bharat ki nadiya - भारत की प्रमुख नदियाँ

bharat ki nadiya - इस पोस्ट में हम भारत की प्रमुख नदियाँ notes, trick, PDF के बारे में जानकारी प्राप्त करेगे भारत की प्रमुख नदियाँ टॉपिक आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे- RPSC, Bank, SSC, Railway, RRB, UPSC आदि में सहायक होगा।

bharat ki nadiya - भारत की प्रमुख नदियाँ 


कृषि क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली निश्चित जलवाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जलप्रवाह के जाल को अपवाह तंत्र कहते हैं। भारत के कुल अपवाह क्षेत्र का लगभग 77% भाग गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, कृष्णा आदि नदियों के अन्तर्गत आता है जबकि 23% क्षेत्र सिन्धु, नर्मदा, ताप्ती, माही, पेरियार नदियों के अन्तर्गत आता है।
bharat ki nadiya - भारत की प्रमुख नदियाँ


हिमालयीय नदी प्रणाली


 हिमालय नदियाँ अलग-अलग तीन नदी प्रणालियों का निर्माण करती है सिन्धु नदी प्रणाली, गंगा नदी प्रणाली और ब्रह्मपुत्र नदी

सिंधु नदी (संस्कृत नाम-सिंधु)


उदगम   -   मानसरोवर झील के निकट से
समापन स्थल   - अरब सागर

  • लद्दाख जम्मू कश्मीर तथा पाकिस्तान में बहती है।
  • पंजाब की पाँच प्रसिद्ध नदियों सतलुज, व्यास, रावी, चिनाब तथा झेलम का सामूहिक जल सिंधु नदी की मुख्य धारा से मीठनकोट के पास मिलता है। इसकी कुल लम्बाई 2880 किमी. है।

झेलम नदी

उदगम   -   सिंधु तंत्र की नदी जो पीर पंजाल पर्वत की पदस्थली में स्थित बेरीनाग से
समापन स्थल  -चेनाब
  • झेलम बारामूला गार्ज से होती हुई मुजफ्फराबाद (पाक अधिकृत कश्मीर) में प्रवेश करती है।

चिनाब नदी

उद्गगम  - बारालाचा दरें में चन्द्रा और भागा नामक दो धाराओं से।
समापन स्थल - सिंधु नदी में मिल जाती है।  
  • यह सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
  • दुलहस्ती और सलाल परियोजना इसी नदी पर अवस्थित है। 

रावी नदी

उद्गम - हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में हिमालय से 
समापन स्थल - हिमाचल प्रदेश से बहती हुई कठुआ के निकट से यह नदी पाकिस्तान में चिनाब नदी में जाकर मिल जाती है।
  • वेदों में इस नदी का उल्लेख 'परुष्णी' और 'इरावती' नामों से हुआ है। 
  • इस नदी की कुल लम्बाई 720 किमी. है।
  • पाकिस्तान का लाहौर नगर इस नदी के पूर्वी तट पर बसा हुआ है तथा इसके पश्चिमी तट पर जहाँगीर का मकबरा स्थित है।

व्यास नदी

उद्गम - इसका उद्गम रोहतांग दर्रे (हिमाचल प्रदेश) में हिमालय की पहाड़ियों से। 
समापन स्थल - 470 किमी. प्रवाहित होने के बाद यह नदी पंजाब में सतलुज नदी में मिल जाती है। 
  • अ‌र्जिकी  / बिपाशा प्राचीनकाल में यह नदी इन नामों से जानी जाती थी।
  • हिन्दुओं के प्रसिद्ध ग्रंथ महाभारत की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास के नाम पर इस नदी का नाम 'व्यास' पड़ा।
  • मण्डी नगर इस नदी के तट पर स्थित है।     
  • सिंधु तंत्र की एकमात्र ऐसी नदी है जो भारत में उत्पन्न होकर भारत में ही समाप्त हो जाती है।
  • पोंग बाँध-यह व्यास नदी पर स्थित है।

