Wednesday, 2 January 2019

राजस्थान की नदियां | Rivers of Rajasthan in Hindi

नमस्कार दोस्तों राजस्थान की नदियां (rivers of Rajasthan in hindi) जहां से राजस्थान के हर Exam में 3 से 4 प्रश्न पूछे जाते हैं यह RPSC/RAS की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण Topic है आज हम rajasthan ki nadiya के बारे में  step by step चर्चा करेंगे

राजस्थान में बहने वाली नदियों को उनके उदगम परवाह नित्य वाहिनी मौसमी तथा अपना जल किसी सागर में ले जाती है के आधार पर सामान्यतः तीन भागों में बांट जाता है
राजस्थान की नदियां  Rivers of Rajasthan in Hindi by Raj GK
 Rivers of Rajasthan in Hindi

बंगाल की खाड़ी की तरफ जाने वाली नदियां

यह नदियां सामान्यत है अरावली पर्वतमाला के दक्षिण पूर्व में बहती हुई अपना जल बंगाल की खाड़ी में ले जाती है बंगाल की खाड़ी की परवाह की मुख्य नदियां चंबल बनारस कोठारी बेड कालीसिंध पार्वती बाणगंगा मानती गंभीरी आदि है

चंबल

उपनाम :  कामधेनू, नित्य वाहिनी, चरणवती

उद्गम स्थल : मध्यप्रदेश के महू के दक्षिण में स्थित मानपुर के निकट विंध्याचल पर्वत की जानापाव की पहाड़ी से निकलती है और राजस्थान में 84 गढ़ चित्तौड़गढ़ से राजस्थान में प्रवेश करती है राजस्थान में बहने के बाद में आगरा उत्तर प्रदेश के इटानगर के निकट मुरादगंज स्थान पर यमुना नदी में मिल जाती है

इस नदी की कुल लंबाई 966 किलोमीटर है जिसमें से 135 किलोमीटर राजस्थान में इसका राजस्थान में कुल 19500 km क्षेत्र है प्रदेश से 315 किलोमीटर प्रवाहित होती है  राजस्थान में बहने वाली यह सबसे लंबी नदी है जो राजस्थान और एमपी के मध्य सबसे लंबी अंतर राज्य सीमा बनाती है

भैस रोड गढ़ चित्तौड़गढ़ के समीप स्थित इस स्थान पर चंबल नदी चूलिया जलप्रपात बनाती है जिसकी ऊंचाई 18 मीटर है रामेश्वरम सवाई माधोपुर नामक स्थान पर चंबल नदी के बाएं किनारे पर बनासऔर सीप नदियों का संगम होता है जो त्रिवेणी संगम कहलाता है

यह नदी राजस्थान की बारहमासी नदी है और इससे सर्वाधिक अवनालिका अपरदन भी होता है इस नदी पर मध्य प्रदेश में गांधी सागर बांध चित्तौड़गढ़ में राणा प्रताप सागर बांध कोटा में जवाहर सागर बांध और कोटा बैराज बांध स्थित है जो जल विद्युत और सिंचाई के मुख्य स्त्रोत हैं राजस्थान को सर्वाधिक सतही जल चंबल नदी से ही प्राप्त होता है यह चित्तौड़गढ़ ,कोटा ,बूंदी ,सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर जिले से प्रवाहित होती है

चंबल नदी की सहायक नदियां

चंबल नदी सर्वाधिक सहायक नदियों वाली नदी है यह दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर बहने वाली राजस्थान की सबसे प्रमुख व एकमात्र नदी है इसकी प्रमुख सहायक नदियां बामणी ,मेज, मांगली, कूनो, बनास, कालीसिंध, छोटी काली सिंध, पर्वती, निमाज आदि प्रमुख सहायक नदियां हैं

बनास नदी

उद्गम स्थल : राजसमंद जिले में कुंभलगढ़ तहसील की अरावली पर्वत की खमनोर की पहाड़ियों से निकलती है कुल लंबाई 480 किलोमीटर है राजसमंद चित्तौड़गढ़ भीलवाड़ा अजमेर रोड तथा सवाई माधोपुर जिले में बहती हुई सवाई माधोपुर जिले के खंडार तहसील के रामेश्वरम नामक स्थान पर चंबल नदी में मिल जाती है पूर्ण रूप से राजस्थान में बहने वाली राजस्थान की सबसे लंबी नदी है बनास नदी टोंक जिले में सर्पाकार हो जाती है
बनास नदी के उपनाम वशिष्टि वन की आशा

त्रिवेणी संगम : बीगोद और मांडलगढ़ भीलवाड़ा के बीच बनास बेडच मेनाल नदियों का संगम होता है

कोठारी नदी

उद्गम स्थल : दिवेर की पहाड़ियां राजसमंद

इस नदी का समापन भीलवाड़ा जिले में बनास नदी में मिल जाने से होता है इस पर मेजा बांध बनाकर भीलवाड़ा जिले की पेयजल समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है

