वारा भगोरिया होली खेली जाती है ।
  • इस दिन कोटा के आवां का न्हान तथा शेखावाटी का गीदड नृत्य प्रसिद्व है ।

शीतलाष्टमी ( चैत्र कृष्ण अष्टमी ) 

  • शीतला अष्टमी को ठण्डा भोजन खाया जाता है, जिसे 'बासिड़ा' कहा जाता है । 
  • इसी दिन शीतला माता की पूजा भी की जाती है । 
  • इसे (चेचक) के प्रकोप को दूर करने वाली देवी माना जाता है । 
  • शीतलामाता का मंदिर चाकसू-जयपुर में है ।

घुड़ला ( चैत्र कृष्ण अष्टमी )

  • यह जोधपुर के राव सातलदेव की याद में मनाया जाता है ।

चैत्र शुक्ल एकम 

  • हिन्दुओं का नव वर्ष इस दिन से शुरू होता है । नवरात्रों का प्रारम्भ इसी दिन होता है ।

सिंजारा ( चैत्र शुक्ल द्वितीया ) 

  • यह त्यौहार पुत्री और पुत्रवधू के प्रति प्रेम का प्रतीक है । 
  • गणगौर व छोटी तीज के एक दिन पूर्व सिंजारा निकाला जाता है ।

गणगौर ( चैत्र शुक्ल तृतीया ) 

  • यह गण (शिव) , गौर (पार्वती) के अखण्ड प्रेम का प्रतीक है ।
  • इस दिन कुंवारी कन्याएँ मन पसन्द 'वर' प्राप्ति की कामना करती है ।
  • इस दिन गणगौर की सवारी निकाली जाती है तथा जयपुर उदयपुर की गणगौर प्रसिद्ध है ।
  • गणगौर का त्यौहार 16 दिनो तक चलता है ।
  • राज्य में सर्वाधिक गीत गणगौर के अवसर पर गाये जाते है ।
  • धींगा गवर जोधपुर की प्रसिद्ध है ।
  • नाथद्वारा (राजसमंद) की गुलाबी गणगौर (चैत्र शुक्ल पंचमी) प्रसिद्ध है ।
  • रामनवमी ( चैत्र शुक्ल नवमी) इस दिन भगवान राम का जन्मदिन मनाया जाता है ।

बैशाख

आखा तीज या अक्षय तृतीया ( बैशाख शुक्ल तृतीया )

  • राज्य में कृषक वर्ग में सात अन्नों तथा हल का पूजन करके शीघ्र वर्षा कामना के साथ यह त्यौहार मनाया जाता है । 
  • शास्त्रों के अनुसार इस दिन सतयुग, त्रेतायुग का आरम्भ माना जाता है । 
  • सम्पूर्ण वर्ष में यह एक बडा अबूझ सावा है । 
  • इस दिन राज्य में हजारों विवाह विशेषत: बाल विवाह होते है ।

बैशाख पूर्णिमा 

  • महात्मा बुद्ध का जन्म उन्हें ज्ञान की प्राप्ति तथा मोक्ष की प्राप्ति इसी दिन हुई ।

ज्येष्ठ

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ज्येष्ठ माह के त्योहार

वट सावित्री व्रत या बड़मावस ( ज्येष्ठ अमावस्या ) 

  • इस व्रत से स्त्री को अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है ।
  • इस दिन स्त्रियाँ  बड/बरगद की पूजा करती है । 

निर्जला एकादशी ( ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी )

  • इस एकादशी को व्रत रखने से वर्ष की शेष सभी एकादशियो के व्रत का फल मिल जाता है ।
  • इस दिन बिना जल के व्रत किया जाता है ।

पीपल पूर्णिमा ( ज्येष्ठ पूर्णिमा ) 

  • यह ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाई जाती है । 
  • इस दिन पीपल वृक्ष की पूजा की जाती है 

आषाढ

राजस्थान के प्रमुख त्यौहार
आषाढ़ माह के त्योहार

योगिनी एकादशी  (आषाढ कृष्ण एकादशी )

  • इस एकादशी का व्रत करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते है

देवश्यनी एकादशी ( आषाढ कृष्ण एकादशी )

  • इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए सो जाते हैं । 
  • इस दिन से चार माह तक कोई भी मांगलिक कार्य सम्पन्न नहीं किये जाते हैं ।

