Tuesday, 19 March 2019

Rajasthan ke Lok Geet GK in Hindi - राजस्थानी लोकगीत
Rajasthan ke Lok Geet राजस्थान में गाए जाने वाले गीतों के अनुपात में लोकगीतों का दायरा अधिक बड़ा है लोक गीत राजस्थानी संस्कृति के अभिन्न अंग है प्राचीन काल से ही राजस्थानी लोक संगीत प्रेमी है

रविन्द्र नाथ टैगोर ने लोक गीतों को संस्कृति का सुखद संदेश ले जाने वाली कला कहा है ।

महात्मा गाँधी के शब्दों में - लोकगीत जनता की भाषा है ...... लोक गीत हमारी संस्कृति के पहरेदार है ।
देवेन्द सत्यार्थी के अनुसार' लोकगीत किसी सस्कृति के मुँह बोले चित्र है ।

rajasthan ke lok geet gk - राजस्थानी लोकगीत

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Rajasthan ke Lok Geet GK in Hindi - राजस्थानी लोकगीत

लोकगीत सरल तथा साधारण वाक्यों से ओत-प्रोत होते है और इसमें लय को ताल से अधिक महत्व दिया गया है Rajasthan ke Lok Geet में मुख्यत. तीन वस्तुओं का समायोजन होता है, ये निम्न है गीत ( शब्द योजना ) , धुन ( स्वर योजना ) , वाद्य ( स्वर तथा लय योजना ) ।
rajasthan ke lok geet मे तीन, सात, नौ, बत्तीस व छप्पन संख्याओं का प्रयोग मिलता है और साथ ही लय बनाने के लिए उनमें निरर्थक शब्दों का भी समायोजन कर लिया जाता है ।
कुछ विद्वान लोक वार्ता का प्रथम संकलनकर्ता कर्नल जेम्स टॉड को मानते है, किन्तु वास्तविक अर्थों में 1892 ईं ० में प्रकाशित C. E. गेब्हर का ग्रंथ ' फोक सांग्स आँफ सदर्न इंडिया ' को भारत में लोक साहित्य का प्रथम ग्रंथ माना जाना चाहिए ।

राजस्थान के लोकगीत

राजस्थान लोक संगीत
 प्रमुख लोक गीत

  • राजस्थान के लोक गीतों को संग्रह करने का कार्यं जैन कवियों द्वारा आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व किया गया था ।

आंगो मोरियों

  • यह एक राजस्थानी लोक गीत है , जिसमें पारिवारिक सुख का चित्रण मिलता है ।
औल्यूँ
  • यह किसी की याद में गाया जाने वाला गीत है ।
आंबो
  • यह गीत पुत्री की विदाई पर गाया जाता है ।

अजमो

  • यह गीत गर्भावस्था के आठवें महीने में गाया जाता है ।

इडूणी

  • यह गीत स्त्रियां पानी भरने जाते समय गाती है ।

उमादे

  • राजस्थान में यह रूठी रानी का गीत है ।

ढोलामारू

  • यह सिरोही का प्रेमकथा पर आधारित गीत है । इसे ढाढी गाते है । इसमें ढोला मारू की प्रेमकथा का वर्णन किया गया है ।

झोरावा

  • जैसलमेर जिले में पति के प्रदेश जाने पर उसके वियोग मे गाया जाने वाला गीत है ।

झूलरिया

  • यह गीत माहेरा या भात भरते समय गाया जाता है ।

फतमल

  • यह गीत हाड़ौती के राव फतहल तथा उसकी टोडा की रहने वाली प्रेमिका की भावनाओं से संबंधित है ।

फतसड़ा

  • विवाह के अवसर पर अतिथियों के आगमन पर यह गीत गाया जाता है ।

फाग

  • यह होली के अवसर पर गाया जाने वाला गीत है ।

तेजा

  • यह तेजाजी की भक्ति में खेत की बुवाई/जुताई करते समय गाया जाता है ।


मोरिया थाईं रे थाईं

  • इस गरासिया गीत में दूल्हे की प्रशंसा की जाती है और महिलाएं इसके इर्द गिर्द नृत्य करती है । 

मरसिया

  • मारवाड़ क्षेत्र मे किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की मृत्यु के अवसर पर गाया जाने वाला गीत ।

मोरिया

  • इसमें ऐसी बालिका की व्यथा है, जिसका संबंध तो तय हो चुका है, लेकिन विवाह में देरी है यह एक विरह गीत है । मोरिया का अर्थ मोर होता है ।

माहेरा

  • बहिन के लडके या लडकी की शादी के समय भाई उसको चूनडी ओंढाता है और भात भरता है । अतः इस प्रसंग से संबधित गीत भात/माहेरा के गीत कहलाते है ।

मूमल

  • जैसलमेर में गाया जाने वाला श्रृंगारित एव प्रेम गीत है । मूमल लोद्रवा ( जैसलमेर ) की राजकुमारी थी ।

लाखा फुलाणी के 'गीत-

  • ये गीत मध्यकाल से प्रारंभ माने जाते है और इनकी उत्पत्ति सिंध प्रदेश से हुई थी ।

लांगुरिया

  • करौली क्षेत्र की कुल देवी 'केला देवी' की आराधना में गाए जाने वाले ये भक्ति गीत है ।

लसकरिया

  • लसकरिया गीत कच्छी घोडी नृत्य करते समय गाया जाता है ।

बीन्द

  • बीन्द गीत कच्छी घोडी नृत्य करते समय गाया जाता हैं

रसाला

  • रसाला गीत कच्छी घोडी नृत्य करते समय गाया जाता है ।

रमगारिया

  • रमगारिया गीत कच्छी घोडी नृत्य करते समय गाया जाता है ।

लावणी

  • लावणी का अर्ध बुलाने से है । नायक के द्वारा नायिका को बुलाने के लिए यह गीत गाया जाता है । मोरध्वज, ऊसंमन, भरथरी आदि प्रमुख लावणियां है ।

लूर

  • यह राजपूत स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत है ।

लोरी

  • ये गीत माँ द्वारा अपने बच्चे को सुलाने के लिए गाती है ।

गोरबंद

  • यह गणगौर पर स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत है । गोरबंद ऊँट के गले का आभूषण होता है । राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों विशेषत: मरूस्थली व शेखावाटी क्षेत्रों में लोकप्रिय 'गोरबन्द' गीत प्रचलित है ।

गोपीचन्द

  • इसमें बंगाल के शासक गोपीचन्द द्वारा अपनी रानियों के साथ किया संवाद चर्चित है ।

गणगौर

  • गणगौर के अवसर पर गाया जाने वाला गीत । राज्य में सर्वाधिक गीत इसी अवसर पर गाये जाते है ।

गढ़

  • ये गीत सामन्तो राज दरबारों और अन्य समृद्ध लोगों द्वारा आयोजित महफिलों में गाए जाते है । ये रजवाडी व पेशेवर गीत है । ढोली दमापी मुसलमान तवायफें इन गीतों को गाते है ।

बना-बन्नी

  • विवाह के अवसर पर वार-वधू के लिए ये गीत गाये जाते है ।

बीणजारा

  • यह एक प्रश्नोत्तर परक गीत है । इस गीत में पत्नी पति को व्यापार हेतु प्रदेश जाने की प्रेरणा देती है ।


विनायक

  • विनायक मांगलिक कार्यो के देवता है किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले विनायक (गणेशजी की पूजा) पूजा कर गीत गाये जाते है ।

बंधावा

  • यह शुभ कार्यं के सम्पत्र होने पर गाया जाने वाला लोकगीत है ।

बादली गीत

  • बादली गीत शेखावाटी, मेवाड़ व हाडौती क्षेत्र में गाया जाने वाला वर्षा ऋतु से संबंधित गीत है ।

