Maharana Udai Singh History in Hindi - Mewar Vansh Part - 6

Maharana Udai singh History in Hindi  - नमस्कार दोस्तों ये पोस्ट Mewar Vansh के इतिहास का Part - 6 है इस पोस्ट में आप Maharana Udai singh History in Hindi, मेवाड़ के महान राजा Maharana Udai singh के बारे में जानकारी प्राप्त करोगे हमारी ये पोस्ट Rajasthan GK की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है जो की पटवारी राजस्थान पुलिस और rpsc में पूछा जाता है

Maharana Udai singh History in Hindi

Maharana Udai Singh History in Hindi
Maharana Udai Singh History in Hindi - Mewar Vansh Part - 6


उदय सिंह II मेवाड़ के महाराणा और भारत के वर्तमान राजस्थान राज्य के उदयपुर शहर के संस्थापक थे। वह मेवाड़ राजवंश के 53 वें शासक थे।
वह महाराणा संग्राम सिंह और रानी कर्णावती के चौथे पुत्र थे।
जन्म: 4 अगस्त 1522, चित्तौड़ किला, राजस्थान, मेवाड़
राज्याभिषेक: 1540, कुंभलगढ़
निधन: 28 फरवरी 1572, गोगुन्दा, राजस्थान, मेवाड़
बच्चे: महाराणा प्रताप, जगमाल सिंह, शक्ति सिंह, मान कंवर, हरि सिंह, राम सिंह, सागर सिंह
माता-पिता: राणा सांगा, रानी कर्णावती
पोते: अमर सिंह I, शेख सिंह, और
उत्तराधिकारी: प्रताप सिंह प्रथम
जीवनसाथी 18 या 20 रानियों सहित: महारानी जयवंता बाई सोनगरा (चौहान), रानी सजबाई सोलंकी, रानी धीर बाई भटियातनि, रानी जयवंताबाई मद्रेची, रानी लालाबाई, रानी लाचाबाई बलेची (चौहान), वीरबाई झाली, लखबाई झाली
राजवंश: सिसोदिया
धर्म: हिंदू धर्म

उदयसिंह - 1540 से 28 फरवरी 1572 तक शासन


उदयसिंह का जन्म चितौडगढ़ में हुआ था
उदयपुर को बसाने वाले महाराजा उदयसिंह चितौड़गढ के महाराजा थे
पाली के अखैराज सोनगरा चौहान ने अपनी पुत्री जैवंताबाई का विवाह उदयसिंह से किया ।
उसी की कोख से कालांतर में महाराणा प्रताप का जन्म हुआ ।
पन्नाधाय ( गुर्जर जाति ) ने पत्तल चुगने वाले कीरतबारी की सहायता से उदयसिंह को चितौड़गढ़ से निकाला तथा कुंभलगढ़ दुर्ग के द्वारपाल आशादेवपुरा की सहायता से कुंभलगढ़ दुर्ग में रखा 
पन्नाधाय ने महाराणा उदयसिंह को बनवीर के हाथों से कत्ल होने से बचाया था । ( वनरक्षक-2013 )
उदयसिंह का राज्यभिषेक 1537 ई. में कुम्भलगढ दुर्ग में हुआ ।
यहीं 9 मई 1540 ई. को उदयसिंह के पुत्र महाराणा प्रताप का जन्म हुआ ।
अफगानों की अधीनता स्वीकार करने वाला मेवाड़ का पहला राजा उदयसिंह था ।

हरमाड़ा का युद्ध


महाराणा उदयसिंह और अजमेर ठिकाने के हाजी खाँ के मध्य रंगराय वैश्या के कारण 1557 ई. में हरमाड़ा का युद्ध हुआ था ।
इस युद्ध मे मारवाड़ के मालदेव के सहयोग से अजमेर की विजय हुई थी ।
छापामार पद्धति ( गुरिल्ला पद्धति ) का सर्वप्रथम प्रयोग करने वाला राजस्थान का प्रथम राजा उदयसिंह था ।

उदयपुर की स्थापना


1559 ई. मे उदयसिंह ने उदयपुर/झीलों को नगरी/पूर्व का वेनिस/व्हाईट सिटी/सैलानियों का स्वर्ग/माउण्टेन-फाउण्टेन की नगरी/सितारों की नगरी नगर बसाया ।
उदयसिंह ने ' उदयसागर झील ' का निर्माण करवाया और अपनी राजधानी उदयपुर को बनाया । 

चितौड़गढ़ का तीसरा साका 


1567 ई. में अकबर ने चितौड़ पर आक्रमण किया तब उदयसिंह सिरोही चला गया व चितौड़गढ़ दुर्ग अपने सैनिक जयमल व फता को सौंप गया जयमल व फता अकबर के साथ युद्ध करते समय मारे गये तथा फूल कंवर ने जौहर किया ।
इसे चितौड़गढ़ का तीसरा साका कहते है । 
जयमल राठौड़ व फता सिसोदिया की छतरियां चितौडगढ़ दुर्ग में बनी है । 
जयमल फत्ता की वीरता से प्रभावित होकर अकबर ने आगरा दुर्ग के बाहर इनकी मूर्तियां बनवाई ।
ऐसी ही मूर्तियां जूनागढ़ दुर्ग ( बीकानेर ) के बाहर स्थित है । 
25 फरवरी 1568 ई. को अकबर ने चितौड़गढ फतह कर लिया तो मेवाड के उदयसिंह ने गोगुन्दा को राजधानी बनाया ।
28 फरवरी 1572 ई. में गोगुन्दा उदयपुर में उदयसिंह की मृत्यु हो गई और इसी स्थान पर उसके पुत्र महाराणा प्रताप का राज्यभिषेक हुआ ।
कर्नल टॉड ने लिखा है कि यदि सांगा और प्रताप के बीच में उदयसिंह न होता तो मेवाड के इतिहास के पत्रे अधिक उज्जवल होते ।

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