गुरु पूर्णिमा  (आषाढ पूर्णिमा)

  •  इस दिन गुरू का पूजन होता है । 
  • इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है ।

 श्रावण

Rajasthan ke Pramukh Festival in  hindi
सावन माह के त्योहार

नाग पंचमी ( श्रावण कृष्ण पंचमी ) 

  • इस दिन नाग की पूजा की जाती है ।
  • इस दिन घर के दरवाजे के दोनों और गोबर से नाग का चित्र अंकित किया जाता है ।
  • कहीं-कहीं यह त्यौहार श्रावण शुक्ला पंचमी को भी मनाया जाता है ।
  • जोधपुर में नागपंचमी का मेला लगता है ।

कामिका एकादशी व्रत ( श्रावण कृष्ण एकादशी )

  • कामिका एकादशी व्रत निम्बार्को का रोहिणी व्रत है । 
  • कामिका व्रत को वैष्णव का व्रत भी कहा जाता है
  • इस व्रत मे भगवान विष्णु की पूजा की जाती है ।

हरियाली अमावस्या ( श्रावण अमावस्या ) 

  • इस दिन खीर और मालपुए भोजन में बनाते है ।
  • अजमेर के मांगलियावास गाँव में हरियाली अमावस्या को वृक्ष मेला लगता है ।
  • श्रावणी अमावस्या को बुड्डा जोहड़ मेला तथा डिग्गीपुरी का राजा मेला लगता है ।

श्रावणी सोमवार 

  • श्रावण के सभी सोमवार को लडकियाँ भगवान शिव की पूजा करके खाना खाती है ।

छोटी तीज ( श्रावण शुक्ल तृतीया ) 

  • तीज के साथ ही त्यौहार का आगमन माना जाता है जो गणगौर के साथ समाप्त होता है । 
  • इस दिन झूलाझूलने की परम्परा है । 
  • तीज के दिन जयपुर में तीज माता की सवारी निकाली जाती है ।
  • छोटो तीज के लिए कहाँ गया है तीज त्यौहारा बावडी, ले डूबी गणगौर
  • श्रावण तीज त्यौहार का वर्णन सुंधा अभिलेख से मिलता है

रक्षा बन्धन  (श्रावण पूर्णिमा ) 

  • यह मुख्यत ब्राह्मणों का त्यौहार माना जाता है ।
  • रक्षा बन्थन को नया यज्ञोपवीत धारण किया जाता है ।
  • प्राचीन काल में इस दिन बच्चों की पढाई प्रारम्भ की जाती थी । 
  • अत: श्रावणी का दिन विद्या आरम्भ का प्रथम दिन माना जाता है।
  • इस दिन घर के प्रमुख द्वार के दोनों ओर श्रवण कुमार के चित्र बनाकर पूजन करते है ।
  • इसे नारियल पूर्णिमा या सत्य पूर्णिमा भी कहा जाता है ।
  • रक्षा बंधन के दिन भारत के प्रसिद्व तीर्थ अमरनाथ में बर्फ का शिवलिंग बनता है ।

भाद्र

राजस्थान के प्रमुख त्यौहार

बडी तीज/सातुडी तीज/कजली तीज/बूढी तीज ( भाद्र कृष्ण तृतीया) 

  • इस दिन व्रत रखकर गायों का पूजन करते है । 
  • सात गायों के लिए आटे की सात रोटी बनाकर उन्हें खिलाकर ही भोजन ग्रहण किया जाता है ।
  • कजली तीज मेला बूंदी में लगता है ।
  • बडी तीज को नीम की पूजा की जाती है ।

कृष्ण जन्माष्टमी ( भाद्र कृष्ण अष्टमी )

  • इसे कृष्ण जन्मोत्सव के रूप मे मनाया जाता है ।
  • नाथद्वारा (राजसमद) में जन्माष्टमी का मेला लगता है ।
  • भाद्र कृष्ण अष्टमी के दिन जाम्भोजी का जन्म हुआ तथा इसी दिन नरहड़ के पीर का उर्स लगता है ।

गोगा नवमी ( भाद्र कृष्ण नवमी ) 

  • इस दिन गोगा जी तथा मांगलिया मेहाजी की पूजा की जाती है। 
  • इस दिन हनुमानगढ़ जिले में गोगामेडी नामक स्थान पर मेला भरता है ।