बीरा गीत

  • बीरा नामक लोकगीत ढूंढाड़ अंचल में भात सम्पन्न होने के समय गाया जाता है ।

बेमाता गीत

  • नवजात शिशु का भाग्य लिखने वाली बेमाता के लिए यह गीत गाया जाता है ।

भणेत

  • राजस्थान में श्रम करते समय परिश्रम से होने वाली थकान को दूर करने के लिए इस गीत को गाया जाता हैं ।

पडवलियों

  • बालक के जन्म होने के पश्चात बालमनुहार के लिए गाये जाने वाला गीत है । पडवलियों का अर्थ घास से बनाया हुआ छोटा मकान होता है

पणिहारी

  • पनघट से पानी भरने वाली स्त्री को पणिहारी कहते है । इस गीत में राजस्थानी स्त्री का पतिव्रत धर्म पर अटल रहना बताया गया है ।

परणेत

  • इस गीत का सम्बन्थ विवाह से है । राजस्थान में विवाह के गीत सबसे अधिक प्रचलित है । परणेत के गीतों में बिदाई के गीत बहुत ही मर्म स्पर्शी होते है ।

पावणा

  • यह गीत दामाद के ससुराल आगमन पर गाया जाता है ।

पपैया

  • पपैया एक प्रसिद्ध पक्षी है । इसमें एक युवती किसी विवाहित युवक को भ्रष्ट करना चाहती है, किन्तु युवक उसको अन्त में यही कहता है कि मेरी स्त्री ही मुझे स्वीकार होगी । अत: इस आदर्श गीत में पुरूष अन्य स्त्री से मिलने के लिए मना करता है ।

पंछीड़ा

  • यह गीत हाडौती व ढूंढाड़ क्षेत्र में मेलों के अवसर पर अलगोजे, ढोलक व मंजीरे के साथ गाया जाता है ।

पवाड़ा

  • किसी महापुरूष, वीर के विशेष कार्यों को वर्णित करने वाली रचनाएं 'पवाडा' कहलाती है ।

पटैल्या

  • यह पर्वतीय क्षेत्रों में आदिवासियों के द्वारा गाया जाने वाला गीत है ।

बिछिया

  • यह पर्वतीय क्षेत्रों में आदिवासियों के द्वारा गाया जाने वाला गीत है ।

लालर

  • यह पर्वतीय क्षेत्रों में आदिवासियों के द्वारा गाया जाने वाला गीत है ।

पीपली

  • यह रेगिस्तानी क्षेत्र विशेषत: शेखावाटी, बीकानेर, मारवाड़ के कुछ भागों में स्त्रियों द्वारा वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला लोकगीत है । इसमें प्रेयसी अपने परदेश गये पति को बुलाती है । यह तीज के त्यौहार के कुछ दिन पूर्व गाया जाता है ।

पीठी

  • विवाह के अवसर पर दोनों पक्ष के यहाँ वर-वधु को नहलाने से पूर्व पीठी या उबटन लगाते है, जिससे उनमें रूपनिखार आए, उस समय 'पीठी गीत' गाया जाता है । यह कार्य भौजाई (भाभी) द्वारा किया जाता हैं ।

सुपियारदे

  • इस गीत में त्रिकोणीय प्रेम कथा का वर्णन किया गया है ।

पील्लो गीत

  • यह शिशु जन्म के पश्चात जलवा पूजन के समय गाया जाता है ।

सुवंटिया

  • इस गीत में भील स्त्री द्वारा परदेश गये पति को संदेश भेजती है ।

सहसण या सैंसण माता के गीत

  • सैंसण माता का जैन धर्म के तेरापंथी संप्रदाय में भारी महत्व है । जैन श्रावकों की निराहार तपस्या के दौरान सहसण माता के गीत गाये जाते है ।

सुपणा

  • यह विरहणी का एक स्वप्न गीत है । इस गीत के द्वारा रात्रि में आये स्वप्न का वर्णन किया जाता हैं ।

सींठणा/सीठणी

  • विवाह के अवसर पर भोजन के समय गाये जाने वाले गीत सीठणा गाली गीत है ।

सेजा

  • इसमें प्रकृति पूजन, लोकगीत, परम्परा , कला और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है । इसमें कुँवारियां श्रेष्ठ वर की कामना, अखण्ड सौभाग्य एवं सुखी दामपत्य जीवन की शुभेच्छा से पूजा अर्चना करती है ।

सारंग

  • यह संगीत दोपहर के समय में गाया जाता है ।

केसरिया बालम

  • यह राज्य गीत है । इस गीत के माध्यम से प्रदेश गये पति को आने का संदेश भेजा जाता है ।

कांगसियो 

  • यह बालों के श्रृंगार का गीत है ।

काजलियौ

  • भारतीय संस्कृति में काजल सोलह श्रृंगारो में से एक श्रृंगारिक गीत हैं । यह विवाह के समय वर की आँखों में भोजाई काजल डालते समय गाती है ।

कोयलडी

  • परिवार की स्त्रियां वधू को विदा करते समय विदाई गीत कोयलडी गाती है ।

कुकड़लू

  • शादी के अवसर पर जब दूल्हा तोरण पर पहुंचता है तो महिलाएं ये गीत गाती है ।

कामण

  • राजस्थान के कई क्षेत्रों मे वर को जादू-टोने से बचाने हेतु गाये जाने वाले गीत कामण कहलाते है ।

कलाकी

  • कलाकी एक वीर रस प्रधान गीत है ।

कलाली

  • कलाली लोग शराब निकालने और बेचने का काम करते है । ये ठेकेदार होते है । कलाली गीत में सवाल-जवाब है । इस गीत में श्रृंगारिक एवं मन 'की चंचलता दिखाई देती है ।

कुरंजा


  • राजस्थानी लोक जीवन में विरहणी द्वारा अपने प्रियतम को संदेश भिजवाने हेतु कुरंजा पक्षी को माध्यम बनाकर यह गीत गाया जाता है ।

कुकडी

  • यह रात्रि जागरण का अंतिम गीत होता है ।

केवडा

  • केवडा एक वृक्ष है । यह प्रेयसी द्वारा गाया जाने वाला गीत है ।

काछबा

  • यह प्रेम गाथा पर आधारित लोक गीत है, जो पश्चिमी राजस्थान मे गाया जाता है ।

कागा

  • इसमें विरहणी नायिका कौए को सम्बोधित करके अपने प्रियतम के आने का शगुन मानती है और कौए को प्रलोभन देकर उड़ने को कहती है ।

हिन्डो/हिन्डोल्या

  • श्रावण मास मे राजस्थानी महिलाएं झूला झूलते समय यह लालित्यपूर्ण गीत गाती है ।

हमसीढ़ो

  • उत्तरी मेवाड़ में भीलों का प्रसिद्ध लोकगीत है । इसे स्त्री-पुरुष साथ मिलकर गाते है ।

हरजस

  • राजस्थानी महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला सगुण भक्ति का लोकगीत है, जिसमें राम और कृष्णा की लीलाओं का वर्णन है । यह गीत शेखावाटी क्षेत्र में किसी को मृत्यु के अवसर पर गाया जाता है ।

हालरिया

  • यह जैसलमेर मे बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला गीत है ।

हिचकी

  • किसी के द्वारा याद किये जाने पर हिचकी आती है । उस समय गाया जाने वाला गीत हिचकी गीत है ।

हरणी

  • यह गीत दीपावली के त्यौहार पर 10-15 दिन पहले मेवाड क्षेत्र में छोटे-छोटे बच्चों की टोलीयों द्वारा घर-घर जाकर गाया जाता है इसे लोवडी गीत भी कहते है । इस गीत के द्वारा बच्चे दीपावली पर खर्च करने के लिए थोड़ा-थोड़ा पैसा एकत्रित करते है ।

