आमेर की शिला माता | Amer Shila Devi History in Hindi

शिलादेवी जयपुर के कछवाहा राजवंश की कुलदेवी है । आमेर राज्य के शासक मानसिंह प्रथम ने बंगाल विजय के पश्चात इस देवी की प्रतिमा को प्रतिस्थापित किया ।

आमेर की शिला माता

Amer Shila Devi History in Hindi
Amer Shila Devi History in Hindi

  • शिलादेवी के मंदिर में जल व मदिरा के रूप में भक्तों को चरणामृत दिया जाता है ।
  • शिलादेवी की प्रतिमा अष्टभुजी है । भगवती महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति के ऊपरी हिस्से पर पंचदेवों की प्रतिमाएं उत्कीर्ण है । शिलादेवी का प्रमुख स्थान आमेर (जयपुर) में है ।
  • इस देवी का मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित है जो स्थापत्य कला की उत्कृष्ट कृति है ।
  • मानसिंह द्वितीय ने शिलादेवी के मंदिर में चाँदी के किवाड़ भेंट किये । शिला देवी के बाई और अष्ट धातु की हिंगलाज माता की मूर्ति प्रतिष्ठित है ।
  • शिला के रूप में मिलने कारण शिला देवी के रूप में प्रसिद्ध है।
  • यह मूर्ति चमत्कारी मानी जाती है। 
  • यह मूर्ति कछवाहा राजाओं से पूर्व आमेर में शासन कर रहे मीणा राजाओं द्वारा बलूचिस्तान से लाई गयी थी ।
  • आमेर शिला माता के गुजियां व नारियल का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
  • यहां वर्ष में दो बार चैत्र और आश्विन के नवरात्र में मेला लगता है।
  • यहां भैरव जी का भी मन्दिर है। माता के दर्शन के बाद भैरव मन्दिर में दर्शन करना जरूरी माना जाता है। 
  • शिला देवी मंदिर, हिंदूओं की देवी काली को समर्पित है
  • राजा मान सिंह काली माता के भक्‍त थे।
  • किंवदंतियों के अनुसार मंदिर में 1972 तक पशु बलि दी जाती थी, लेकिन जैन धर्मावलंबियों के विरोध के चलते यह बंद कर दी गई।
  • इस मंदिर में शिला देवी की मूर्ति के बारे में कई तरह की कथाएं प्रचलित हैं।
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