Rajputo ki Utpatti ke Siddhant in Hindi - राजपूतों की उत्पति

स्मिथ के अनुसार " हर्ष की मृत्यु के बाद से तुर्कों के आधिपत्य तक राजपूत इतने प्रभावशाली हो गये थे कि सातवीं शताब्दी ( 647 ई. ) से 12वीं शताब्दी ( 1191-9 2 ई. ) तक के काल को राजपूत काल कहा जाता है  ह्वेनसांग के यात्रावृतांत सी-यू-की में राजाओं को कहीं क्षत्रिय, कहीं राजपूत लिखा गया है
श्री जगदीश गहलोत के अनुसार ( पुस्तक - राजपूताने का इतिहास 1937 ई. ) मुसलमानों के आगमन या आक्रमण तक यहाँ के शासक क्षत्रिय कहलाते थे ।
कालीदास, बाणभट्ट और चाणक्य के ग्रंथों में राजपुत्र शब्दों को ही मुसलमानों द्वारा राजपूत शब्द में प्रणित किया गया । राजपूत स्वयं को वैदिक आर्यों से संबंधित सूर्य व चंद्रवंशी बताते है
प्रतिहार राजपूत राम के भाई लक्ष्मण की संतान बताते हुए सूर्यवंशी होने का दावा करते है ।
हम्मीर महाकाव्य में चौहानों को सूर्यवंशी बताया है
Rajputo ki Utpatti ke Siddhant in Hindi
Rajputo ki Utpatti ke Siddhant in Hindi

राजपूतों की उत्पति से संबधित विभिन्न मत

  • चंदबरदाई ने अपने ग्रंथ पृथ्वीराज रासो में राजपूतों को अग्निकुण्ड से उत्पन्न बताया है
  • उसके अनुसार आबूपर्वत पर ऋषि तप करते थे, किन्तु कुछ राक्षस यज्ञ को दूषित कर देते थे तब आबूपर्वत पर एक यज्ञ ऋषि विश्वामित्र द्वारा किया गया । जिसकी अग्नि से तीन योद्धा प्रतिहार, परमार चालुक्य पैदा हुए । बाद में उसी यज्ञ की अग्नि से एक और योद्धा चाहमान/चौहान पैदा हुआ ।
  • अग्निकुंड से जन्म होने के कारण ये राजवंश अग्निवंशीय  कहलाये
  • 18वीं शताब्दी में सूर्यमल्ल मिश्रण ने वंश भास्कर में अग्निकुण्ड सिद्धान्त का समर्थन किया ।
  • मुहणौत नैणसी ने अपनी ख्यात नैणसी री ख्यात में अग्निवंशीय सिद्धान्त का समर्थन किया ।
  • विलियम कुक व कर्नल टाॅड ने अप्रत्यक्ष रूप से इसका समर्थन करते हुए राजपूतों को विदेशी बताया है 
  • कर्नल जेम्स टॉड ने अग्निकुण्ड के मत को समर्थन देते हुए कहा कि विदेशी जातियाँ शक, कुषाण, युनानी, सीथीयन, हूण आदि को अग्नि संस्कार द्वारा शुद्ध करके उन्हे भारतीय समाज में शामिल कर लिया गया और वे ही लोग राजपूत कहलाने लगे।
  • अग्निकुण्ड सिद्धान्त का ओझा जी ने अग्निपुराण ग्रंथ के अनुसार खंडन किया ।
  • अग्निकुंण्ड सिद्धान्त का अभिलेखीय स्रोत सिसाणा अभिलेख (अजमेर) में है।
  • दशरथ शर्मा ने अग्निकुण्ड का सिद्धान्त राजपूत, चारण व भाटों की मानसिक कल्पना बताया है ।
  • डॉ. गोपीनाथ शर्मा ने इस मत का विरोध किया और चन्दबरदाई की बात को काल्पनिक माना है

ब्राह्मणों से उत्पति 

  • सर्वप्रथम डॉ॰ भंडारकर ने राजपूतों की उत्पत्ति किसी विदेशी ब्राह्मण से बताई ।
  • मण्डोर, जोधपुर से प्रात शिलालेख में प्रतिहारों को ब्राह्मणवंश से बताया गया है । इस शिला लेख के अनुसार प्रतिहार ब्राह्मण हरिश्चन्द्र व उसकी पत्नी भ्रदा/ मादरा की संतान थे ।
  • बिजौलिया शिलालेख के अनुसार वासुदेव का उत्तराधिकारी सामंत वत्सगोत्रीय ब्राह्मण था ।
  • राजशेखर ब्राह्मण का विवाह अवन्ति सुंदरी के साथ होना, चौहानों के ब्राह्मण होने का स्पष्ट प्रमाण है ।
  • डाॅ. गोपीनाथ शर्मा के अनुसार मेवाड़ के गुहिलों को नागर जाति के ब्राह्मण गुहादत का वंशज बताया है ।
  • श्री ओझाजी के अनुसार महाराणा कुंभा ने जयदेव के गीत गोविंद की टीका रसिक प्रिया में स्वीकार किया है कि गुहिलोत, नागर जाति के ब्राह्मण गुहादत की संतान थे ।
  • पिंगल सूत्रवृति में भी राजपूतों को ब्राह्मण से उत्पन्न बताया गया है (मेवाड के गुहिल) किन्तु डाॅ॰ दशरथ शर्मा ने तर्क सहित इस मत का खंडन किया है ।