होलर

  • यह गीत पुत्र जन्म से संबंधित है

हीड

  • यह गीत मेवाड क्षेत्र में दीपावली के अवसर पर आदिवासी लोग समूह रूप में घर-घर जाकर एक गाथा के रूप में गाते है हीड़ का तात्पर्य दीपक होता है ।

हूंस

  • इस गीत के माध्यम से राजस्थान गर्भवती महिला को दो जीवों वाली कहते है । हूंस का अर्थ गर्भवती की इच्छा होती है इस तरह के गीतों में घेवर, केरी मत्तीरा फली एवं बेर की इच्छापूर्ति के गीत गाते है ।

हर का हिंडोला

  • यह गीत किसी वृद्ध की मृत्यु के अवसर पर गाया जाता हैं ।

दारूडी

  • यह गीत रजवाडों में शराब पीते समय गाया जाता है

दुपट्टा

  • यह गीत दूल्हे की सालियों द्वारा गाया जाता है ।

धुंसो/धुंसा

  • यह मारवाड़ का राज्य गीत है । इस गीत में अजीत सिंह की धाय माता गोरा धाय का वर्णन है ।

घूमर

  • यह गणगौर के त्यौहार व विशेष पर्वो तथा उत्सवों पर मुख्य रूप से गाया जाता है ।

घुड़ला

  • यह मारवाड़ क्षेत्र में होली के बाद घुड़ला त्यौहार के अवसर पर कन्याओं द्वारा गाया जाने चाला लोकगीत हैं ।

घुघरी

  • बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला गीत ।

घोडी

  • लडके के विवाह के अवसर पर निकासी के समय गाया जाने वाला गीत है ।

रतन राणा

  • यह अमरकोट (पाकिस्तान) के सोढा राणा रतन सिंह का गीत है । यह पश्चिमी क्षेत्र में गाया जाने वाला सगुन भक्ति का गीत है ।

रातिजगा

  • रातभर जाग कर गाये जाने वाले गीत रातिजगा गीत कहलाते है ।

रसिया

  • यह गीत भरतपुर, धौलपुर मे गाया जाता है ।

जलो और जलाल/जला

  • वधू के घर जब स्त्रियाँ वर की बारात का डेरा देखने जाती है, तब यह गीत गाया जाता है ।

जीणमाता का गीत

  • यह गीत राजस्थान के समस्त गीतों में सबसे लम्बा लोक गीत है । इस गीत में भाईं-बहन के प्रेम, पहाडों की तपस्या, मन्नतों का पूरा होना और आक्रमणकारियों से क्षेत्र की रक्षा का वर्णन किया जाता है

जकडियां

  • यह पीर ओलियों की प्रशंसा में गाया जाने वाला धार्मिक गीत है । राजस्थानी मुस्लिम समाज मे इन गीतों का प्रचलन सर्वाधिक है ।

जच्चा

  • यह गीत पुत्र जन्म के अवसर पर गाया जाता है, इसका अन्य नाम होलर है ।

जीरो

  • इस गीत में पत्नी अपने पति को जीरे की खेती न करने का अनुरोध करती है ।

चरचरी

  • ताल और नृत्य के साथ उत्सव में गाई जाने वाली रचना 'चरचरी' कहलाती है ।

चाक गीत

  • विवाह के समय स्त्रियों द्वारा कुम्हार के घर जाकर पूजने (घड़ा) के समय गाया जाता है ।

चिरमी

  • यह गीत चिरमी पौधे को सम्बोधित करके नववधु द्वारा भाई व पिता की प्रतीक्षा में गाया जाता है ।

हींडा

  • यह गीत सहरिया जनजाति में दीपावली के अवसर पर गाया जाता है ।

लहंगी

  • यह गीत जनजाति के द्वारा वर्षा ऋतु में गाया जाता है ।

आल्हा

  • यह गीत सहरिया जनजाति के द्वारा वर्षा वस्तु में गाया जाता है ।

चौबाली

  • राजस्थानी लोकगीतों का संस्मरण चौबाली कहलाता है ।

रामदेवजी के गीत

  • लोकदेवताओं में सबसे लम्बे गीत रामदेवजी के गीत है ।
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Tuesday, 12 March 2019

Rajasthan Map District Wise in Hindi - जिला दर्शन GK

नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट से आप राजस्थान के सभी जिलों के महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकोगे rajasthan map in hindi में जिला वाइज Rpsc और Ras GK तैयार करने के लिए आसान Nots निम्नलिखित है

Rajasthan Map District Wise in Hindi - जिला दर्शन GK

rajasthan map with districts Photo
rajasthan map

अजमेर

ajmer map image
ajmer tourist places

  • उत्तर भारत का सर्वप्रथम पूर्ण साक्षर जिला
  • अजमेर जिले का संस्थापक चौहान राजा अजयराज है
  • अजमेर दुर्ग राजस्थान का जिब्राल्टर गढ़ बिठली कहा जाता है
  • दोराई औरंगजेब द्वारा उत्तराधिकार का युद्ध यहां जीता गया था
  • अजमेर को राजस्थान का हृदय कहा जाता है
  • ढाई दिन का झोपड़ा भी अजमेर जिले में स्थित है
  • अजमेर में मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह स्थित है

अलवर

alwar tourist map
alwar map rajasthan

  • यहां 80 खंभों की मूसी महारानी की छतरी है
  • अलवर पूर्ण रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल जिला है
  • सर्वाधिक औद्योगिक इकाइयां अलवर जिले में है
  • अलवर जिले का संस्थापक राजा राव प्रताप सिंह था

बाड़मेर

barmer map in hindi
barmer map

  • वर्तमान में प्राकृतिक तेल क्षेत्र के कारण चर्चित जिला मंगला शक्ति एवं ऐश्वर्या तेल क्षेत्र कहां स्थित है
  • सर्वाधिक पशुधन वाला जिला बाड़मेर है
  • बाजरा उत्पादक जिला बाड़मेर
  • अजरक प्रिंट छप्पन की पहाड़ियां नाकोड़ा पर्वत बाड़मेर में स्थित है

बांसवाड़ा

banswara district map in Hindi
banswara map


  • 100 द्वीपों का शहर बांसवाड़ा
  • आदिवासियों का शहर बांसवाड़ा
  • कंठल प्रतापगढ़ से बांसवाड़ा जिले में माही नदी के किनारे का क्षेत्र
  • माही जल विद्युत परियोजना बांसवाड़ा जिले में है

बारां

baran map in hindi
baran map


  • सर्वाधिक सहरिया जनजाति बारां जिले में है
  • भिंड देवरा मिनी खजुराहो कहलाता है यह भी बारां जिले में है
  • कपिलधारा तीर्थ स्थल बारां जिले में है

भरतपुर

bharatpur map in hindi
bharatpur district map

  • लोहागढ़ दुर्ग महाराजा सूरजमल द्वारा निर्मित
  • 1804 में लॉर्ड लेक भी महाराजा रणजीत सिंह के समय आक्रमण करने पर नहीं कर सका था तभी से यह गढ़ लोहागढ़ कहलाता है
  • जवाहर बुर्ज महाराजा जवाहर सिंह की दिल्ली विजय का प्रतीक है

भीलवाड़ा

bhilwara map photo
map of bhilwara district

  • टेक्सटाइल सिटी राजस्थान का मैनचेस्टर भीलवाड़ा को कहा जाता है
  • सर्वाधिक अभ्रक भीलवाड़ा जिले में है
  • अभ्रक ईट उद्योग भीलवाड़ा का प्रसिद्ध है
  • सर्वाधिक सूती वस्त्र मिले भीलवाड़ा में है

