Tuesday, 12 February 2019

राजस्थान के लोक देवता - Rajasthan ke Lok Devta

यह Rpsc Rajasthan GK (Raj GK ) याद करने का सबसे आसान तरीका है इस पोस्ट से आप राजस्थान में लोक देवता - Rajasthan ke Lok Devta को Step by Step आसानी से पढ़कर याद कर सकते हैं

राजस्थान के लोक देवता - Rajasthan ke Lok Devta

राजस्थान के लोक देवता - Rajasthan ke Lok Devta
राजस्थान के लोक देवता - Rajasthan ke Lok Devta

बाबा मामादेव जी

  • मामादेव राजस्थान में एकमात्र ऐसे लोकदेवता हैं जिनकी मूर्ति न होकर काष्ठ का एकमात्र तोरण होता हैं ।
  • इनका प्रमुख मंदिर स्यालोदड़ा (सीकर) में है, जहाँ प्रतिवर्ष रामनवमी को मेला लगता है ।
  • मामादेव बरसात के लोक देवता के रूप में प्रसिद्ध हैं ।
  • इनकी मूर्ति विशेषत: शेखावाटी क्षेत्र में गाँव के बाहर होती है ।
  • मामादेव को प्रसन्न करने के लिए भैंसे की कुर्बानी दी जाती है।
  • इनकी मूर्ति मिट्टी या पत्थर की न होकर लकडी के कलात्मक तोरण बनाकर गाँव के मुख्य प्रवेश मार्ग पर स्थापित किए जाते है ।

वीर बिग्गाजी/बग्गाजी

  • बिग्गाजी का जन्म रिडी गाँव जागलप्रदेश (बीकानेर) के जाट परिवार में हुआ था ।
  • इनके पिता का नाम राव मोहन एवं माता का नाम सुल्तानी था ।
  • वीर बिग्गाजी जाखड समाज के कुल देवता हैं ।
  • बीकानेर की श्री डूगरगढ़ तहसील का बिग्गा गाँव शूरवीर लोकदेवता बिग्गा के नाम पर आबाद हुआ ।
  • बिग्गा गाँव स्थित मंदिर में हर वर्ष 14 अक्टूबर को वीर बग्गाजी का मेला लगता है ।
  • वीर बिग्गाजी ने राठाली जोहडी का युध्द किया था ।
  • बिग्गा जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन गौ-सेवा में व्यतीत किया और अंत में मुस्लिम लुटेरों से गायों की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये ।

वीर फत्ता जी

  • वीर फत्ता जी का जन्म साथू गाँव (जालौर) के ही गज्जारणी परिवार में हुआ था ।
  • सांथू गाँव में फत्ता जी का एक विशाल मंदिर है, जहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल नवमी को विशाल मेला लगता है ।
  • फ़त्ता जी ने अपने गाँव की मान-मर्यादा की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये ।
  • वीर फत्ता जी का मुख्य स्थल सांथू (जालौर) में हैं ।
  • फत्ता जी ने शस्त्र विद्या का ज्ञान प्राप्त किया ।

पनराज जी

  • वीर पनराज जी का जन्म नगा गाँव (जैसलमेर) में क्षत्रिय परिवार में हुआ था ।
  • पनराज जी का मुख्य स्थल पनराजसर में है ।
  • पनराज की याद में जैसलमेर जिले के पनराजसर गाँव में वर्ष में दो बार भाद्रपद सुदी दशमी और माघ सुदी दशमी को मेला भरता है ।
  • वीर पनराज जी ने मुस्लिम लुटेरों से काठोडी ग्राम की ब्राह्मणों की गाय छुड़ाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया ।
  • पनराज जी का बचपन गायों के बीच में गुजरा ।

भूरिया बाबा (गौतमेश्वर)

