Friday, 11 January 2019

Revolution in Rajasthan राजस्थान में 1857 की क्रांति

नमस्कार दोस्तों Raj GK में आपका स्वागत है आज हम 1857 Revolution in Rajasthan ( राजस्थान में 1857 की क्रांति में हुए प्रमुख विद्रोह ) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी आपके लिए लेकर आए हैं यह पोस्ट Rajasthan GK से संबंधित है 1857 की क्रांति का उल्लेख इस में किया गया है
1857 Revolution in Rajasthan
 राजस्थान में 1857 की क्रांति में हुए प्रमुख विद्रोह 

1857 Revolution in Rajasthan ( राजस्थान में 1857 की क्रांति में हुए प्रमुख विद्रोह )

1857 की क्रांति ( Revolution ) के समय राजस्थान में कुल 6 सैनिक छावनियाँ (कम्पनी)  थी ।
  1. नीमच (मध्य प्रदेश)
  2. नसीराबाद (अजमेर)
  3. देवली (टोंक)
  4. ब्यावर (अजमेर)
  5. एरिनपुरा (पाली)
  6. खेरवाड़ा (उदयपुर)
NOTE – खैरवाड़ा व ब्यावर सैनिक छावनीयों ने इस सैनिक विद्रोह में भाग नहीं लिया था ।

Rajasthan Political agent in revolution

  1. कोटा - मेजर बर्टन
  2. जोधपुर - मेक मैसन
  3. भरतपुर - मोरिशन
  4. जयपुर - ईडन
  5. उदयपुर - शावर्स
  6. सिरोही - जे.डी.

Rajasthan Rajput ruler in revolution

  • कोटा रियासत -राम सिंह
  • जोधपुर रियासत -तख्तसिंह
  • भरतपुर रियासत -जसवंत सिंह
  • उदयपुर रियासत -स्वरूप सिंह
  • जयपुर रियासत -रामसिंह द्वितीय
  • सिरोही रियासत -शिव सिंह
  • धौलपुर रियासत -भगवंत सिंह
  • बीकानेर रियासत -सरदार सिंह
  • करौली रियासत - मदनपाल
  • टोंक रियासत -नवाब वजीरूद्दौला
  • बूंदी रियासत -राम सिंह
  • अलवर रियासत -विनय सिंह
  • जैसलमेर रियासत - रणजीत सिंह
  • झालावाड रियासत -पृथ्वी सिंह
  • प्रतापगढ़ रियासत -दलपत सिंह
  • बांसवाड़ा रियासत - लक्ष्मण सिंह और
  • डूंगरपुर रियासत -उदयसिंह थे

राजस्थान में क्रांति का प्रारंभ ( Revolution in Rajasthan )

  • तत्कालीन ए.जी.जी. जार्ज पैट्रिक लारेंस था
  • क्रांति का प्रतीकं चिह्न  कमल और चपाती था ।
  • 1845 ईं. से A.G.G. का मुख्यालय माउण्ट आबू था ।

नसीराबाद में विद्रोह ( Rebellion in Nasirabad )

  • क्रांति का राजस्थान में आरम्भ 28 मई 1857 से नसीराबाद छावनी में 15वीं N.I. सैन्य टुकडी के विद्रोह से हुआ ।
  • इन सैनिकों ने अंग्रेज अधिकारियों न्यूबरी ,के. वेनी, और के. स्पोर्टिसवुड की हत्या कर दी
  • 18 जून को दिल्ली विद्रोह में शामिल हो गए यहां की क्रांति का नायक बख्तावर सिंह था

कोटा में विद्रोह ( Revolution in Kota )

  • सम्पूर्ण राजपूताने में क्रांति का सुनियोजित आरम्भ जो वास्तव में "जनविद्रोह" था कोटा में 15 अक्टूबर 1857 से आरम्भ हुआ ।
  • कोटा में क्राति के नायक जयदयाल एवं मेहराब खाँ थे ।
  • उनके नेतृत्व में '' भबानी'' और " नारायण '' नामक सैन्य टुकडियों ने विद्रोह किया ।
  • विद्रोह के समय कोटा नरेश महाराव रामसिंह- 2 थे
  • जिन्हें विद्रोहियों ने 6 माह से अधिक समय तक बंदी बनाये रखा ।
  • यहां के नरेश महाराव रामसिंह- 2 को करौली नरेश मदनपाल सिंह ने जनवरी 1858 मे मुक्त करवाया था
  • कोटा विद्रोह को एच जी. रॉबर्टस द्वारा 30 मार्च, 1858 को दबाया गया ।
  • कोटा P.A. मेजर बर्टन की हत्या करके विद्रोहियों ने उसका कटा सिर भाले पर रखकर पूरे शहर में घुमाया था ।