बीकानेर जिला

bikaner map image
map of bikaner district

  • जूनागढ़ रायसिंह द्वारा निर्मित किला
  • भांडाशाह जैन मंदिर इस मंदिर की नीव में घी का प्रयोग किया गया था
  • बीकानेर के संस्थापक राव बिका थे
  • राजस्थान राज्य अभिलेखागार का मुख्यालय बीकानेर में है

बूंदी जिला

bundi district map
bundi district map in hindi

  • 84 खंभों की छतरी राव अनिरुद्ध द्वारा निर्मित
  • तारागढ़ का किला राज महल गढ़ पैलेस बादल महल अनिरुद्ध महल रतन दौलत आदि बूंदी जिले में स्थित है
  • बावरियों का शहर बूंदी
  • प्रसिद्ध कजली तीज का मेला बूंदी जिले में लगता है

चित्तौड़गढ़

chittorgarh map in hindi
chittorgarh tourism map

  • मेसा पठार पर चित्तौड़गढ़ का प्रसिद्ध दुर्ग स्थित है
  • यह दुर्ग चित्रांगद मौर्य द्वारा निर्मित है
  • यहां जैन कीर्ति स्तंभ जीजा द्वारा निर्मित स्थित है
  • काला सोना अफीम सर्वाधिक चित्तौड़गढ़ जिले में पैदा होती है

चुरु

churu map image
churu map

  • चूड़ा जाट चुरू का निर्माता
  • जिले में कोई भी नदी नहीं बहती है
  • दुधवाखारा प्रसिद्ध किसान आंदोलन चूरू में हुआ था
  • सबसे कम वन क्षेत्र वाला जिला

धौलपुर

dholpur map image
Dholpur map

  • क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे छोटा जिला धौलपुर है
  • धौलपुर का संस्थापक धवल देव है
  • आईटेक प्रिंसिजन ग्लास फैक्ट्री धौलपुर में स्थित है

दौसा

Dausa map
Dausa map gk

  • कच्छवाहा शासकों की प्रथम राजधानी
  • झांझीरामपुरा झांझेश्वर महादेव का मंदिर
  • हींगवा नाथ सम्प्रदाय का प्रसिद्ध स्थल
    गुढा का किला , गीजगढ़ का किला 
  • देवगिरी पहाड़ी 

डूंगरपुर 

Dungarpur map
Dungarpur

  • नौलखा बावडी रानी प्रीमल देवी द्वारा निर्मित 
  • संस्थापक 1458 ई . में डूंगरसिंह द्वारा डूंगरपुर कस्बे की स्थापना 
  • चतुर्भुज जी का मंदिर ( आसकरण द्वारा निर्मित), उदयविलास महल व उदयबाव बावडी (उदयसिंह द्वारा निर्मित)
  • एडवर्ड समुद्र ( विजयसिंह द्वारा निर्मित) 
  • विजयराज राजेश्वर मंदिर ( गैबसागर की पाल पर )
  • एक थम्बिया महल ( शिवज्ञानेश्वर शिवालय है जिसे इस नाम से जाना जाता है )

गंगानगर 

ganganagar district map
sri ganganagar map

  • राज्य के छठा शुष्क बंदरगाह
  • किन्नू, अंगूर का सर्बाधिक उत्पादक
  • राज्य में सूर्य की किरणों का सर्वाधिक तिरछापन इसी जिले में होता है ।
  • श्री गंगानगर सहकारी कॉटन कॉम्पलेक्स
  • गजल गायक जगजीत सिंह का जन्म स्थल
  • बीकानेर के शासक महाराजा गंगासिंह द्वारा गंगानगर बसाया गया । 
  • पूर्व नाम रामनगर
  • इंदिरा गाँधी नहर परियोजना की सूरतगढ़ व अनूपगढ़ शाखा गंगानगर जिले में निकाली गयी हैं । 
  • सर्वाधिक गेहूँ उत्पादक जिला , सर्वाधिक गन्ना उत्पादन अन्न का कटोरा बागानों को भूमि
  • गंगनहर 1927 ईं . में महाराजा गंगासिंह द्वारा निर्माण करवाया गया ।
  • कंवरसेन लिपट नहर द्वारा गंगानगर जिले मे पेय जलापूर्ति की जा रही है ।

हनुमानगढ

hanumangarh map photo
hanumangarh map


  • नदी (घग्घर)
  • 12 जुलाई 1994 को श्रीगंगानगर से अलग करके 31वॉ जिला बनाया गया।
  • भद्रकाली मंदिर बीकानेर के महाराजा रामसिंह द्वारा निर्मित
  • सर्वाधिक कपास उत्पादक जिला
  • भटनेर का किला यादव वंशज भट्टी के पूत्र भूपत ने 285 ई में भटनेर किले का निर्माण करवाया ।
  • इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना रावतसर शाखा इसकी 9 मुख्य शाखाओं में पहली शाखा जो बांयी तरफ से निकाली गयी है शेष दांयी तरफ से है ।
  • चौधरी कुंभाराम लिफ्ट नहर

जयपुर

Jaipur map photo
Jaipur map

  • संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह 2
  • विद्याधर भट्टाचार्य जयपुर शहर की योजना बनाने वाले वास्तुकार
  • राज्य में सर्वप्रथम मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट जयपुर से प्रारम्भ 
  • विश्व में प्रथम हहोम्योपैथिक विश्वविद्यालय जयपुर 
  • घाट की गुणी सुरंग परियोजना
  • गलीचा निर्माण
  • राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि. का मुख्यालय    
  • सीतापुर देश का प्रथम निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क जयपुर मे है
  • कूकस इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर टेक्नोलॉजी पार्क
  • पानी के कैप्सन मीटर का कारखाना  सिटी पैलेस चंद्रमहल, सुखनिवास महल आदि जयपुर मे है

जैसलमेर

jaisalmer district map
jaisalmer map

  • जैसलमेर नगर के संस्थापक राव जैसलदेव भाटी पाकिस्तान के साथ सबसे लम्बी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा वाला जिला (464 km)
  • सोनार किला त्रिकूटगढ विश्व धरोहर मे शामिल
  • न्यूनतम जनघनत्व वाला जिला 
  • सर्वाधिक दशकीय जनसंख्या वृद्धि 
  • सर्वाधिक विपरीत लिंगानुपात वाला जिला 
  • बाघेवाला प्राकृतिक तेल की खोज हेतु चर्चित स्थल ( पी .डी .बी . एस .ए. कंपनी (वेनेजुएला) के सहयोग से पहले भारी आयल के कुए की खुदाई प्रारम्भ की )
  • जैसलमेर मे पलाया झील स्थित हैं ।

जालौर

Jalor map pooto
Jalor map

  • अलाउद्दीन खिलजी की मस्जिद राजस्थान की सर्वप्राचीन मस्जिद जालौर मे है
  • तोपखाना परमार राजा भोज द्वारा बनवाईं गई सरस्वती कण्ठाभरण पाठशाला
  • मोदरां महोदरी( आशापूरी )माता मंदिर जालौर के सोनगरा चौहान शासकों की कुलदेवी है
जालौर दुर्ग हसन निजामी ने कहा "यह शक्तिशाली और अजय दुर्ग है जिसके द्वार कभी भी किसी विजेता के द्वारा नहीं खोले गए चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो"