  • भूरिया बाबा मीणा जाति के लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं ।
  • मीणा जाति के लोग भूरिया बाबा की कभी भी झूटी कसम नहीं खाते है ।
  • गौतमेश्वर महादेव ( भूरिया बाबा) का प्रसिद्ध मंदिर प्रतापगढ व सिरोही में स्थित है ।
  • इनका मुख्य स्थल डूंगरपुर जिले में है ।
  • इनका प्रसिद्ध मंदिर पोसलिया गाँव (सिरोही) में स्थित हैं । जहाँ पर वर्दीधारी पुलिसकर्मियों का जाना मना है 
  • भूरिया बाबा शौर्य के प्रतीक है ।
  • भूरिया बाबा गौतम बाबा के नाम से भी जाना जाता है ।
  • सिरोही जिले में अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य सूकडी नदी जिसे लोग 'पतित गंगा' भी कहते है । 
  • गोतमेश्वर ऋषि महादेव (भूरिया बाबा) का प्रमुख मंदिर स्थित हैं । जिसका निर्माण एक गुर्जर ने शुरू किया परंतु मीणा जाति ने इसे पूर्ण करवाकर यहाँ प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा की । 
  • यहाँ प्रतिवर्ष मकर सक्रांति के 90 दिन बाद (13 अप्रेल से 15 मई के बीच) मेला लगता है जो 'मीणा जनजाति ' का प्रसिद्ध मेला है ।

बाबा झूंझार जी

  • बाबा झूंझार जी का जन्म सीकर क्षेत्र के इमलोहा कस्बे में राजपूत परिवार में हुआ ।
  • इनका थान प्राय: खैजडी के पेड़ के नीचे होता है ।
  • 17 वीं शताब्दी से पूर्व एक बार मुस्लिम लुटेरे गाँव में घुस आये तब लडते-लडते एक ही परिवार के तीन सगे भाईयों के शीश कट गये, परन्तु उसके धड़ दुश्मनों से निरन्तर लडते रहे ।
  • जनश्रुति के अनुसार लडाई के दौरान एक बारात उधर से गुजरी फलस्वरूप बारातियों और दूल्हा-दुल्हन की हत्या कर दी गई  ।
  • कालांतर में ये तीनों भाई आपसी प्रेम तथा उनके बलिदान से जन श्रद्धा के कारण लोक देवता झूंझार बाबा के रूप में प्रसिद्ध हो गये ।
  • इन सभी की स्मृति में प्रतिवर्ष रामनवमी के दिन स्यालोदड़ा गाँव में झूंझार जी का मेला लगता है ।
  • झूंझार बाबा के इस श्रद्धा स्थल पर नव विवाहित जोडे यहाँ गठ जोड़े की जात देने आते है, वहीं छोटे बच्चों का झंडूला उतारने भी श्रद्धालु यहाँ आते है ।

डूंगजी-जवाहर जी

  • डूंगजी जवाहर जी दोनों चाचा भतीजा धनी लोगों (धाडायती) से धन लूटकर उनका धन गरीबों जरूरत मंदों में बांट दिया करते थे ।
  • इनका जन्म बाठौठ-पाटोदा (सीकर) में हुआ था । डूंगजी-जवाहर जी का मुख्य स्थल भी बाठौठ-पाटोदा (सीकर) में है ।
  • शेखावाटी के लोग डूंग जी - जवाहर जी की पूजा लोक देवता के रूप में करते है ।
  • डूंग जी जवाहर जी को बलजी - भूरजी के उपनाम से भी जाना जाता हैं ।

इलोजी

  • मारवाड़ में ये छेडछाड के अनोखे लोक देवता के रूप में पूज्य है ।
  • मारवाड़ में इनके बारे में मान्यता हैं कि ये अविवाहिता को दुल्हन, नव दम्पत्तियों को सुखद ग्रहस्थ जीवन और बांझ स्त्रियों को संतान देने में सक्षम है । जबकि ये स्वयं जीवनभर कुंवारे रहे ।
  • इलोजी राजा हिरण्य कश्यप के बहनोई थे ।
  • इनकी पूजा मारवाड़ में होली के अवसर पर की जाती है। इलोजी होलिका के प्रेमी थे ।
  • इलोजी की मूर्ति आदमकद नग्न अवस्था में होती है ।

