Sunday, 20 October 2019

Sahitya in Rajasthan - राजस्थान के साहित्य से संबंधित विविध तथ्य

Sahitya in Rajasthan - राजस्थान के साहित्य से संबंधित विविध तथ्य

Sahitya in Rajasthan - राजस्थान के साहित्य से संबंधित विविध तथ्य
Sahitya in Rajasthan - राजस्थान के साहित्य से संबंधित विविध तथ्य

वचनिका - यह एक गद्य-पद्य तुकान्त रचना होती है, इसे चम्पू काव्य भी कहते है । वचनिका मुख्यत अपभ्रंश मिश्रित राजस्थानी में लिखी हुई है । इसमें अचलदास खींची री वचनिका एवं राठौड़, रतनसिंह जी, महेश दासोत की वचनिका प्रमुख है ।

वंशावली 

  • इसमें शासकों की वंशावलियों का विस्तृत वर्णन है । जैसे राठौड़ा की वंशावली, राजपूतों की वंशावली ।

विगत 

ये इतिहास परक ग्रन्थ लेखन की शैली है ।  मारवाड़ रा परगना री विगत इसकी प्रमुख रचना है ।  

वेलि 

  • इस साहित्य में शासकों की प्रमुख घटनाओं का वर्णन होता है ।
  • पृथ्वीराज राठौड़ द्वारा लिखित वेलि किसन रुक्मणी री प्रसिद्ध वेलि ग्रन्थ है ।

वात 

  • वात का अर्ध कथा या साहित्य से है ।

रूपक 

  • यह किसी महान योद्धा का चित्रण होता है । 

रासो 

  • यह शासकों के प्रशंसा काव्य होते हैं । 
  • बीसलदेव रासौ, पृथ्वीराज रासौ मुख्य रासौ ग्रन्थ है । 

निसाणी 

  • यह किसी व्यक्ति की यादगार के रूप में होता है । 

दवावैत 

  • यह उर्दू-फारसी की शब्दावली से युक्त राजस्थान की कलात्मक लेखन शैली है । इसमें किसी की प्रशंसा दोहों के रूप की जाती है ।

ख्यात 

  • शासकों के मान मर्यादा व वंशावली का वर्णन होता है ।
  • मुहणोत नैणसी री ख्यात, दयालदास री ख्यात आदि प्रसिद्धि ख्वाते है ।

प्रकाश 

  • किसी वंश अथवा व्यक्ति विशेष की उपलब्धियों या घटना विशेष पर प्रकाश डालने वाली कृतियां प्रकाश कहलाती है ।

मरस्या 

  • यह राजा या किसी व्यक्ति विशेष को मृत्योपरांत शोक व्यक्त करने के लिए रचित काव्य शैली है ।

हाल 

  • राजस्थान गद्य साहित्य में हाल लिखने की परम्परा रही है, जिसका एतिहासिक महत्व है । महाराजा जोधा का हाल व जोधा का जन्म सम्बन्धी हाल मारवाड़ के इतिहास के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी देते है ।

झमाल 

  • यह डिंगल का छन्द विशेष है ।

बांधनी के कागज 

अंकात्मक सांकेतिक लिपि में लिखे पात्र । 
इसमें किसी की प्रशंसा दोहों के रूप की जाती है ।

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