झालावाड

jhalawar map in hindi
jhalawar map

  • झालावाड़ रियासत का गठन अँग्रेजों द्वारा महारावल झाला मदनसिह ( 1838 में) के लिए किया गया था
  • किसान सहकारी क्रेडिट का राज्य स्तरीय शुभारम्भ इसी जिले से किया गया था
  • झालावाड राज्य प्रजामण्डल कन्हैयालाल द्वारा 
  • अबली मीणी का महल कोटा के राव मुकुन्दसिंह द्वारा निर्मित्त ( दर्रा अभयारण्य में स्थित) है

झुंझुनूं

Jhunjhunu map
Jhunjhunu map gk

  • कमरुद्दीन शाह की दरगाह झुंझुनूं मे है
  • मनसा माता का मंदिर झुंझुनूं मे है
  • झूंझा जाट के नाम पर स्थापित हुआ झुंझुनूं जिला
  • बादलगढ़, चंचलनाथ का टीला, नवाब रूहेलखाँ का मकबरा झुंझुनूं मे है
  • नेतका टीला झुंझुनूं मे है
  • खेतडी महल महाराजा भोपालसिंह द्वारा निर्मित, लखनऊ जैसी भूलभुलैया व जयपुर के हवामहल की झलक के कारण शेखावाटी का हवामहल कहा जाता है

जोधपुर 

Jodhpur map photo
Jodhpur map photo

  • काजरी - केन्द्रीय मरूक्षेत्र अनुसंधान संस्थान जोधपुर मे है
  • मेहरानगढ़ दूर्ग (मोरध्वज, गढ़ चिंतामणी) जोधपुर मे है
  • स्थापना - राठौड़ शासक राव जोधा द्वारा 1459 ईं .
  • बालसमन्द झील - प्रतिहार शासक बालक राव द्वारा निर्मित जोधपुर मे है 
  • कोलूमण्ड पाबूजी का जन्म स्थल जोधपुर मे है
  • अजीत भवन राज्य का पहला हेरिटेज हॉटल जोधपुर मे है 
  • बादला ( जिंक धातु का बना बर्तन ) जोधपुर का प्रसिद्ध है

करौली

Karauli map
Karauli map gk

  • 19 जुलाई 1997 को सवाई माधोपुर से अलग होकर 32वां जिला बना 
  • अंजनी माता का मंदिर (हनुमानजी को स्तनपान कराते हुए मूर्ति) करौली मे है 
  • हरसुख विलास (महाराजा हरबक्षपाल द्वारा निर्मित, सफेद चंदन के वृक्षों का उद्यान) करौली मे है
  • मण्डरायल का किला - बृज बहादुर द्वारा निर्माण इसे ग्वालियर दुर्ग की कुंजी भी कहते हैँ।

कोटा

Kota map photo
Kota map

  • वर्द्धमान महावीर - विश्व विद्यालय राज्य का एकमात्र खुला विश्वविद्यालय जो की कोटा मे है
  • राजस्थान तकनीको विश्वविद्यालय कोटा मे है  
  • सर्वाधिक साक्षरता वाला जिला कोटा है
  • दशहरे मेले के लिए प्रसिद्ध कोटा
  • सेम्कोर ग्लास लिमिटेड कोटा जिले मे है  
  • हाडौती यातायात प्रशिक्षण पार्क कोटा मे है  
  • सावन भादो परियोजना कोटा मे है
  • उम्मेद भवन महल, जग मंदिर, अमर निवास छत्र महल आदि कोटा मे है

नागौर

Nagaur map photo
Nagaur map 

  • मातासुख-कस्वाऊ लिग्नाइट की खानें
  • हसोलाव नवल सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत नवलदास जी का जन्म स्थल
  •   जांगलदेश की राजधानी 
  • जिप्सम के भण्डार 
  • अमरसिंह राठीड़ की छतरी 
  • शुक्र तालाब अकबर द्वारा निर्मित  
  • लाखोलाव तालाब पानमैंथी उत्पादन, भुजिया उद्योग, हस्त निर्मित औजार 

पाली

Pali map gk
Pali map

  • गीतमेश्वर सूकडी नदी के किनारे, मीणा जनजाति के इष्टदेव, भूरिया बाबा , मीणा समुदाय पूर्वजों की अस्थियां सूकडी नदी में विसर्जित करते हैं ।
  • फोरेंसिक साइंस लैब (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) 
  • फालना जैन स्वर्ण मंदिर
  • सिरियारी जैन श्वेतांबर तरापंथियों का प्रमुख तीर्थ 
  • भद्रावन थोरियम खनिज क्षेत्र
  • नानाकराब टंगस्टन खनिज क्षेत्र
  • खिरची मारवाड़ बायोमास संयंत्र 

राजसमंद

Rajsamand map
Rajsamand map gk

  • राजसमंद झील मेवाड़ के इतिहास का विश्व का सबसे बड़ा शिलालेख
  • दिवेर [महाराणा प्रताप (छापामार पद्धति , विजय प्राप्त हुईं ) व मुगलो के मध्य] युद्ध स्थल जिसे कर्नल टोड ने मेवाड का मेराथन कहा था

सवाई माधोपुर

Sawai Madhopur map photo
Sawai Madhopur map

  • संस्थापक जयपर नरेश माधोसिंह प्रथम 
  • सर्वाधिक बीहड़ भूमि का प्रसार 
  • अमरूद मंडी
  • बेन्टोनाइट खनिज क्षेत्र
  • सपाड़ सवाई माधोपुर व करौली का मध्यप्रदेश को स्पर्श करता हुआ क्षेत्र कहलाता है ।

सीकर

Sikar map photo
Sikar map 

  • संस्थापक राव शिव सिंह 
  • काशी का बास बजाज उद्योग समूह के संस्थपक जमनालाल बजाज का जन्म स्थान
  • डूंगजी व जवाहर जी अंग्रेजों से लोहा लेने वाले व्यक्ति सीकर के थे

सिरोही

Sirohi map photo
Sirohi map

  • ओर गांव विट्ठल भगवान का मंदिर
  • उड़िया पठार - राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार
  • अरावली पर्वतमाला दक्षिण-पश्चिम में इसी जिले से प्रारम्भ होकर उत्तर-पूर्व की और जाती है
  • भाकर सिरोही क्षेत्र की पहाडियों का स्थानीय नाम वसन्ती दुर्ग कुम्भा द्वारा निर्मित्त  
  • रामपुर बायोमास संयंत्र

टोंक

Tonk map photo
Tonk map

  • मौलाना अंब्दुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान ( कसरे इल्म ) 
  • सुनहरी कोठी (नवाब वजीउहौला खाँ द्वारा निर्मित)
  • चार बैत लोक गायन शैली 
  • लावा ठिकाना यह ठिकाना टोंक का ही भाग था ।
  • ऊँटों की कुर्बानी (बली)को लेकर चर्चित जिला

उदयपुर

Udaipur map photo
Udaipur map

  • माणिक्यलाल आदिम जाति शोध संस्थान 
  • राज्य का प्रथम योग कॉलेज 
  • राजस्थान साहित्य अकादमी ( 1958) 
  • गिहलोट उदयपुर का पूर्ववर्ती नाम 
  • भक्ति शर्मा इंग्लिश चैनल पार करने वाली राजस्थान की प्रथम तैराक 
  • गुलाब बाग, 
  • पन्ना उत्पादक जिला 
  • भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) 
  • यूरेनियम के भंडार स्थित हैं। 
  • मछला मगरा उदयपुर के चारों तरफ फैली मछली के आकार की पहाडियों

प्रतापगढ़  (कांठल)

  • स्थापना 26 जनवरी 2008 
  • राजस्थान का सबसे युवा जिला  (33 वां जिला) प्रतापगढ़, छोटी सादडी,अरनोद  (चित्तौडगढ), धरियावाद ( उदयपुर ), पीपल खूंट  (बांसवाड़ा) को मिलाकर ये जिला अस्तित्व मे आया 
  • थेवाकला कांच पर सोने का सूक्ष्म चित्रांकन विश्व मे एकमात्र राजसोनी परिवार के पुरूषों द्वारा