हरतालिका तीज ( भाद्र शुक्ल तृतीया )

  • इस पर्व को गौरी शंकर का पूजन करके मनाया जाता है । 
  • इस व्रत को सभी स्त्रियाँ कर सकती है । पूरे दिन निराहार रहकर सायंकाल स्नानादि के पश्चात् पार्वती व शिव की पूजा की जाती है ।
  •  तेरह प्रकार के व्यंजन बनाकर कल्पे जाते हैं ।

शिवा चतुर्थी ( भाद्र शुक्ल चतुर्थी ) 

  • इस दिन स्त्रियाँ उपवास करती हैं तथा अपने सास-ससुर को घी गुड़, लवण आदि से बना भोजन कराती हैं ।

गणेश चतुर्थी ( भाद्र शुक्ल चतुर्थी) 

  • इस पर्व को गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाते है ।
  • महाराष्ट्र में यह पर्व विशिष्ट रूप से मनाया जाता है ।
  • गणेश चतुर्थी को चतरा/चतडा चौथ भी कहते हैं ।
  • शेखावाटी में इस दिन लड़कों के सिंजारे आते है ।
  • इस दिन रणथम्भौर (सवाई माधोपुर) का मेला प्रसिद्ध है 
  • चतड़ा/चतरा चौथ, गणेश चतुर्थी के दिन नव विवाहित युवकों को सिंजारा भेजा जाता है ।

ऋषि पंचमी ( भाद्र शुक्ल पंचमी ) 

  • इस दिन गंगा स्नान का विशेष महात्म्य है यह व्रत जाने-अनजाने हुए पापों के प्रक्षालन हेतु किया जाता है 
  • गणेशजी का कलश, नवग्रह तथा सप्तऋषि व अरुंधति की पूजा करके कथा सुनी जाती है ।
  • माहेश्वरी समाज में राखी इसी दिन मनाई जाती है  

राधाष्टमी ( भाद्र शुक्ल अष्टमी ) 

  • यह राधा जी के जन्म के रूप में मनाया जाता है । 
  • इस दिन अजमेर की निम्बार्क पीठ सलेमाबाद में मेला भरता है । 

विश्व कर्मा जयन्ती (भाद्रपद शुक्ल दशमी)

  • इस दिन यंत्र और औजारों की पूजा की जाती है ।
  • इस दिन तेजा दशमी का त्यौहार भी मनाया जाता है । 

रामदेव जयन्ती (भाद्रपद शुक्ल दशमी) 

  • बाबा रामदेव का जन्मोत्सव रामदेवरा रूणेचा (जैसलमेर) में विशाल मेले का आयोजन किया जाता है । 

जलझूलनी/देवझूलनी (भाद्र शुक्ल एकादशी)

  • इस दिन देवों की मूर्तियों को पालकियों तथा विमानों में गाजे-बाजे के साथ लेकर जलाशय के पास जाते है तथा स्नान करवाया जाता है ।
  • जलझूलनी को ढोला ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है 

श्राद्धपक्ष (भाद्र पूर्णिमा)

  • इस दिन से सर्पपितृ श्राद्ध पक्ष प्रारभ हो जाता है तथा आश्विन अमावस्या तक चलता है । 
  • इस अवधि मे श्राद्ध किया जाता है । 
  • बुजुर्गों की मृत्यु तिथि के दिन श्रद्धापूर्वक तर्पण और ब्रह्मण को भोजन कराना ही श्राद्ध है । इस संस्कार को कनागत कहते है ।


साँझी

  • इस त्यौहार में 15 दिन (भाद्र पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या) तक कुँवारी कन्याएँ भांति-भांति की सांझियाँ बनाती है व पूजा करती हैं ।

सतिया अमावस्या (भाद्रपद अमावस्या) 

  • भाद्रपद की अमावस्या को सतियां अमावस के नाम से जाना जाता है ।

बछबारस (भाद्र कृष्ण द्वादशी) 

  • भाद्र कृष्ण द्वादशी के दिन पुत्रवती स्त्रियां पुत्र की मंगलकामना के लिए व्रत करती है । इस दिन गाय व बछडों की सेवा की जाती है ।

आश्विन

दुर्गाष्टमी (आश्विन शुक्ल अष्टमी) 