बेडच नदी

उद्गम स्थल : गोगुंदा की पहाड़ियां उदयपुर

अपने उद्गम स्थल से उदय सागर झील तक यह नदी आयड नदी के उपनाम से जानी जाती है उदयपुर शहर में यह उदयसागर झील में गिर जाती है उदय सागर से निकलने के बाद यह बेडच नदी के नाम से जानी जाती है यह नदी भीलवाड़ा में बहने के बाद मांडलगढ़ के निकट बीगोद नामक स्थान पर बनास में मिल जाती है बेडच नदी के किनारे प्राचीन आहट तांबर युगीन सभ्यता मिली है

कालीसिंध नदी

उद्गम स्थल : मध्य प्रदेश राज्य के देवास जिले के बागली गांव से

राजस्थान में प्रवेश झालावाड़ जिले से होता है और समापन कोटा के नौनेरा स्थान पर चंबल नदी में मिल जाने से होता है यह नदी राज्य में झालावाड़ कोटा और बारा की सीमा बनाती है

कालीसिंध की सहायक : नदियां आहू निवाज रेवा पीपलाज परवन आदि प्रमुख है

पार्वती नदी

उद्गम स्थल : मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत सीहोर की पहाड़ियों से

पार्वती नदी पर धौलपुर जिले में पार्वती बांध का निर्माण किया गया है जो कि धौलपुर जिले को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा है पार्वती नदी का राजस्थान में प्रवेश करियाहट बारा जिले से होता है और इसका समापन स्थल कोटा जिले में चंबल नदी में मिल जाती है

बाणगंगा नदी

उद्गम स्थल : जयपुर जिले की बेराठ की पहाड़ियों से

बाणगंगा नदी कभी-कभी आंतरिक प्रवाह प्रणाली का उदाहरण पेश करती है क्योंकि इसका पानी भी यमुना तक नहीं पहुंच कर भरतपुर के आसपास के मैदानों में फैल जाता है बाणगंगा चंबल की रुंडीत नदी है बाणगंगा नदी जयपुर दोसा और भरतपुर जिले में प्रवाहित होती है इस नदी के उपनाम अर्जुन की गंगा और ताला नदी है
बाणगंगा नदी का समापन आगरा के फतेहाबाद नामक स्थान पर यमुना नदी में मिल जाने से होता है इस नदी पर जमवारामगढ़ जयपुर में रामगढ़ बांध बनाया गया है जिसे जयपुर को पेयजल आपूर्ति होती है

मानसी नदी

उद्गम स्थल : भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ तहसील से

यह नदी भीलवाड़ा अजमेर तथा टोंक जिले में प्रवाहित होती है टोंक जिले के देवली नामक स्थान पर बनास नदी में मिल जाती है

गंभीरी नदी

इस नदी पर निंबाहेड़ा चितौड़गढ़ में गंभीरी बांध का निर्माण किया गया है मिट्टी से निर्मित बांध है इस नदी का समापन चितौड़गढ़ के चटियावाली नामक स्थान पर बेडच नदी में मिलने से होता है

अरब सागर की तरफ जल ले जाने वाली नदियां

यह नदियां सामान्यत है अरावली के दक्षिण पश्चिम में बहती हुई अपना जल अरब सागर में ले जाती है अरब सागर की तरफ जल ले जाने वाली माही, लूणी, साबरमती, पश्चिमी बनास प्रमुख नदियां

माही नदी

उद्गम स्थल : माही नदी का उद्गम मध्यप्रदेश में धार जिले के सरदारपूरा के निकट विंध्याचल में मेहद झील से होता है

माही नदी राजस्थान में खंडू ग्राम बांसवाड़ा के निकट से प्रवेश करती है यह नदी 3 राज्यों मध्य प्रदेश राजस्थान और गुजरात में बहती है गुजरात में खंभात की खाड़ी में गिरती है यह नदी राजस्थान से गुजरात में पंचमहल जिले में रामपुर के पास प्रवेश करती है

उपनाम : वागड़ एवं कांठल की गंगा, दक्षिण राजस्थान की स्वर्ण रेखा, उल्टे यू आकार में बहने वाली नदी, आदिवासियों की गंगा

त्रिवेणी संगम : यह नदी डूंगरपुर जिले के बेणेश्वर नामक स्थान पर सोम और जाखम नदी के साथ मिलकर त्रिवेणी संगम बनाती है जहां माघ पूर्णिमा को मेला लगता है इसे आदिवासियों का कुंभ या धाम के नाम से भी जाना जाता है

यह एकमात्र ऐसी नदी है जिसका प्रवेश एवं निकास दोनों ही दक्षिण दिशा में होते हैं इस नदी की कुल लंबाई 576 किलोमीटर है जबकि राजस्थान में इसकी लंबाई 171 किलोमीटर है बांसवाड़ा डूंगरपुर और प्रतापगढ़ में बहने वाली यह नदी डूंगरपुर और बांसवाड़ा के मध्य प्राकृतिक सीमा का निर्धारण भी करती है यह नदी दक्षिण राजस्थान में मध्य माही का मैदान बनाती है जिसे छप्पन का मैदान कहते हैं यह नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है इस नदी पर राज्य में दो और गुजरात में एक बांध बनाया गया है