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Friday, 8 March 2019

चित्तौड़गढ़ दुर्ग का इतिहास - Chittorgarh Fort History in Hindi

चित्तौड़गढ़ दुर्ग का परिचय

चित्तौड़गढ़ दुर्ग इस दुर्ग का निर्माण 7वीं शताब्दी में चित्रांगद मौर्य के द्वारा करवाया गया । चित्तौड़गढ़ दुर्ग राज्य का सबसे प्राचीनतम दुर्ग है । इस दुर्ग को चित्रकूट नामक पहाडी पर बनाया गया है । यह राज्य का दक्षिणी-पूर्वी द्वार है । इस के बारे में कहा जाता है कि "गढ तो चित्तौड़गढ़ बाकी सब गढैया ।"

चित्तौड़गढ़ दुर्ग का इतिहास - Chittorgarh Fort History in Hindi

चित्तौड़गढ़ का किला in Hindi
चित्तौड़गढ़ दुर्ग का इतिहास

  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग में तीन साकै1303, 1534, 1567-68 में हुए हैं ।
  • जयमल की हवेली चित्तौड़गढ़ दुर्ग में है इस हवेली का निर्माण महाराजा उदयसिंह के काल में हुआ ।
  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग के प्रथम दरवाजे का नाम पाण्डुपोल, दूसरा द्वार भैरवपोल, तीसरा द्वार गणेशपोल चौथा द्वार लक्ष्मणपोल, पाँचवा द्वार जोड़न पोल, छठा द्वार त्रिपोलिया तथा सातवां द्वार रामपोल है ।
  • भैरव पोल के पास ही वीर कल्ला राठौड़ की छतरी स्थित है
  • इस दुर्ग में विष्णु के वराह अवतार का कुम्भश्याम मंदिर है इसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने किया है ।
  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग मे विजय स्तम्भ, कुम्भ स्वामी मंदिर, कुम्भा के महल, श्रृंगार चंवरी का मंदिर, चार दिवारी सात द्वार का निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया ।
विजय स्तंभ फोटो
विजय स्तम्भ का ऐतिहासिक महत्व

  • इस दुर्ग में नौ खण्डों वाला विजय स्तम्भ है । इसकी ऊंचाई 12० फीट है।
  • विजय स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी पर विजय के उपलक्ष्य मे करवाया ।
  • इस स्तम्भ का वास्तुकार जैता था।
  • विजय स्तम्भ को हिन्दू देवी-देवताओं का अजायबघर कहा जाता है ।
  • इस दुर्ग को प्राचीन किलों का सिरमौर कहा जाता है ।
  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग गंभीरी और बेड़च नदियों के संगम पर स्थित है ।
  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग में सात मंजिला जैन कीर्ति स्तम्भ है
  • माना जाता है कि इसका निर्माण बघेरवाल जैन जीजा द्वारा करवाया गया है ।
  • चित्तौड़ दुर्ग को समुद्र तल से ऊँचाई लगभग 1850 फीट है ।
  • चित्तौढ़ दुर्ग की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले जयमल और फत्ता की वीरता से प्रसन्न होकर अकबर ने आगरा के किले के प्रवेश द्वार पर इनकी हाथी पर सवार संगमरमर की प्रतिमाए स्थापित करवाई ।
  • इस दुर्ग का सबसे बडा आकर्षण राणा रत्नसिह की रानी पद्मिनी का महल है  ।
  • इस दुर्ग में प्रमुख जल स्त्रोत भीमलत कुंड, रामकुंड व चित्रांगद मोरी तालाब है ।

चित्तौड़गढ़ दुर्ग के बारे में अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • यह दुर्ग सबसे बडा लिविंग फोर्ट है ।
  • इस दुर्ग के प्रमुख मंदिर कुम्भ श्यामा, मीरां, श्रृंगार चंवरी, नीलकंठ व कालिका माता का है ।
  • गुहिलों ने नागदा के विनाश के बाद इसे अपनी राजधानी भी बनाया था
  • इस दुर्ग में कृषि की जाती है ।
  • यह राज्य का सबसे बडा दुर्ग है ।
  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग के उत्तरी दिशा में स्थित खिडकी को लाखोटा की बारी के नाम से जाना जाता है ।
  • इस दुर्ग में लघु दुर्ग के रूप में नौ कोटा मकान या नवलखा भंडार बना है, जिसका निर्माण राणा बनवीर ने करवाया था ।
  • चित्तौड़ दुर्ग में एक जल यंत्र (अरहट) स्थित है ।
  • माना जाता है कि भीम ने महाभारत काल में अपने घुटने के बल से यहाँ पानी निकाला था

Saturday, 2 March 2019

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले - Rajasthan ke Durg in Hindi
राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले - राजस्थान की स्थापत्य कला का जनक राणा कुम्भा को माना जाता है । मुगल काल में राजस्थान की स्थापत्य कला पर मुगल शैली का प्रभाव पडा । हिन्दू कारीगरों ने मुस्लिम आर्दशों के अनुरूप जो भवन बनाए, उन्हें सुप्रसिद्ध कला विशेषज्ञ फर्ग्युसन ने इंडो-सारसेनिक शैली की संज्ञा दी है ।

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले - Rajasthan ke Durg in Hindi

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग
राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले 

  • जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह (प्रथम) को हिन्दुषत् कहा जाता था क्योंकि उनकी रूचि स्थापत्य कला में थी ।
  • महाराणा कुम्भा स्वयं शिल्पशास्त्री मंडन द्वारा वास्तुकला पर रचित साहित्य से प्रभावित था ।

15वीं शताब्दी में मेवाड़ के शिल्पी मंडन ने पाँच ग्रन्थ लिखें , जो निम्नलिखित थे

  1. प्रसाद मंडन - इसमें देवालय निर्माण के निर्देश दिये गये है ।
  2. रूपावतार मंडन - इसमें मूर्तियों के निर्माण सम्बन्धी निर्देश दिये गये है ।
  3. रूप मंडन - इसमें भी मूर्ति निर्माण सम्बन्धी सामग्री दी हुई है ।
  4. गृह मंडन - इसमें सामान्य व्यक्तियों के गृह, कुआँ, बावडी, तालाब महल आदि के निर्माण सम्बन्धी सामग्री दी हुई है ।
  5. वास्तुकार मंडन - इसमें विविध तत्वों से सम्बन्धित वर्णन है ।
  • मंडन के निर्देशन में ही चित्तौड़ के कीर्ति स्तम्भ का निर्माण किया गया ।

शुक्र नीति में राजस्थान के दुर्गों का 9 तरह से वर्गीकरण किया गया जो निम्नलिखित प्रकार से है

