Rajasthan ki Sinchai Pariyojana - राजस्थान की सिंचाई परियोजना PDF

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Rajasthan ki Sinchai Pariyojana

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राजस्थान की सिंचाई परियोजना


राजस्थान राज्य जल विकास निगम लिमिटेड - राज्य में उपलब्ध एवं संभावित जल संसाधनों के प्रभावपूर्ण उपयोग एवं विकास के उद्देश्य से 1984 मे स्थापित एक सीमित सार्वजनिक उपक्रम जिसका मुख्यालय जयपुर मे हैं


स्वजल धारा योजना 


देश के प्रत्येक गांव में पेयजल आपूर्ति के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु इस योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी द्वारा 25 दिसम्बर, 2002 को किया गया ।

राज्य की जल नीति 


जल संसाधनों का आवश्यकता के अनुरूप अनुकूलनतम उपयोग के लिए मंत्रिमंडल ने 19 सितम्बर, 1999 को राज्य की जल नीति को मंजूरी दी है। सतही जल, भू-जल तथा अनुपयोगी जल का अधिकतम सामाजिक आर्थिक उन्नति के लिए उपयोग करना इस जलनीति का उद्देश्य है । 

2010 में राज्य की नई जलनीति जारी की गई । नीति के अंतर्गत लिए गए संकल्पों को जन-जन तक पहुंचाने हेतु जल जागृति अभियान के माध्यम से प्रदेश में उपलब्ध बूंद-बूंद जल के सदुपयोग, बचत एवं संग्रह के प्रति प्रचार प्रसार के विविध साधनों से जाग्रत करना प्रस्तावित है ।

बहुउद्देशीय 


वह परियोजना, जिससे अनेक उद्देश्यों यथापेयजल विद्युत, सिंचाई एवं अन्य कार्यो हेतु जल उपलब्ध होता है जैसे - भाखड़ा नांगर, व्यास, चम्बल, माही बजाज सागर

वृहद् 


वह परियोजना, जिसमें कृषि योग्य कमाण्ड क्षेत्र  10 हजार हैक्टेयर से अधिक हों - इंदिरा गांधी नहर परियोजना, गंगनहर, राजीव गांधी सिद्धमुख - नोहर, सिद्धमुख रतनपुरा वितरिका, बीसलपुर, इसरदा बांध, नर्मदा नहर, जाखम, गुड़गांव नहर, भरतपुर नहर, यमुना जल सिंचाई परियोजना, भीखाभाई सागवाडा नहर

मध्यम 


यह परियोजना, जिसमें कृमि योग्य कमाण्ड क्षेत्र 2 हजार से अधिक तथा 10 हजार हेक्टेयर तक हो - भीमसागर, छापी, हरिश्चन्द्र सागर, बिलास, सावन-भादो, परवन लिफ्ट, गुढा, पांचना, सोम-कमला-अंबा, सोम कागदर, चौली, बैथली, बांदी सेंदडा, सूकली, गरदडा, इंदिरा लिफ्ट, पीपलदा लिफ्ट, जवाई बांध

लघु - वह परियोजना, जिसमे कृषि योग्य कमाण्ड क्षेत्र 2 हजार हेक्टेयर तक हो ।

राज्य में नहरों से सर्वाधिक सिंचाई क्रमश: इंदिरा गाँधी नहर परियोजना, भाखड़ा नहर, गंगनहर व चम्बल नहर से होती है

राज्य में सर्वाधिक सिंचाई क्रमश: गंगानगर व हनुमानगढ जिलों मे  तथा न्यूनतम डूंगरपुर व राजसमंद (राज्य के कूल सिंचित क्षेत्रफल के आधार) में होती है जबकि जिले के सिंचित क्षेत्र के प्रतिशत के आधार पर सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र क्रमश: गंगानगर (84.69 प्रतिशत) , बूंदी (61.06 प्रतिशत) व हनुमानगढ (60.39 प्रतिशत) में है तथा चूरू में सबसे कम सिंचित क्षेत्रफल ( 16.40 प्रतिशत) है

गंगनहर परियोजना


गंनगहर विश्व की सबसे पुरानी तथा विकसित नहर परियोजना है । सतलज का पानी राजस्थान में लाने के लिए 4 सितम्बर 1920 को पंजाब, बहावलपुर व बीकानेर रियासत के मध्य सतलज घाटी पर समझौता हुआ ।