विदेशी उत्पति का गत

  • कर्नल जेम्स टॉड, विलियम क्रुक, वी. ए. स्मिथ, भंडारकर राजपूतों को विदेशी जातियों की संतान बताते है 
  • कर्नल टॉड के अनुसार विश्व के प्रमुख धर्म चाहे वह बेबीलोनिया हो या यूनान हो, या भारत या सूसा इन सभी का विकास मध्य एशिया में हुआ था और प्रत्येक धर्म में अलग-अलग प्रथम पुरूष माने गये है । किसी ने सुमेरू कहा है, किसी ने बेकस और किसी ने प्रथम पुरूष मनु को माना है । कर्नल टॉड ने राजपूतों को विदेशी सीथियन जाति की संतान माना है । 
  • इतिहासकार वी ए. स्मिथ ने राजपूतों को हूणों की संतान बताया है ।
  • इतिहासकार विलियम कुक व कनिंघम ने टॉड का समर्थन करते हुए, राजपूतों के वंशजों का उद्भव शक/कुषाणों के आक्रमण के समय माना है ।
  • डॉ. भण्डारकर ने चारों अग्निवंशीय ( परमार, प्रतिहार, चौहान, चालुक्य ) को विदेशी सिद्ध करने का प्रयास किया है ।
  • डॉ. भण्डारकर के अनुसार हूण जाति के साथ भारत में एक और खज जाति का भी आगमन हुआ और गुर्जर इन्हीं खजों की संतान है । इसलिए गुर्जर प्रतिहार विदेशी है ।
  • राजौर अभिलेख में प्रतिहारों की एक शाखा को गुर्जर कहा गया है । अत: गुर्जर पाँचवीं शताब्दी में हुणों के साथ भारत में प्रविष्ट हुए

प्राचीन क्षत्रियों की संतान

  • डॉ गौरीशंकर हीराचन्द ओझा ( पुस्तक राजपूताने का प्राचीन इतिहास 1925 ईं॰ ) के अनुसार राजपूत प्राचीन वैदिक क्षत्रियों की संतान थे ।
  • सी एम बैद्य ने भी ओझा का समर्थन करते हुए, राजपूतों को वैदिक क्षत्रियों की संतान कहा है
  • नद्धहरण से प्राप्त एक शिलालेख के अनुसार महाकाव्य काल के राम व कृष्ण क्षत्रिय थे अत: राजपूत भी वैदिक, आर्यों की संतान है । मनुस्मृति में राजपूतों को ब्रह्मा की संतान बताया है ।
  • ऋग्वेद के दसवें मण्डल के पुरूष सूक्त में राजपूतों को ब्रह्मा की भुजाओं से उत्पन्न बताया है ।

सूर्यवंशी व चंद्रवंशी

  • श्री जगदीश सिंह गहलोत के अनुसार राजपूतों के राजवंश वैदिक व पौराणिक काल में राजन्य, क्षत्रिय आदि नाम से प्रसिद्ध सूर्य व चंद्रवंशी क्षत्रियों की संतान थे । यह न तो विदेशी है और न ही अनार्यों के वंशज थे 
  • डॉ. दशरथ शर्मा ने ( पुस्तक राजस्थान थ्रू द एजेज ) राजपूतों को सूर्यवंशी व चंद्रवंशी बताया है ।
  • अग्निपुराण के अनुसार चंद्रवंशी कृष्ण व अर्जुन, सूर्यवंशी राम व लवकुश के वंशज ही राजपूत थे ।
  • हर्षनाथ अभिलेख ( सीकर ) में चौहानों को सूर्यवंशी बताया है ।
  • वंशावलियों में राठौड़ों को सूर्यवंशी, यादवों व भाटियों को चंद्रवंशी बताया है ।
मिश्रित उत्पति का सिध्दांत - डॉ. डी पी. चटोपाध्याय के अनुसार राजपूत मिश्रित जातियों के संतान थे ।

राजपूतों की उत्पत्ति से संबंधित विभिन्न सिद्धान्त

अग्निकुल सिद्धान्त


  1. सर्वप्रथम चंदबरदाई ( पृथ्वीराज रांसौ ) 
  2. मुहणौत नैणसी ( मारवाड़रां परगना री विगत ) 
  3. सूर्यमल्लमिश्रण ( वंश भास्कर )
  4. हम्मीर रासौ ( जोधराज )
  5. पद्मनाभ (नवसहंसाक चरित ) 

विदेशी सिद्धान्त 

  1. कर्नल टॉड शक व सीथियन
  2. बी. ए. स्मिथ हुण
  3. कनिंघम यू ची कुषाण
  4. कैनेडी ईरानी
  5. विलियम कुक शक, हुण, कुषाण
  6. डॉ. ईश्वरी प्रसाद विदेशी
  7. डी. आर. भंडारकर विदेशी ब्राह्मण
  8. स्मिथ प्राचीन आदिम जातियों (गौंड, खखार, भर के वंशज)

ब्राह्मण सिद्धान्त

  1. डॉ. भंडारकर विदेशी ब्राह्मण - 1. मण्डोर, जोधपुर अभिलेख के आधार पर  2. बिजौलिया अभिलेख में बत्सगौत्रीय ब्राह्मण 
  2. डॉ. गोपीनाथ शर्मा (नागर जाति के ब्राह्मण) 
  3. डॉ. गौरीशंकर ओझा  (कुंभा रसिक प्रिया) 

सूर्यवंशी/चंद्रवंशी सिध्दांत 

  1. श्री जगदीश गहलोत (राजपूताने का इतिहास)
  2. डॉ. दशरथ शर्मा (राजस्थान थ्रू द एजेज)
  3. अग्नि पुराण के अनुसार
  4. हर्षनाथ अभिलेख सीकर
  5. हम्मीर महाकाव्य
  6. विभिन्न वंशावलियों में 

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