आलमजी

  • इनका मंदिर, आलमजी का धोरा बाडमेर में स्थित है ।
  • आलमजी का धोरा गुढामलानी (बाड़मेर) घोडों के तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है ।
  • आलमजी का मूल नाम जैतमलोत राठौड़ था ।
  • यहाँ भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मेला भरता है ।

बाबा हरिराम जी

  • इनके पिता का नाम राय नारायण व माता का नाम चंदणी देवी था ।
  • हरिराम बाबा सर्पदंश का इलाज करते थे ।
  • सुजानगढ़-नगौर मार्ग पर झोरड़ा (नागौर) गाँव में हरिराम जी का मंदिर है । 
  • हरिराम जी के मंदिर में साँप की बांबी एवं बाबा के प्रतीक के रूप में चरण कमल है ।
  • सांप काटने एवं अन्य रोगों पर इनके नाम की तांती बांधने अथवा भस्म लगाने की परम्परा चली आ रही है 
  • झौरड़ा गाँव में प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल चौथ तथा भाद्रपद शुक्ल पंचम को दो बड़े मेले लगते है ।
  • हरिराम जी के गुरू का नाम भूरा था ।

केसरिया कुँवर जी

  • इनका जन्म ददरेवा (चूरू) में हुआ ।
  • केसरिया कुंवर गोगाजी के पुत्र थे, जो लोकदेवता के रूप में पूजे जाते है ।
  • केसरिया कूंवर जी का थान मुख्यत: खेजडी के वृक्ष के नीचे होता है ।
  • इनके थान पर सफेद रंग का ध्वज फहराते हैं ।
  • इनका भक्त भोपा सर्प दंश के रोगी का जहर मुँह में चूसकर बाहर निकाल देता है ।

रुपनाथ जी / झरड़ाजी

  • इनका जन्म कोलूमण्ड (जोधपुर) में हुआ । रूपनाथ जी पाबूजी के भतीजे तथा बूडोजी राठौड के पुत्र थे ।
  • रूपनाथ जी ने पाबूजी की मृत्यु का बदला जींदराव खींची को मारकर लिया था ।
  • रूपनाथ जी हिमाचल प्रदेश में 'बालकनाथ के रूप में पूजे जाते है । इनका मुख्य पूजा स्थल कोलू (जोधपुर), सिम्भुदड़ा नोखा (बीकानेर) में है ।

खेत्रपाल जी

  • खेत्रपाल जी को क्षेत्र रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है ।

भौमिया जी

  • भौंमिया जी गांव-गांव में भूमि के रक्षक देवता के रूप में पूजे जाते है। 
  • इनको गांव की सीमाओं का रक्षक माना जाता है । 
  • भौंमिया जी के मंदिर प्रत्येक गाँव में बने होते हैं ।
  • जयपुर में नाहर सिंह जी भोमिया व दौसा दुर्ग के समीप श्री सूरजमल जी भोमिया का मंदिर संपूर्ण राज्य में प्रसिद्ध है ।

वीर बावसी

  • वीर बावसी आदिवासी के प्रसिद्ध लोकदेवता के रूप में जाने जाते है । 
  • बावसी प्रतापसिंह मंडेला के पुत्र थे, जिन्होंने गौ रक्षा हेतु अपने प्राण त्याग दिए । 
  • वीर बाबसी का मंदिर अरावली पर्वतमाला की दुर्गम घाटियों में काला टोकरा में बना हुआ है
  • यहाँ प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल पंचमी को विशाल मेला भरता है ।