सतलुज नदी

उद्गम -राकसताल/राक्षसताल झील से जो तिब्बत में कैलाश पर्वत के दक्षिण में स्थित मानसरोवर झील के निकट है।
समापन स्थल -पाकिस्तान के मुल्तान जिले की दक्षिणी सीमा पर चिनाब नदी में मिल जाती है।
प्रवाह क्षेत्र  -हिमाचल प्रदेश, पंजाब व पाकिस्तान।
भाखड़ा नांगल बाँध (पंजाब) -सतलुज नदी पर निर्मित नाथपा झाकरी परियोजना - सतलुज नदी पर निर्मित।
शातुद्री-वैदिक काल में इस नदी को इस नाम से भी जाना जाता था।
सतलुज -यमुना लिंक -इस नहर का निर्माण सतलुज और यमुना नदियों के मध्य किया जा रहा है।

गंगा नदी


उद्गम-हिमालय से भागीरथी के रूप में गंगोत्री हिमनद उत्तराखंड से
समापन स्थल -बंगाल की खाड़ी।
  • गंगा उत्तरी भारत के विशाल मैदानी इलाके से होकर बहती है।
  • यह भारत की सबसे लम्बी (2525 किमी.) एवं सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है।
  • देश में गंगा नदी का जलग्रहण क्षेत्र सर्वाधिक है। इस नदी का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 8.5 लाख वर्ग
  • किलोमीटर है।
  • यह देवप्रयाग के बाद गंगा कहलाती है।
  • धौली, पिंडार, मंदाकिनी, विष्णुगंगा आदि अलकनंदा की सहायक नदियाँ हैं। 
  • पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के फरक्का नामक स्थान से नीचे गंगा दो भागों भागीरथी हुगली और
  • पद्मा में विभाजित हो जाती है। दूसरी शाखा पद्मा नदी बांग्लादेश में प्रवेश करती है।
राज्य   - गंगा नदी उत्तराखंड (110 किमी.), उत्तर प्रदेश (1450 किमी.), बिहार (445 किमी.) और पश्चिम बंगाल (520 किमी.) में बहती है।

  • तट पर स्थित नगर -हरिद्वार, कानपुर, इलाहाबाद, पटना, भागलपुर और वाराणसी। 
  • पद्मा और ब्रह्मपुत्र मिलने के बाद यह मेघना नाम से जानी जाती है। गंगा (मेघना), सागर द्वीप के निकट
  • बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
  • बंगाल की खाड़ी के मिलन स्थल पर बनने वाले मुहाने को सुंदरवन के नाम से जाना जाता है, यह बंगाल टाईगर का गृहक्षेत्र है।
  • जो संसार का सबसे सुन्दर डेल्टा है।

दायें तट की सहायक नदियाँ -यमुना, सोन, पुनपुन तथा टोंस
बायें तट की सहायक नदियाँ -रामगंगा गोमती, घाघरा, कोसी।  
टिहरी बाँध परियोजना -भागीरथी नदी के तट पर उत्तराखंड में निर्मित

यमुना नदी


उद्गम   -    यमुनोत्री (उत्तराखंड) से
समापन स्थल   -    प्रयाग (इलाहाबाद) के निकट गंगा नदी में मिल जाती है।
  • यह पोंटा साहब के पास मैदान में उतरती है।
  • पश्चिमी हिमालय से निकल कर उत्तरप्रदेश एवं हरियाणा की सीमा के सहारे 95 मील प्रवाहित होकर उत्तरी सहारनपुर के मैदानी इलाके में पहुंचती है और दिल्ली, आगरा से होती हुई इलाहाबाद में गंगा नदी में मिल जाती है।
  • यह गंगा की सबसे पश्चिमी और सबसे लंबी सहायक नदी है।
  • इस नदी की कुल लम्बाई 1370 किमी. है।

सहायक नदियाँ- बेतवा, चम्बल, सिंध, बाणगंगा, केन।

गोमती नदी

उद्गम  उत्तरप्रदेश का पीलीभीत जनपद। 
समापन स्थल - गाजीपुर के पास गंगा में।
यह अवध के मैदान को सिंचित करती है।

बेतवा नदी

उद्गम - मध्यप्रदेश के रायसेन जनपद के कुमारा गाँव के निकट विंध्य पर्वतमाला से।
  • यह यमुना की सहायक नदी है।
  • सांची, ओरछा इसके प्रमुख तटवर्ती नगर हैं।
  • माताटीला बाँध तथा राजघाट बाँध इस नदी पर अवस्थित हैं।