  1. एरन दुर्ग - यह दुर्ग खाई, काँटों तथा कठोर पत्थरों से निर्मित होता हैं । उदाहरण - रणथम्भीर दुर्ग, चित्तौड़ दुर्ग ।
  2. धान्वन (मरूस्थल) दुर्ग - ये दुर्ग चारों ओर रेत के ऊँचे टीलों से घिरे होते है । उदाहरण - जैसलमेर, बीकानेर व नागौर के दुर्ग ।
  3. औदक दुर्ग (जल दुर्ग) - ये दुर्ग चारों ओर पानी से घिरे होते है । उदाहरण - गागरोण (झालावाड), भैंसरोड़गढ़ दुर्ग (चित्तोंड़गढ़) ।
  4. गिरि दुर्ग - ये पर्वत एकांत में किसी पहाडी पर स्थित होता है तथा इसमे जल संचय का अच्छा प्रबंध होता है । उदाहरण - कुम्भलगढ़, मांडलगढ़ (भीलवाडा), तारागढ़ (अजमेर), जयगढ़, नाहरगढ़ (जयपुर) , अचलगढ (सिरोही), मेहरानगढ (जोधपुर) ।
  5. सैन्य दूर्ग - जो व्यूह रचना में चतुर वीरों से व्याप्त होने से अभेद्य हो ये दुर्ग सर्वश्रेष्ठ समझे जाते है ।
  6. सहाय दुर्ग - जिसमें वीर और सदा साथ देने वाले बंधुजन रहते हो ।
  7. वन दुर्ग - जो चारों और वनों से ढका हुआ हो और कांटेदार वृक्ष हो । जैसे सिवाना दुर्ग, त्रिभुवनगढ़ दुर्ग रणथम्भौर दुर्ग ।
  8. पारिख दुर्ग -वे दुर्ग जिनके चारों और बहुत बडी खाई हो । जैसे लोहागढ़ दुर्ग, भरतपुर ।
  9. पारिध दुर्ग - जिसके चारों ओर ईट, पत्थर तथा मिट्टी से बनी बडी-बडी दीवारों का सुदृढ परकोटा हो जैसे - चित्तोड़गढ़, कुम्भलगढ़ दुर्ग ।
  • महाराणा कुंम्भा ने लगभग 32 दुर्गो का निर्माण करवाया ।
  • बीकानेर का जूनागढ़, कोटा का इन्द्रगढ़ जयपुर का आमेर दुर्ग इंडो सार्सेनिक शैली में बने हुए है । किलों की दीवारों पर हमला करने के लिए रेत आदि से बना ऊँचा चबूतरा पाशीब कहलाता हैं ।
  • किलों में चमड़े से ढका मोटा रास्ता साबात कहलाता है । राजस्थान में गागरोण और भैंसरोड़गढ़ को जल दुर्गों की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है ।

राजस्थान के दुर्गो पर हुए आक्रमण

दुर्ग   

आक्रमणकारी

भटनेर दुर्ग (1091 ईं)

महमूद गजनबी, (1398 ईं (हनुमानगढ) तैमूर, अकबर

रणथम्भीर दुर्ग (1301 ईं॰) में

अलाउद्दीन खिलजी।

 (सवाईमाधोपुर)

गागरोण दुर्ग (1303 ईं.)  

अलप खाँ महम्मुद खिलजी।

 ( झालावाड )

सिवाणा दुर्ग (बाडमेर) (1308 ईं.)

अलाउद्दीन खिलजी

शेरगढ़ दुर्ग( धौलपुर) (1500 ईं.

बहलोल लोदी

चित्तोड़गढ का किला  

अकबर, अलाउद्दीन खिलजी,

 बहादुरशाह

जैसलमेर का दुर्ग      

मोहम्मद बिन तुगलक फिरोजशाह  तुगलक,अलाउद्दीन खिलजी

सुवर्ण गिरि दुर्ग (जालौर) (1311-12 ईं.)

अलाउद्दीन खिलजी

 

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग

Rajasthan ke Durg in Hindi
Rajasthan ke Durg in Hindi

राजस्थान के दुर्गों की पूरी जानकारी जो निम्नलिखित प्रकार से है


भटनेर दुर्ग

  • इसका निर्माण तीसरी शताब्दी में हुआ
  • यह दुर्ग हनुमानगढ़ जिले में स्थित है
  • इस दुर्ग को रेगिस्तान श्रेणी में रखा जाता है
  • तैमूर ने इस दुर्ग के बारे में कहा था कि मैंने इतना सुरक्षित और मजबूत दुर्ग नहीं देखा
  • इस दुर्ग में मुस्लिम महिलाओं का जोहर संपन्न हुआ
  • बीकानेर महाराज दलपत सिंह की मूर्ति उनकी रानियों सहित इसी दुर्ग में स्थित है

भरतपुर दुर्ग

  • भारतपुर दुर्ग का निर्माण सूरजमल जाट ने करवाया था
  • इस दुर्ग को पारीख श्रेणी में रखा जाता है
  • भरतपुर को अजय दुर्ग लोहागढ़ आदि नामों से जाना जाता है

चूरू का दुर्ग

  • इसका निर्माण ठाकुर कुशाल सिंह ने किया था
  • बीकानेर महाराजा सूरत सिंह के आक्रमण के समय ठाकुर शिव सिंह ने चांदी के गोले बरसाए थे

भैंसरोडगढ़

  • इस दुर्ग का निर्माण भैंसाशाह और रोड़ा चारण ने करवाया था
  • यह दुर्ग जल दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • भैंसरोडगढ़ चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है
  • यह दुर्ग चंबल में बामणी नदी के संगम पर स्थित है इसे राजस्थान का वेल्लोर भी कहा जाता है
  • कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार इस दुर्ग को व्यापारियों की सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाता था

मैगजीन किला

  • इस किले का निर्माण अकबर ने करवाया था
  • यह किला अजमेर में स्थित है
  • इस दुर्ग को अकबर का दौलतखाना भी कहा जाता है
  • दुर्ग का निर्माण 1571-72 में हुआ था
  • राजस्थान का एकमात्र इस्लामिक पद्धति से बना हुआ दुर्ग मैगजीन किला ही है
  • जहांगीर और टॉमस रो के मध्य मुलाकात 10 जनवरी 1616 में इसी दुर्ग में हुई थी

शेरगढ़ 

  • यह दुर्ग बारा जिले में स्थित है
  • यह दुर्ग परवन नदी के किनारे पर स्थित है
  • इसका निर्माण नागवंशी नरेश ने करवाया था
  • यह गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • इस दुर्ग को कोसवर्धन दुर्ग भी कहा जाता है
  • इस दुर्ग का नाम शेरशाह सूरी के नाम पर शेरगढ़ कर दिया गया

चोमूहागढ़

  • यह दुर्ग जयपुर में है और इस दुर्ग का निर्माण करण सिंह ने करवाया था
  • इस दुर्ग को धाराधारगढ़ और रघुनाथगढ़ भी कहा जाता है

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ का निर्माण चित्रांगद मौर्य ने करवाया था
  • यह दुर्ग गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • यह दुर्ग गंभीरी और बेडच नदियों के संगम पर स्थित है
  • इस दुर्ग को चित्रकूट खिजराबाद और चित्रकूट नाम से भी जाना जाता है
  • इसे किलो का सिरमोर भी कहा जाता है

रणथंभौर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण रणथंब देव ने करवाया था
  • यह सवाई माधोपुर में स्थित है
  • अबुल फजल ने कहा बाकी दुर्ग नंगे हैं एकमात्र यही बख्तरबंद दुर्ग है
  • इस दुर्ग में राजस्थान का प्रथम साका 1301 ई में अलाउद्दीन खिलजी का हमीर देव चौहान पर आक्रमण के समय हुआ तब महारानी रंगा देवी ने जौहर किया था

बीकानेर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण राय सिंह बीकानेरी ने करवाया था
  • दुर्ग का निर्माण 1589 से 94 के मध्य हुआ
  • बीकानेर दुर्ग का निर्माण मंत्री करमचंद की देखरेख में करवाया गया था
  • इस दुर्ग के अन्य नाम जूनागढ़ और जमीन का जेवर है
  • यह दुर्ग मरुस्थल में स्थित है

