Friday, 1 February 2019

राजस्थान के लोक देवता गोगाजी | Goga Medi Rajasthan

यह Rpsc Rajasthan GK (Raj GK ) याद करने का सबसे आसान तरीका है इस पोस्ट से आप राजस्थान के लोक देवता गोगाजी | Goga Medi Rajasthan, गोगाजी का युद्ध, गोगाजी की मृत्यु कैसे हुई, गोगाजी समाधी स्थल गोगामेडी को Step by Step आसानी से पढ़कर याद कर सकते हैं 

राजस्थान के लोक देवता गोगाजी


गोगाजी का जन्म भाद्र मास की नवमी तिथि ( श्रीकृष्ण जन्माष्टी के दूसरे दिन ) को चूरू जिले के ददरेवा गाँव में हुआ था । इस दिन का नाम ' गुगो ' रखा गया ।
गोगाजी के पिता का नाम जेवर व माता का नाम बाछल था । वीर गोगाजी महमूद गजनवी के समकालीन थे ।
राजस्थान के पाँच पीरों में गोगाजी का महत्वपूर्ण स्थान है । गोगाजी को जाहरपीर (जिंदा पीर) के नाम से भी पूजा जाता है । गोगाजी को सांपों के देवता के रूप में पूजा जाता है ।
राजस्थान का किसान वर्षा के बाद हल जोतने से पहले गोगाजी के नाम की राखी ' गोगा रांखडी' हल और हाली, दोनों को बांधता है । गोगाजी के ' थान ' खेजड़ी के वृक्ष के नीचे होते है, जहाँ मूर्ति स्वरूप एक पत्थर पर सर्प की आकृति अंकित होती है ।
गोगाजी की घोडी का रंग नीला था ।
सांचौर (जालौर) में गोगाजी का मंदिर है, जिसे गोगाजी की ओल्डी कहा जाता है ।
इनकी स्मृति में भाद्रपद कृष्ण नवमी (गोगा नवमी) को गोगामेडी (नोहर, हनुमानगढ) में गोगाजी का मेला भरता है ।
राजस्थान के लोक देवता गोगाजी
राजस्थान के लोक देवता गोगाजी

 लोक देवता गोगाजी का विवाह 

  • गोगाजी की पत्नी का नाम कैलमदे (मेनल) था ।
  • कैलमदे बूडोजी की लड़की व कोलूमंड की राजकुमारी थी,
  • लेकिन विवाह से पूर्व कैलमदे को सांप ने डंस लिया, तब गोगाजी ने मंत्र पढे व नाग कढाई में आकर मरने लगा तब स्वयं नाग देवता प्रकट हुये और कैलमदे के जहर को निकाला तथा गोगाजी को नागों का देवता होने का वरदान दे गये इसलिए सर्प दंश हेतु गोगाजी का आहवान किया जाता है ।

गोगाजी का युद्ध

  • कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार गोगाजी ने अपने 47 पुत्रों के साथ सतलज नदी पार करते हुए महमूद गजनवी से युद्ध किया था ।
  • गोगाजी महमूद गजनवी के साथ युद्ध करते हुए अपने 47 पुत्र और 60 भतीजों के साथ सारे परिवार ने प्राणों की आहुति दी ।
  • गोगामेडी (धूरमेडी) यहॉ वीर गोगाजी का शरीर युद्ध करते हुए गिरा था यहाँ आज भी इनकी समाधि स्थित है ।
  • यह स्थान राजस्थान के हनुमानगढ जिले के नोहर तहसील में है ।
  • यहाँ पर प्रसिद्ध ' गोरख तालाब ' भी स्थित है । गोगाजी ने 11 बार मुस्लमानों से युद्ध किये ।
  • कायम सिंह गोगाजी के 17वीं पीढ़ी का शासक, इसे बलपूर्वक मुस्लमान बनाया गया ।
  • वीर गोगाजी के रणकौशल को देखकर महमूद गजनवी ने कहा यह तो जाहर पीर है अर्थात् ' साक्षात् देवता के समान प्रकट होता है
  • केसरिया बाना युद्ध मे जाते समय पहने जाने वाला पीले रग के वस्त्र का जोडा, इसे पहनकर आज भी हजारों गोगाजी के भक्त गोगामेडी जाते है

 लोक देवता गोगाजी समाधी स्थल गोगामेडी, राजस्थान

  • यह स्थान राजस्थान के हनुमानगढ जिले के नोहर तहसील में है
  • हिन्दू-मुस्लिम एकता एवं संस्कृतियों के आपसी -समन्वय की दृष्टि से गोगाजी का विशेष महत्व है । 
  • ददरेवा (चूरू) में स्थित गोगाजी की मेडी को सिद्धमेडी कहा जाता है ।
  • गोगाजी के मंदिर को फिरोज शाह ने मस्जिद का रूप दिया ।
  • उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय गोगाजी को (जाहर पीर) के रूप में पूजते है ।
  • गोगाजी (गुगो) के प्रचलित नाम का शाब्दिक अर्थ है गुगो का प्रथम अक्षर गु-गुरू का तथा गो अक्षर गोरखनाथ का द्योतक है
  • गोगाजी की घोडी नीली घोडी जिसे ' गोगा बापा ' कहते है ।
  • गोगामेडी के चारों तरफ जंगल को , जो गोगाजी की 'मणी रोपण' एवं ' जोड ' के नाम से पुकारा जाता है ।
  • गोगाजी की ओल्डी (झोपड़ी) सांचौर इसकी स्थापना
  • पाटम के दो भाईयों के द्वारा की गई तथा केरियाँ गाँव के राजाराम कुम्हार ने यहाँ मंदिर का निर्माण किया ।
  • गोगाजी के भोपे डेरू वाद्ययन्त्र का प्रयोग करते है ।
  • गोगामेडी में भाद्रपद मास में हिन्दु पुजारी पूजा करते है तथा अन्य महीनों में मुस्लिम पुजारी पूजा करते है ।
  • मुस्लिम पुजारी क्रो चायल कहा जाता है ।

गोगाजी के बारे में अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • गोगाजी गायों की रक्षार्थ वीरगति को प्राप्त हुये ।
  • इनकी जन्म स्थली ददरेवा (चूरू) के तालाब की मिट्टी का लेप करने से सांप का जहर उतर जाता है ।
  • गोगाजी की मूर्ति गाँव में खेजड़ी वृक्ष के नीचे मिलती है,
  • इसलिए राजस्थान में यह कहावत प्रसिद्ध है गाँव-गाँव खेजड़ी ने , गाँव-गाँव गोगाजी ।
  • गोगामेडी के बारे में मान्यता है कि धरती मे समा जाने के बाद गोगाजी यहाँ प्रकट हुए थे ।
  • गोगाजी के उपासक नगाड़ा या ढोल बजाकर नाचते है ।
  • नाचने वाले अपने सिर और पीठ पर लोहे की मोटी जंजीर भी मारते है ।
  • घरों में गोगाजी की पूजा के समय मिट्टी का घोडा बनाया जाता है 
  • गोगाजी के जन्म स्थल ददरेवा को शीर्ष मेडी तथा समाधि स्थल को ' गोगामेडी ' (नोहर-हनुमानगढ) को ' धुरमेडी ' भी कहते है ।
  • गोगामेडी स्थित मेडी का निर्माण फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था ।
  • गोगामेडी के द्वार पर बिस्मिल्लाह अंकित है ।
  • इस मेडी को वर्तमान स्वरूप महाराजा गंगासिंह ने दिया था । गोगामेडी की बनावट मकबरेनुमा है ।
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