केन नदी

उद्गम  - मध्यप्रदेश के सतना जनपद में कैमूर पहाड़ियाँ
समापन स्थल  - यह बाँदा (उत्तरप्रदेश) में यमुना नदी में मिलती है।
यह वर्षाकालीन नदी है।

शिप्रा नदी

उद्गम - मध्यप्रदेश के धार जिले की विंध्याचल पहाड़ियों से।
समापन स्थल - चम्बल नदी।
उज्जैन यहाँ प्रत्येक 12 वर्ष में कुम्भ के मेले का आयोजन होता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इसी नदी के तट पर स्थित है।

सोन नदी

उद्गम - मध्यप्रदेश के अमरकंटक पहाड़ी से।
समापन स्थल - यह रामनगर के पास दायीं ओर से गंगा में मिलती है।

गंडक (काली गंडक) नदी

उद्गम- नेपाल के मुस्तांग जिले में हिमालय के उत्तर में स्थित तिबतन पटेटू (नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित) से। दो धाराओं कालीगंडक और त्रिशूल गंगा के मिलने से।
समापन स्थल - पटना के निकट सोनपुर में गंगा नदी में मिल जाती है। नेपाल के पहाड़ी भागों में यह नदी शालिग्रामी और मैदानी भागों में नारायणी नाम से जानी जाती है।
यह भारत में चम्पारण (बिहार) से प्रवेश करती है। उत्तरप्रदेश तथा बिहार की सीमा को अलग करती है। 
यह नदी 425 किमी. लम्बी है।

घाघरा नदी (सरयू नदी)

उद्गम - मापचाचुंगो हिमनद से ।
समापन स्थल - छपरा (बिहार) के पास गंगा में।
  • नेपाल में मांचू तथा कर्नाली नाम से तथा उत्तरप्रदेश में सरयू या घाघरा नाम से जानी जाती है। 
  • यह प्राचीन एवं ऐतिहासिक नदियों में से एक है।
  • अयोध्या नगर इसी नदी पर अवस्थित है।
  • यह तिला, सेती व बेरी नामक सहायक नदियों का जल ग्रहण करती है।

दामोदर नदी

उद्गम  - झारखंड के पलामू जिले के चंदवा ग्राम के पास छोटा नागपुर पठार से। 
समापन स्थल - यह नदी कोलकाता में हुगली नदी में मिल जाती है।
दामोदर पनबिजली परियोजना - दामोदर नदी पर स्थित।
प्रवाह क्षेत्र - झारखंड पश्चिम बंगाल।
डामुडा झारखंड में इस नदी को इस नाम से जाना जाता है।
बराकर दामोदर की प्रमुख सहायक नदी।

कोसी नदी

उद्गम - कंचनजंघा (भारत एवं नेपाल में संयुक्त रूप से स्थित विश्व की तीसरी सर्वोच्च चोटी )। 
यह नेपाल तथा उत्तरी बिहार में बहने वाली एक बारहमासी नदी है।
इस नदी से प्रतिवर्ष बिहार में बाढ़ आने से होने वाली क्षति के कारण इसे बिहार का शोक कहा जाता है।
समापन स्थल - भागलपुर जिले (बिहार) के कारगोला की गंगा नदी में विलिन हो जाती है।

ब्रह्मपुत्र नदी

उद्गम - तिब्बत में कैलाश पर्वत के निकट जिमा यान्गजाँग झील।
  • आरम्भ में यह तिब्बत के पठारी इलाके में यालुंग सांगपो नाम से जानी जाती है।
  • नामचा बार्वा पर्वत के पास मुड़कर अरुणाचल प्रदेश में जाती है जहाँ इसे सियांग एवं विहांग कहते हैं।
  • असोम के डिब्रुगढ़ और लखीमपुर जिले के बीच नदी दो शाखाओं में विभक्त हो जाती है। 
  • असोम में ही इस नदी की दोनों शाखाएँ मिल कर माजुली द्वीप बनाती है जो दुनिया का सबसे बड़ा नदी -द्वीप है।
  • असोम में बोडो लोगों द्वारा इसे भुल्लम-बुधुर के नाम से पुकारा जाता है जिसका अर्थ होता है- “कल-कल की आवाज निकालना"।
  • इसके बाद यह बांग्लादेश में प्रवेश करती है जहाँ इसकी धारा कई भागों में बँट जाती है। एक शाखा गंगा की एक शाखा के साथ मिलकर मेघना बनाती है। सभी धाराएँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
प्रवाह क्षेत्र - तिब्बत- अरुणाचल प्रदेश-असोम-बांग्लादेश।