माही की सहायक नदियां : सोम, जाखम, मोरल, चाप

लूनी नदी

उद्गम स्थल : नाग पहाड़ आनासागर अजमेर

बालोतरा बाड़मेर तक लूनी नदी का जल मीठा है इसके बाद खारा हो जाता है पुष्कर के पास इस नदी को साक्री कहा जाता है यह नदी अजमेर नागौर जोधपुर पाली बाड़मेर जालौर जिले में बहती है लूनी नदी की कुल लंबाई 350 किलोमीटर है यह नदी कच्छ का रण गुजरात में विलुप्त हो जाती है लूनी नदी के समस्त अपवाह क्षेत्र में लगभग 10.50% भूभाग आता है महाकवि कालिदास ने लूनी नदी को अंतः सलिला कहा यह नदी अरावली के पश्चिम में बहने वाली सबसे प्रमुख नदी है यह नदी पश्चिमी राजस्थान की सबसे लंबी नदी है

उपनाम : आधी मीठी आधी खारी नदी, मारवाड़ की जीवन रेखा, लवणवति तथा मरुस्थल की गंगा

लूनी की सहायक नदियां : जवाई, सुकड़ी, मीठड़ी, लीलड़ी, जोजड़ी, बांडी

साबरमती नदी

उद्गम स्थल : उदयपुर जिले की कोटडी गांव की दक्षिण-पश्चिम अरावली पहाड़ियों से

इस नदी का समापन खंभात की खाड़ी में होता है गुजरात के गांधीनगर एवं अहमदाबाद नगर इसी नदी के तट पर बसे हुए हैं उदयपुर की जिलो में साबरमती नदी का पानी डालने के लिए बनाई जा रही देवास सुरंग का खुदाई का कार्य 2011 में पूर्ण हुआ है राजस्थान की यह सबसे बड़ी सुरंग 11.5 किमी लंबी है राजस्थान से होकर गुजरात जाने वाली साबरमती नदी पर देवास प्रथम और देवास द्वितीय नामक बांध बनाए गए हैं इन बांधों का पानी सुरंग के जरिए उदयपुर की जिलों में पहुंचेगा

साबरमती की सहायक नदियां: हाथमती वाकड़ और जाजम

पश्चिमी बनास नदी

उद्गम स्थल: सिरोही जिले के नया सांवरा गांव की पहाड़ियों से

पश्चिमी बनास नदी का समापन कच्छ की खाड़ी में होता है सीपू नदी यह पश्चिमी बनास की सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदी है आबूरोड सिरोही एवं गुजरात का दीसा नगर इसके किनारे पर स्थित है

आंतरिक जल प्रवाह वाली नदियां

यह नदियां अपना दल किसी समुंदर में नहीं ले जा पाती और ना ही इन नदियों की कोई सहायक नदियां होती है तथा यह राज्य के ही कुछ भागों में प्रवाहित होते हुए विलीन या विलुप्त हो जाती है आंतरिक प्रवाह की नदियां राज्य की कुल नदियों का लगभग 60% है

घग्गर नदी

उद्गम स्थल कालका के समीप हिमालय की शिवालिक पहाड़ियां
घग्गर नदी वैदिक संस्कृति की सरस्वती नदी के पेटे में बहती है यह राजस्थान में अंतर परवाह की सबसे लंबी नदी है सरस्वती नदी का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है इसे पंजाब में चिटांग कहते हैं किसी समय यह नदी जब उफान पर होती थी तो तलवाड़ा, अनूपगढ़ और सूरतगढ़ होती हुई भारत पाकिस्तान सीमा को पार करके फोर्ट अब्बास पाकिस्तान तक चली जाती थी वहां यह हकरा नाम से जानी जाती थी वर्तमान में यह नदी हनुमानगढ़ से कुछ ही आगे तक पहुंच पाती है घग्गर नदी को नाली कहा जाता है सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख केंद्र इसी नदी के किनारे पर स्थित है

काकनी नदी

उद्गम स्थल: कोटरी जैसलमेर
इस नदी का उपनाम मसूरदी काकनेय है बुझ झील जैसलमेर इस नदी का निर्माण करती है

कतली नदी

उद्गम स्थल: खंडेला की पहाड़ियां सीकर
काली नदी का बहाव क्षेत्र तोरावाटी कहलाता है यह नदी चूरू और झुंझुनू की सीमा पर विलुप्त हो जाती है यह नदी झुंझुनू को दो भागों में बांटती है सीकर जिले में स्थित गणेश्वर की सभ्यता का विकास इसी नदी के तट पर ही हुआ था

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