कीर्ति स्तंभ

  • कीर्ति स्तंभ चित्तौड़गढ़ में स्थित है
  • इसकी कुल 9 मंजिलें हैं
  • इसका निर्माण महाराणा कुंभा ने करवाया था
  • कीर्ति स्तंभ की ऊंचाई 122 फीट है
  • इसमें कुल 157 सीढ़ियां है
  • इसका निर्माण कुंभा द्वारा मांडू नरेश महमूद खिलजी को सारंगपुर युद्ध 1437 की विजय स्मृति में करवाया गया
  • इसे विजय स्तंभ विष्णु स्तंभ आदि नामों से जाना जाता है
  • इसे मूर्तियों का अजायबघर शब्दकोश विश्वकोश भी कहा जाता है
  • कर्नल जेम्स टॉड ने इसे कुतुब मीनार से भी उत्तम कहा है
  • इस इमारत के वास्तुकार जैता नापा और पूंजा थे
  • कीर्ति स्तंभ राजस्थान पुलिस और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान का प्रतीक चिन्ह है
  • इसकी तीसरी मंजिल पर 9 बार अरबी में अल्लाह अंकित है
  • नौवीं मंजिल पर कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति स्थित है

नागौर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण सोमदेव चौहान के सामंत केमास ने किया था
  • इस दुर्ग का प्राचीन नाम अहिछतरपुर था
  • यह दुर्ग नगाना और नाग दुर्ग के नाम पर भी प्रसिद्ध है
  • दुर्ग के बाहर से चलाई तोप के गोले महलों को क्षति पहुंचाए बिना ऊपर से निकल जाते थे

गागरोन दुर्ग

  • यह दुर्ग जल दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • यह कालीसिंध को आहु नदी के संगम पर स्थित है
  • इसका निर्माण परमार नरेश बिजल देव ने करवाया था
  • इस दुर्ग में पीपाजी की छतरी स्थित है और यहां मीठे शाह की दरगाह स्थित है

शेरगढ़

  • यह दुर्ग धौलपुर में स्थित है
  • इसका निर्माण राव मालदेव ने करवाया था
  • इस दुर्ग में हुनहुँकार तोप स्थित है
  • इस दुर्ग में मीर सैयद की दरगाह स्थित है

कुंभलगढ़ दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुंभा ने किया था
  • दुर्ग का वास्तुकार मंडल था यह दुर्ग राजसमंद में स्थित है
  • इस दुर्ग को गिरी दुर्ग की श्रेणी में रखा जाता है
  • यह दुर्ग मत्स्येंद्र कुंभलगढ़ माहोर आदि नामों से जाना जाता है
  • इस दूर के बारे में अबुल फजल ने कहा था कि नीचे से ऊपर देखने पर सिर की पगड़ी नीचे गिर जाती है
  • कुंभलगढ़ दुर्ग की परिधि 36 किलोमीटर लंबी है जिसे भारत की महान दीवार के नाम से जाना जाता है
  • इस दुर्ग में स्थित कटारगढ़ को मेवाड़ की तीसरी आंख कहा जाता है

अजमेर 

  • इस दुर्ग का निर्माण अजयराज चौहान ने किया था
  • यह दुर्ग गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • हरविलास शारदा ने अजमेर दुर्ग को भारत का प्राचीनतम गिरी दुर्ग माना है
  • इस दुर्ग को गढ़ बिठली और तारागढ़ नाम से भी जाना जाता है
  • विसप हेबर ने इसको पूर्व का जिब्राल्टर कहां है
  • इस दुर्ग में मीर साहब की दरगाह स्थित है और मीर साहब के घोड़े की मजार की स्थित है

सिवाना दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण वीर नारायण पवार ने करवाया था
  • यह गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • सिवाना दुर्ग बाड़मेर जिले में स्थित है
  • अलाउद्दीन खिलजी ने 1308 में इस दुर्ग को जीतकर इसका नाम खेराबाद रख दिया था
  • इसे मारवाड़ की संकट कालीन राजधानी भी कहा जाता है

जोधपुर दुर्ग

  • जोधपुर दुर्ग का निर्माण राव जोधा ने किया था
  • दुर्ग का निर्माण 1459 में किया गया
  • दुर्ग की आकृति मयूर जैसी है
  • यह दुर्ग चिड़ियाटूक पहाड़ी पर स्थित है
  • इस दुर्ग को मयूरध्वज, गढ़ चिंतामणि, जोधाणा, मेहरानगढ़ नामों से जाना जाता है

जालौर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण नागभट्ट प्रतिहार ने करवाया था
  • इसे सोनगढ़ सोनलगढ़ जलालाबाद नामों से जाना जाता है
  • यहां पर परमार कालीन कीर्ति स्तंभ स्थित है

जैसलमेर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण राय जैसल ने किया था
  • दुर्ग का निर्माण 1155 में करवाया गया
  • किस दुर्ग को त्रिकूटाकृतिगढ़, सोनारगढ़, सोनगढ़ नामों से जाना जाता है
  • इस दुर्ग को उत्तरी सीमा का पहरी भी कहा जाता है
  • यह दुर्ग ढाई साके के लिए प्रसिद्ध है

कुचामन किला

  • इसका निर्माण जालिम सिंह ने किया था
  • यह किला नागौर जिले में स्थित है
  • इसे जागीरी किलो का सिरमौर कहा जाता है

जयगढ़ 

  • इस दुर्ग का निर्माण मानसिंह प्रथम कछवाहा के सवाई जयसिंह द्वितीय तक करवाया गया
  • यह भी गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • मिर्जा राजा जयसिंह के नाम पर इस दुर्ग का नामकरण जयगढ़ हुआ
  • इस दुर्ग को रहस्यम दुर्ग भी कहा जाता है
  • इस दुर्ग में प्रवेश की अनुमति महाराजा के अलावा मात्र दो दुर्ग रक्षकों को थी
  • कछवाहा राजवंश का खजाना इसी दुर्ग में रखा गया था
  • एशिया की सबसे बड़ी जयबाण तोप इसी दुर्ग में है

दोसा का किला

  • इसे गिरी दुर्ग की श्रेणी में रखा जाता है
  • इसका निर्माण बडगूजर प्रतिहार राजाओं द्वारा करवाया गया
  • यह दुर्ग देवगिरी पहाड़ी पर स्थित है

नाहरगढ़ दुर्ग

  • इसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था
  • इसका निर्माण 1734 में करवाया गया
  • यहां पर सवाई माधव सिंह द्वितीय ने अपने पासबना के लिए एक समान 9 महलों का निर्माण करवाया
  • इस दुर्ग के निर्माण का उद्देश्य मराठा आक्रमण से बचना था

आमेर 

  • इस दुर्ग का निर्माण भारमल और मानसिंह ने करवाया था
  • यह दुर्ग गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • दुर्ग में सौभाग्य मंदिर कदमी महल प्रसिद्ध स्मारक स्थित है

बूंदी का किला

  • बूंदी के किले का निर्माण 1354 ईसवी में हुआ था
  • इसका निर्माण रावबर सिंह हाडा ने करवाया था
  • कर्नल जेम्स टॉड ने इसे राजस्थान के समस्त रजवाड़ों में श्रेष्ठ राज प्रसाद बूंदी राज महल को कहा था
  • बूंदी का किला भीति चित्रों के स्वर्ग के रूप में प्रसिद्ध है
राजस्थान के दुर्ग देखने हर साल विदेशों से लाखों लोग आते हैं यह पर्यटक राजस्थान के स्थानीय लोगों के लिए रोजगार उत्पन्न करते हैं और भारत के विदेशी मुद्रा कोष में वृद्धि करते हैं राजस्थान के दुर्गों को देखने आने वाले विदेशी लोग राजस्थान की संस्कृति से भी परिचित होते हैं जिससे हमारा सांस्कृतिक विस्तार विदेशों में भी होता है