  • सम्पूर्ण भारत में विशेषत: पश्चिम बंगाल में उल्लासपूर्वक मनाई जाती है ।
  • नवरात्रा आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रा मनाये जाते है । 
  • इस अवसर पर दुर्गा देवी की पूजा की जाती है तथा नौ कुंवारी कन्याओँ को भोजन करवाया जाता है । 
  • इस अवसर पर जयपुर में शीलादेवी के मंदिर में पूरे नौ दिन तक मेला लगता है । 
  • राजपूत लोग इस अवसर पर अस्त्र-शस्त्र की पूजा करते हैं । 
  • इसे शरदीय नवरात्रा के नाम से भी जाना जाता है ।

दशहरा (आश्विन शुक्ल दशमी) 

  • इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर बुराई पर विजय पाईं, इसलिए इसे विजयादशमी कहते है ।
  • राजस्थान में कोटा तथा भारत में मैसूर शहर में दशहरे के दिन सबसे बडा मेला लगता है । 
  • दशहरे के दिन शमी वृक्ष (खेजडी) की पूजा की जाती है तथा लीलटास पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है ।
  • एक पुरानी परम्परा के अनुसार राजस्थान दो शासक इसी दिन शिकार का बहाना बनाकर पडोसियों के विरुद्ध अभियान शुरू करते थे ।
  • मुगल सम्राटों में जहांगीर दशहरा देखने का शौकीन था ।

शरद पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा)

  • इसे रास पूर्णिमा भी कहते है
  • ज्योतिषियों के अनुसार सम्पूर्ण वर्ष में केवल इसी दिन चंद्रमा षोडश कलाओं से परिपूर्ण होता है । रात्रि को खीर बनाकर पूरी रात चांदनी रात में रखकर सुबह खाईं जाती है ।

कार्तिक

करवा चौथ (कार्तिक कृष्ण चतुर्थी )

  • यह त्यौहार स्त्रियों का सर्वाधिक प्रिय त्यौहार है । 
  • इस दिन स्त्रियां सुहाग की लंबी आयु के लिए व्रत करती है ।

अहोई अष्टमी (कार्तिक कृष्ण अष्टमी ) 

  • इस दिन पुत्रवती स्त्रियां निर्जल व्रत करती है ।
  • इस दिन दीवार पर स्याऊ माता व उसके बच्चों के चित्र बनाये जाते है । 

तुलसी एकादशी ( कार्तिक कृष्ण एकादशी )

  • इस दिन तुलसी की पूजा की जाती है । 
  • तुलसी नामक पौधे की महिमा वैद्यक ग्रंथों के साथ-साथ धर्मशास्त्रों में भी वर्णित की गई है । 
  • तुलसी को विष्णु प्रिया भी माना जाता है । 

धन तेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी) 

  • इस दिन धनवन्तरि वैद्य जी का पूजन किया जाता है । 
  • यमराज का भी पूजन किया जाता है । 
  • यम के लिए आटे का दीपक बनाकर घर के मुख्य द्वार पर दीपक रखा जाता है । 
  • इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है ।

रूप चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) 

  • इस पर्व का सम्बन्थ स्वच्छता व सौंदर्य से है ।
  • इस दिन को छोटी दीपावली के रूप में मनाया जाता है । 

दीपावली (कार्तिक अमावस्या) 

  • यह हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है ।
  • यह दिन आर्य समाज के संस्थापक दयानन्द सरस्वती तथा भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है । 
  • इस दिन व्यापारी लोग अपने बहिखातों की पूजा करते है 

गोवर्धन पूजा व अन्नकूट (कार्तिक शुक्ल एकम्) 

  • इस दिन प्रभात के समय गौ के गोबर से गोवर्धन की पूजा की जाती है । 
  • इस दिन मन्दिरों में अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है ।
  • यह नाथद्वारा (राजसमन्द) का प्रसिद्ध महोत्सव है ।

भैया दूज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) 

  • इस दिन भाई बहन के घर जाकर भोजन करता है । 
  • इसे यम द्वितीय के रूप मे मनाया जाता है

गोपाष्टमी ( कार्तिक शुक्ल अष्टमी )

  • इस दिन गाय व बछड़े की पूजा की जाती है । 
  • इस दिन गायों को ग्रास देकर, उनकी परिक्रमा करके थोडी दूर तक उनके साथ जाने से समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती है ।