देव जी

  • देवजी चमत्कारिक लोक पुरुष के रूप में प्रसिद्ध है । देवजी को विष्णु का अवतार माना जाता है ।
  • इनके भोपे गुर्जर जाति के होते है ।
  • देवजी के भोपे जंतर वाद्ययंत्र का प्रयोग करते है ।
  • देवजी का मुख्य पूजा स्थल आसींद (भीलवाडा) में है ।
  • इनकी फड़ बगड़ावत गाथा देवजी के गुर्जर अनुयायियों द्वरा गाई जाती है । 

राजस्थान के लोक देवता बाबा रामदेव

  • रामदेवजी का ज़न्म बाडमेर के शिव तहसील के ऊडकासमेर गाँव में भाद्रपद शुक्ल दूज (द्वितीया) को हुआ था ।
  • रामदेव जी के पिता का नाम अजमाल जी (तंवर वंशीय) तथा माता का नाम मैणादे था ।
  • ये अर्जुन के वंशज माने जाते है 
  • रामदेव जी 'रामसा पीर', 'रूणीचा रा धणी', "बाबा रामदेव', आदि उपनामों से भी जाने जाते है ।
  • रामदेवजी के गुरू का नाम बालीनाथ था ।
  • इनके भाई का नाम बीरमदे था ।
  • बाबा रामदेव जी का विवाह अमरकोट (वर्तमान पाकिस्तान मे) सोढा, दलैसिंह की सुपुत्री नैतलदे/निहालदे के साथ हुआ ।
  • रामदेवजी ने पश्चिम भारत में मतान्तरण व्यवस्था को रोकने हेतु प्रभावी भूमिका निभाई थी ।
  • भैरव राक्षस, लखी बंजारा, रत्ना राईका का सम्बन्ध रामदेवजी से था ।
  • यूरोप की क्रांति से बहुत पहले रामदेवजी द्वारा हिन्दू समाज को दिया गया संदेश समता और बंधुत्व था ।...Read more

राजस्थान के लोक देवता गोगाजी

  • गोगाजी का जन्म भाद्र मास की नवमी तिथि ( श्रीकृष्ण जन्माष्टी के दूसरे दिन ) को चूरू जिले के ददरेवा गाँव में हुआ था । इस दिन का नाम ' गुगो ' रखा गया ।
  • गोगाजी के पिता का नाम जेवर व माता का नाम बाछल था । वीर गोगाजी महमूद गजनवी के समकालीन थे ।
  • राजस्थान के पाँच पीरों में गोगाजी का महत्वपूर्ण स्थान है । गोगाजी को जाहरपीर (जिंदा पीर) के नाम से भी पूजा जाता है । गोगाजी को सांपों के देवता के रूप में पूजा जाता है ।
  • राजस्थान का किसान वर्षा के बाद हल जोतने से पहले गोगाजी के नाम की राखी ' गोगा रांखडी' हल और हाली, दोनों को बांधता है । गोगाजी के ' थान ' खेजड़ी के वृक्ष के नीचे होते है, जहाँ मूर्ति स्वरूप एक पत्थर पर सर्प की आकृति अंकित होती है ।
  • गोगाजी की घोडी का रंग नीला था ।
  • सांचौर (जालौर) में गोगाजी का मंदिर है, जिसे गोगाजी की ओल्डी कहा जाता है ।
  • इनकी स्मृति में भाद्रपद कृष्ण नवमी (गोगा नवमी) को गोगामेडी (नोहर, हनुमानगढ) में गोगाजी का मेला भरता है । ...read more

लोक देवता तेजाजी का इतिहास - Lok Devta Tejaji Maharaj

  • तेजाजी का जन्म (tejaji janam) नागवंशीय जाट के धौल्यागौत्र के ताहड़ परिवार में सन् 1074 ई० में नागोर जिले के ख़ड़नाल (वर्तमान ख़रनाल्य) गांव में माघ शुक्ला चतुर्दशी के दिन हुआ ।
  • तेजाजी की माता का नाम राजकुंवरी व पिता ताहड़जी था ।
  • इनका विवाह पनेर /पनेहर गाँव (अजमेर जिले मे) रामचन्द्र जाट की पुत्री पेमल के साथ हुआ था ।
  • मारवाड़ के जाट इतिहास के अनुसार तेजाजी का गोत्र धौल्या है ।
  • तेजाजी की घोडी का नाम लीलण (सिणगारी) था । तेजाजी नागवंशीय जाट थे । ...Read more