टोंक में विद्रोह Revolution in tonk )

  • राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासतों का नवाब वजीरूद्दौला अंग्रेजों का सहयोगी था ,
  • किंतु नवाब के मामा मीर आलम खां के नेतृत्व में सैनिकों ने विद्रोह कर टोंक पर कब्जा कर लिया
  • मोहम्मद मुजीब के नाटक आजमाइश के अनुसार टोंक के विद्रोह में महिलाओं ने भी भाग लिया था

धौलपुर में विद्रोह ( Revolution in Dholpur )

  • यहां क्रांतिकारियों ने रामचंद्र, देवा गुर्जर और हीरा लाल के नेतृत्व में विद्रोह किया था
  • धौलपुर में ही देवा गुर्जर के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने इरादत नगर की तहसील और सरकारी खजाने को लूट लिया था
  • धौलपुर नरेश भगवन्त सिंह की प्रार्थना पर पटियाला नरेश की सिक्ख सेना ने आकर धोलपुर को क्रांतिकारियों के प्रभाव से मुक्त करवाया था

मेवाड़ के अप्रत्यक्ष विद्रोही

  • राजपूताने का प्रथम नरेश जिसने अंग्रेजों को सर्वप्रथम शरण दी वह उदयपुर महाराणा स्वरूपसिंह था
  • महाराणा स्वरुपसिंह ने उदयपुर P.A. कैप्टन शावर को पिछोला झोल में बने जगमंदिर महलों में शरण दी थी ।

आउवा 

  • 1857 की क्रांति में राजपूताने में अंग्रेजों को सर्वाधिक प्रतिरोध का सामना आउवा (पाली) के ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत से करना पड़ा ।
  • आउवा सेना ने " काला-गोरा युद्ध " (चेलावास युद्ध) 18 Sept 1857 में ब्रिटिश सेना और जोधपुर रियासत की सम्मिलित सेनाओं को परास्त किया ।
  • "काला-गोरा युद्ध" मे A.G.G. जार्ज पैट्रिक लारेंस एवं जोधपुर P.A. मैकमेसन ने भी भाग लिया था ।
  • '' काला-गोरा युद्ध '' में मैकमेसन मारा गया । विद्रोहियों ने उसके कटे सिर को आउवा दुर्ग के फाटक पर लटका दिया था 
  • कर्नल होम्स ने आउवा दुर्ग को जीत कर वहां से सुगाली माता की मूर्ति, 6 पीतल+7 लोहे की तोपे अजमेर लाया था ।

एरिनपुरा

  • 21 अगस्त, 1857 को हुआ।
  • इसी समय क्रान्तिकारियों ने एक नारा दिया ‘‘चलो दिल्ली मारो फिरंगी’’
  •  इस समय जोधपुर के शासक तख्तसिंह थे।
  • क्रन्तिारियों ने आऊवा के ठाकुर कुषालसिंह से मिलकर तख्तसिंह की सेना का विरोध किया।
  • तख्तसिंह की सेना का नेतृत्व अनाड़सिंह व कैप्टन हिथकोट ने किया था।
  • जबकि क्रान्तिकारियों का नेतृत्व ठाकुर कुषालसिंह चंपावत ने किया था।
  • दोनो सेनाओं के मध्य 13 सितम्बर, 1857 को युद्ध हुआ।
  • यह युद्ध बिथोड़ा (पाली) में हुआ। जिसमें कुषालसिंह विजयी रहें एवं हीथकोट की हार हुई।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • राजपूताने का एकमात्र नरेश जिसने विद्रोह के दौरान कम्पनी ( अंग्रेज ) का साथ नहीं दिया बूंदी नरेश महारावल राम सिंह हाड़ा था
  • बीकानेर महाराजा सरदार सिंह एकमात्र राजपूत नरेश थे जो विद्रोह को दबाने राज्य की सीमा से बाहर हरियाणा तक गये ।
  • क्रांति का सबसे पहला शहीद अमरचंद बांठिया था
  • अमरचंद बांठिया को 1857 की क्रांति का भामाशाह भी बोला जाता है 
  • क्रांति का सबसे युवा शहीद हेमू कलानी था जिसे टोंक में फांसी दी गई थी
  • जयपुर महाराजा रामसिंह - 2 को अंग्रेजों ने क्रांति में कंपनी का सहयोग करने के फलस्वरूप '' सितार-ए- हिंद " की उपाधि दी ।
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  2. राजपूतों का उदय - Rise of Rajput Clans in India
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