Monday, 14 October 2019

Mughal Prashasan in Hindi - मुगलकालीन प्रशासन

मुगल काल में वजीर को वकील भी कहा जाता था बाबर का वजीर निजामुद्दीन खलीफा था हिमायू का प्रधान-मंत्री हिंदू बैग था शाहजहां ने वजीर पद को समाप्त कर दिया था
विजारत = मंत्री परिषद
वजीर = प्रधानमंत्री
दीवान - वित्त विभाग का प्रमुख

Mughal Prashasan in Hindi - मुगलकालीन प्रशासन

Mughal Prashasan in Hindi - मुगलकालीन प्रशासन
Mughal Prashasan in Hindi - मुगलकालीन प्रशासन


  • दीवान पद का सृजन अकबर ने अपने राज्य रोहन के 8 वें वर्ष अर्थार्थ 1564 में किया था इस पद पर पहली नियुक्ति मुजफ्फर खान को दी गई यह मुगल काल का प्रथम दीवान मुजफ्फर खान था अकबर के काल का प्रसिद्ध दीवान टोडरमल था जहांगीर के काल में मिर्जा ग्यास बेग दीवान था औरंगजेब के काल में असद खान दीवान था असद खान मुगल काल में सर्वाधिक लंबे समय तक दीवान पद पर रहा था
  • मीर बख्शी - सैनिक विभाग का प्रमुख मनसबदारी व्यवस्था का संचालन करता
  • खानसामा - दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने वाला अधिकारी
  • सदर उल सदूर - धर्म और दान विभाग का प्रमुख अकबर ने इस पद पर सर्वप्रथम शेख गदाई को नियुक्त किया था अकबर ने अब्दुल नबी नामक सदर को भ्रष्टाचार के कारण पद से हटा दिया था
  • काजी उल कुजात - न्याय विभाग का प्रमुख
  • दरोगा ए डाक चौकी - गुप्त विभाग का प्रमुख
  • मीर ए आतिश - तोपखाने विभाग का प्रमुख
  • मीर ए बहर - जल सेना विभाग का प्रमुख
  • मीर ए अर्ज - बादशाहा तक जनता के आवेदन पहुंचाने वाला

प्रांतीय शासन


  • मुगल काल में प्रांतों को सुबा कहा जाता था सूबे के प्रमुख को सूबेदार कहा जाता था आइन ए अकबरी के अनुसार अकबर के काल में सूबे की संख्या 12 थी जहांगीर के काल में संख्या 15 हो गई शाहजहां के काल में संख्या बढ़कर 18 हो गई तथा औरंगजेब के काल में 21 हो गई

सैन्य संगठन


  • अहदी - बादशाह के निजी सैनिक जो बादशाह के नियंत्रण में रहते थे
  • दाखिला - बादशाह के सैनिक जो मनसबदारी के नियंत्रण में रहते थे
  • एहसाम - अस्त्र-शस्त्र और युद्ध संचालन के लिए पूर्व सैनिकों को कहा जाता था
  • सेहबंदी - युद्ध संचालन में निपुण न होने के कारण भू राजस्व की वसूली करने में सहयोग करने वाले सैनिको को कहा जाता था
  • मुगल काल में भारी तोपों को जिंसी और हल्की तोपों को दस्ती कहा जाता था अकबर ने 1575 में मनसबदारी व्यवस्था को लागू किया था मनसब शब्द का अर्थ पद-प्रतिष्ठा या रेक होता है 
  • अबुल फजल के अनुसार मन सरदारों की 33 श्रेणियां की सबसे छोटा 10 और सबसे बड़ा 10000 का था लेकिन अकबर ने अपवाद स्वरुप शहजादा सलीम को 12000 का मनसब प्रदान किया था 5000 से ऊपर के मनसब केवल शहजादों को ही दिए जाते थे केवल मानसिंह और मिर्जा अजीज कोका को गैर शहजादे होते हुए भी 7000 का मंत्र प्रदान किया गया था जहांगीर ने मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत अस्पा और दो अस्पा का नियम लागू किया था
  • शाहजहां ने मनसबदारी व्यवस्था में मशरूफ मनसबदारी प्रथा को लागू किया था उपस्थित रहने वाली मनसबदारी को हाजिर रकाब तथा प्रांतों में नियुक्त मनसबदार को तनातिया कहा जाता था

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