लोक देवता पाबूजी महाराज का इतिहास

  • पाबूजी के पिता का नाम धांधलजी माता का नाम कमलादे था ।
  • ये राठौडों के मूल पुरुष राव सीहा के वंशज थे ।
  • पाबूजी को लक्ष्मण का अवतार माना जाता है ।
  • मनौती पूर्ण होने पर भोपा व भोपियों द्वारा पाबूजी की फड गाई जाती है । ..Read more

लोक देवता देवनारायण जी का इतिहास

  • इनका जन्म 1243 ईं. में बगड़ावत परिवार में हुआ था ।
  • देवनारायण जी के पिता का नाम सवाई भोज एवं माता का नाम सेडू खटाणी था ।
  • देवनारायण जी के पिता दुर्जनसाल से लडते हुए वीरगती को प्राप्त हो गए ।
  • इनका विवाह राजा जयसिंह की पुत्री पीपलदे के साथ हुआ था ।
  • देवनारायण जी के बचपन का नाम उदयसिंह था ।...Read more

राजस्थान के लोक देवता हड़बूजी - rajasthan ke lok devta

  • हड़बूजी का जन्म भूंडेल (नागौर) में हुआ था । हड़बूजी महाराजा गोपालराज सांखला के पुत्र थे । लोक देवता रामदेवजी हड़बू जी के मौसेरे भाईं थे ।
  • हड़बूजी ने रामदेवजी से प्रेरणा लेकर योगी बालीनाथ जी से दीक्षा ली थी ।
  • हड़बूजी के गुरू का नाम बालीनाथ था । ...Read more

लोक देवता मेहाजी

  • मेहाजी मांगलिया इष्टदेव के रूप में पूजे जाते है ।
  • मेहाजी पाँच पीरों में से एक थे ।
  •  इनके पिता का नाम गोपालराज सांखला था । ...Read more

लोक देवता वीर कल्लाजी राठौड़

  • वीर कल्लाजी राठौर का जन्म नागौर (मारवाड़) के  सामीयाना गाँव में 1601 ई. में दुर्गाष्टमी को हुआ ।
  •  कल्लाजी मेड़ता (नागौर) के निवासी थे ।
  • वीर कल्लाजी के पिता का नाम आस सिंह था । ...Read more

राजस्थान के लोक देवता तल्लीनाथ जी

  • तल्लीनाथ जी जालौर जिले के अत्यंत प्रसिद्ध लोक देवता है ।
  • इनका वास्तविक नाम गांगदेव राठौड था ।
  • तल्लीनाथ के पिता का नाम बीरमदेव था । ...Read more

लोक देवता देव बाबा

  • भरतपुर के नगला जहाज नामक स्थान पर प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल पंचमी व चैत्र शुक्ल पंचमी को दो बार यहाँ मेला आयोजित होता है ।
  • देव बाबा की बहन का नाम एलारी/ऐलादी थी ।
  • गुर्जर ग्वालो के प्रति देव बाबा के मन में गहरी श्रृंद्धा थी । देव बाबा को पशुचिकित्सा का अच्छा ज्ञान था । ...Read more

मल्लिनाथ जी 

  • मल्लीनाथ जी का जन्म मारवाड़ के रावल सलखाँ तीड़ाजी (पिता जी) और जीणन्दे (माता का नाम) के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में 1358 ई. में हुआ था ।
  • मल्लीनाथ जी निर्गुण निराकार ईश्वर को मानते थे । ...Read more
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  2. राजस्थान के लोक देवता गोगाजी | Goga Medi Rajasthan
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