आंवला नवमी/अक्षय नवमी (कार्तिक शुक्ल नवमी) 

  • इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है । 
  • इस व्रत को करने से व्रत, पूजन, तर्पण आदि का फल अक्षय हो जाता है, इसलिए इसे अक्षय नवमी कहते है ।

देव उठनी ग्यारस (कार्तिक शुक्ल एकादशी) 

  • इसे प्रबोधिनी एकादशी कहते है ।
  • इस दिन भगवान विष्णु चार माह तक निद्रावस्था में रहने के बाद जागते है ।
  • इस दिन से समस्त मांगलिक कार्यं प्रारम्भ होते है
  • इस दिन बिष्णु भगवान का तुलसी के पौधे से विवाह किया जाता है ।
  • इस दिन ईख की पूजा कर उसे पहले-पहले चूसा जाता है ।

 कार्तिक पूर्णिमा 

  • कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान और पुष्कर स्नान का विशेष महत्व है ।
  • कोलायत (बीकानेर) चन्द्रभागा (झालावाड़) पुष्कर (अजमेर) में इस दिन विशाल मेले का आयोजन होता है ।
  • इस दिन भगवान का मत्स्य अवतार हुआ था ।
  • इस दिन गुरूनानक जी का जन्म हुआ था ।
  • इसे त्रिपुर पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है । 
  • इस दिन भगवान शंकर के द्वारा त्रिपुरासूर राक्षस का वध किया गया ।

मकर सक्रांति 

  • इस दिन सूर्य की पूजा कर दान-पुण्य किया जाता है तथा बहुएं रूठी हुई सास को मनाती है ।
  •  इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ 13 वस्तुएँ दान करती है ।
  • मकर सक्रांति प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मनाई जाती है 

पौष

गुरू गोविन्द सिंह जयन्ती (पौष शुक्ल सप्तमी) 

  • इस दिन गुरू गोबिन्द सिंह जी ने गुरू परम्परा को समाप्त कर अपने धर्म ग्रंथ 'गुरू ग्रंथ साहिब' को गुरू घोषित किया ।

माघ

तिलचौथ (माघ कृष्ण चतुर्थी) 

  • इसे सकट चौथ भी कहते है ।
  • गणेशजी व चौथ माता को तिलकुट का भोग लगता है ।
  • सवाई माधोपुर जिले में चौथ का बरवाड़ा नामक स्थान पर चौथ माता के विशाल मेले का आयोजन किया जाता है ।

षट्तिला एकादशी ( माघ कृष्णा एकादशी )

  • इसके अधिष्ठाता देव भगवान विष्णु है । 
  • इस दिन काली गाय और काले तिलों के दान का विशेष महत्त्व होता है । 6 प्रकार के तिलों का प्रयोग होने से इसे षट्तिला एकादशी भी कहते है ।

मौनी अमावस्या (माघ अमावस्या) 

  • इस दिन मौन व्रत किया जाता है क्योंकि मौन व्रत धारण करने से आत्मबल में वृद्धि होती है । 
  • यह भगवान मनु का जन्मदिन हैं ।

बसंत पंचमी ( माघ शुक्ला पंचमी )

  • भगवान श्रीकृष्ण इस उत्सव के अधिदेवता है इसलिए ब्रज प्रदेश में इस दिन राधा और कृष्ण की लीलाएँ रचाई जाती है

माघ स्नान (माघ पूर्णिमा )

  • इस दिन से माघ स्नान प्रारंभ होता है । 
  • माघ पूर्णिमा को डूंगरपुर के नवाटापुरा नामक स्थान पर वेणेश्वर मेला लगता है ।

फाल्गुन

महाशिवरात्री (फाल्गुन कृष्ण तैरस) 

  • यह त्यौहार भगवान शिव के जन्मोत्सव में मनाया जाता  है ।

ग्यारस आमलकी (फाल्गुन शुक्ल एकादशी) 

  • पुत्र होने पर पीहर पक्ष की ओर से वस्त्र आदि भेजे जाते है, जिसे ढूंढ कहते है । खाटूश्याथ जी का मेला प्रारंभ होता है ।

होलिका दहन

  • यह फाल्युन की पूर्णिमा को भगत प्रहलाद की स्मृति में मनाईं जाती है ।