प्रायद्वीपीय नदियाँ

बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ

गोदावरी नदी


उद्गम- यह नासिक (महाराष्ट्र) से निकलती है।
समापन स्थल - बंगाल की खाड़ी।
लम्बाई व अपवाह - इसकी लम्बाई 1,465 किलोमीटर तथा जल ग्रहण क्षेत्र 3.13 लाख वर्ग किलोमीटर है। इस नदी के जल ग्रहण क्षेत्र का 49 प्रतिशत भाग महाराष्ट्र, 20 प्रतिशत भाग मध्य प्रदेश व उड़ीसा में तथा शेष भाग आंध्र प्रदेश में आता है।

  • यह भारत की सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है।

उपनाम - वृद्धा गंगा।
सहायक नदियाँ - पूर्णा, मंजरा, वेनगंगा, पेगंगा, वाधा, इन्द्रावती, सबरी।


कृष्णा (कृष्णावेनी) नदी

उद्गम- यह नदी महाबलेश्वर (मुम्बई, महाराष्ट्र) से निकलती है।
समापन स्थल - यह महाराष्ट्र-कर्नाटक आंध्रप्रदेश से बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इस नदी के कुल ग्रहण क्षेत्र का 27 प्रतिशत भाग महाराष्ट्र, 44 प्रतिशत भाग कर्नाटक तथा 29 प्रतिशत भाग आंध्र प्रदेश राज्य में पड़ता है। 
बंगाल की खाड़ी में गिरने से पूर्व विजयवाड़ा (आंध्रप्रदेश) के समीप कई शाखाओं में विभक्त होकर बड़े डेल्टा का निर्माण करती है।
लम्बाई - 1401 किमी.।
श्री शैलग - कृष्णा नदी पर अवस्थित बाँध
सहायक नदियाँ - तुंगभद्रा, कोयना, घटप्रभा, पंचगंगा, दूध गंगा, मालप्रभा, भीमा, मूसी। इसकी सहायक नदी तुंगभद्रा पर कर्नाटक में तुंगभद्रा बाँध का निर्माण किया गया है।

कावेरी नदी

उद्गम इसका उद्गम तालकवेरी (कर्नाटक) से।
समापन स्थल - यह कर्नाटक तथा उत्तरी तमिलनाडु में बहने के पश्चात् कुल्लूर के पास बंगाल की यह 81,155 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अपवाहित करती है।
लम्बाई 800 किमी.।
उपनाम -दक्षिण की गंगा।
सहायक नदियाँ -काबिनी, भवानी, हिमावती, अमरावती 
कृष्णाराज सागर, मेटूर - नदी पर स्थित बाँध

इसके जल बँटवारे के सम्बन्ध में केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु व पुडुचेरी में विवाद रहा, जिसके बारे में वर्ष 2007 में पंचाट द्वारा फैसला सुनाया गया।

महानदी

उद्गम - रायपुर (छत्तीसगढ़) (ज्ञातव्य है कि यह स्थान पूर्व में मध्यप्रदेश राज्य में स्थित था) की धमतरी तहसील में स्थित सिहावा नामक पर्वत श्रेणी से  
महानदी का प्रवाह दक्षिण से उत्तर की ओर है।
समापन स्थल - सिहावा से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। 
महानदी की लम्बाई 851 किमी. तथा जलग्रहण क्षेत्र लगभग 1.42 लाख वर्ग किलोमीटर है।
उपनाम - महानन्दा एवं नीलोत्पला, चित्रोत्पला। महानदी पर स्थित अन्य बाँध
अपवाह द्रोणी -  इस नदी की अपवाह द्रोणी का 53% भाग मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ तथा 47 प्रतिशत भाग उड़ीसा राज्य में विस्तृत हैं।
सहायक नदियाँब्रह्माणी, वैतरणी, पैरी, सोंदुर, शिवनाथ, हसदेव, अरपा, जोंक, तेल । 
कटक (ओडिशा) - महानदी के तट पर स्थित नगर।


अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ

 नर्मदा नदी


उद्गम - मध्यप्रदेश के विंध्याचल पर्वत श्रेणी की अमरकंटक पहाड़ी से।
समापन स्थल - गुजरात में भड़ौच के निकट खम्भात की खाड़ी।
अरब सागर में गिरने से पूर्व यह ऐश्चुअरी का निर्माण करती है।
लम्बाई - लगभग 1312 किमी.।
इसके अतिरिक्त इस नदी के घाघरी व हिरन प्रपात भी प्रसिद्ध हैं।
सरदार सरोवर बांध - इस नदी पर बना सरदार सरोवर बाँध गुजरात की जीवन रेखा कहलाता है।
महेश्वर बाँध, गाँधी सागर बाँध - इस नदी पर अवस्थित हैं।
सहायक नदियाँ- तवा, हथनी, देव, हिरण, इन्द्र ।

ताप्ती नदी

उद्गम- मध्यप्रदेश के बैतुल जिले के मुलताई नगर से
समापन स्थल - सूरत के निकट खम्भात की खाड़ी।
  • यह नदी नर्मदा नदी के समानान्तर एक भ्रंश घाटी में बहती है।
  • इस नदी की लम्बाई लगभग 724 किमी. है एवं यह लगभग 65,145  वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को   अपवाहित करती है।
  • इस नदी के अपवाह क्षेत्र का 79 प्रतिशत भाग महाराष्ट्र, 15 प्रतिशतभाग मध्य प्रदेश और 6 प्रतिशत भाग गुजरात राज्य में पड़ता है।
सहायक नदियाँ - पूर्णा, अनेर, वेघर आदि शामिल हैं। 

साबरमती नदी

उद्गम- राजस्थान की मेवाड़ पहाड़ियों से।
समापन स्थल - खम्भात की खाड़ी। 
यह राजस्थान एवं गुजरात में बहती है।
वाकुल, हाथमारी आदि इसकी सहायक नदियाँ हैं।

लूणी नदी


उद्गम- अरावली पर्वत के नाग पहाड़ से। 
समापन स्थल - कच्छ की खाड़ी।
मीठड़ी, बांडी और सुकड़ी इसकी सहायक नदियाँ हैं। 
बाड़मेर के बालोतरा में जाकर इसका पानी खारा हो जाता है।

माही नदी

उद्गम- मध्यप्रदेश के विन्ध्याचल पर्वत से
समापन स्थल - बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों को पार कर गुजरात में खम्भात की खाड़ी में जाकर गिरती है।

जल प्रपात


जोग / गरसोप्या/ महात्मा गाँधी जल प्रपात - महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा पर शरावती नदी पर स्थित है जो चार छोटे-छोटे प्रपातों राजा, राकेट, रोरर और दाम ब्लाचें आदि से मिलकर बना है। 
ज्ञातव्य है कि भारत के अधिकांश प्रपात दक्षिण भारत में पाये जाते हैं।
इसकी ऊँचाई 250 मीटर है।

शिवसमुद्रम जल प्रपात 

कावेरी नदी (कर्नाटक) पर स्थित इस प्रपात का निर्माण जल विद्युत उत्पादन में किया जाता है। 
यहाँ जल विद्युत केन्द्र स्थापित किया गया है।

पायकारा जल प्रपातनीलगिरि की पहाड़ियों में स्थित है। जल विद्युत उत्पादन हेतु प्रसिद्ध है।
गोकक जल प्रपातबेलगांव जिले में गोकक नदी पर स्थित है। इसकी ऊँचाई 54 मी. है।
येन्ना प्रपात -महाबलेश्वर के निकट स्थित है। इसकी ऊँचाई 180 मी. है।
बिहार जल प्रपातदक्षिणी टोंस नदी पर स्थित है।
चूलिया जल प्रपात -चम्बल नदी पर स्थित है। इसकी ऊँचाई 18 मी. है। 
धुआंधार जल प्रपात  - नर्मदा नदी में जबलपुर (मध्यप्रदेश) के निकट स्थित है।
मंधार और पुनासा जल प्रताप - नर्मदा नदी पर स्थित है।
पापानासम जल प्रपात - द. भारत (ताम्रपर्णी नदी ) । 
अन्य जल प्रपात- रांची में हुंडरू, इन्द्रावती पर मध्यप्रदेश में चित्रकूट, पूर्वी घाट को काटते हुए कावेरी पर होगेनकॉल आदि ।


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