इस नहर की आधारशिला महाराजा गंगासिंह के द्वारा फिरोजपुर हैडवर्क्स पर 5 सितम्बर 1921 को रखी गई गंगनहर का निर्माण बीकानेर के शासक महाराजा गंगा सिंह ने 1922 से 1927 के मध्य में करवाया ।

गंगनहर का उद्घाटन 26 अक्टूबर 1927 को वॉयसराय लार्ड इरविन द्वारा शिवपुर हैड ( फतुई-श्रीगंगनगर ) पर किया गया । 

गंगनहर को सतलज से फिरोजपुर के निकट हुसैनीवाला से निकाली गयी हैं जो पंजाब में बहने के पश्चात् राजस्थान में श्रीगंगानगर के खखवा नामक स्थान से प्रवेश करती है ।

इस नहर की कुल लम्बाई 129 किलोमीटर है ।
राजस्थान में इसकी लम्बाई 17 किलोमीटर हैं ।
पंजाब में इसकी लम्बाई 112 किलोमीटर है ।

गंगनहर की वितरिकाओं सहित कुल लम्बाई 1280 किलोमीटर है । गंगनहर की प्रमुख शाखाएं लक्ष्मीनारायण जी, लालगढ़, करणजी और समेजा है ।

इस नहर से मुख्यत: सिंचाई श्रीगंगानगर में होती है ।
गंगनहर के निर्माण के कारण ही महाराजा गंगासिंह को आधुनिक भारत व राजस्थान का भागीरथ कहा जाता है ।
गंगनहर के आधुनिकीकरण का कार्य केन्द्रीय जल आयोग के द्वारा 31 मई 2000 को प्रारंभ होकर वर्ष 2008 के अंत तक पूर्ण हो गया । गंगनहर के द्वारा श्रीगंगानगर के शुष्क भागों को फलों के उद्यान व खाद्यान भण्डार में बदल दिया गया है । 
गंगनहर को गंगानगर की जीवनदायिनी के उपनाम से जाना जाता है

भाखड़ा नांगल परियोजना


यह राजस्थान, पंजाब तथा हरियाणा राज्य की संयुक्त परियोजना है । यह कंक्रीट निर्मित गुरूत्व सीधा बांध है ।
इस बांध की आधारशिला 17 नवम्बर, 1955 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी तथा निर्माण अमरीकी बांध निर्माता हार्वे स्लोकेम के निर्देशन मे अक्टूबर, 1962 में पूर्ण हुआ ।

इस बांध को पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा 22 अक्टूबर, 1963 को राष्ट्रीय को समर्पित किया गया । श्री नेहरू ने इसे पुनरुत्थित भारत का नवीन मंदिर कहा था तथा इसे एक ऐसी चमत्कारी विराट वस्तु की संज्ञा दी थी । सतलज नदी पर स्थित इस परियोजना में राजस्थान का हिस्सा 15.22% है ।

इस योजना में मुख्यत: दो बांध पंजाब के होशियारपुर जिले में भाखडा स्थान पर 226 मीटर ऊँचा एक बांध तथा दूसरा भांखड़ा से 12 किमी दूर नांगल स्थान पर 29 मीटर ऊँचा नांगल बांध बनवाया गया ।

भांखडा खडे बांधों में विश्व का सबसे ऊँचा बांध हैं । इसमें सर्वाधिक लाभ हनुमानगढ़ जिले को उपलब्ध हो रहा है ।
इस परियोजना से विद्युत चूरू, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ, झुंझुनूं तथा सीकर जिलों के नगरों को प्राप्त हो रही है ।

बांध से निकाली गई नहरें


बिस्त दोआब नहर - यह नांगल बांध से नीचे सतलज नदी पर रोपड़ हैडवर्क्स से निकाली गई है जो पंजाब को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है।

भाखड़ा नहर - यह नांगल बांध से निकाली गई हैं, जो पंजाब, हरियाणा व राजस्थान को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है । भाखड़ा नहर प्रणाली का निर्माण 1954 में पूर्ण हुआ, तभी से राजस्थान को इससे पानी मिलने लगा

गुडगाँव नहर परियोजना


गुडगाँव नहर परियोजना का कार्य 1966 मे शुरू हुआ जो 1985 में वनकर तैयार हुई ।
यह नहर यमुना नदी से ओखला के पास से निकाली गई है । गुडगाँव नहर हरियाणा मे बहने के पश्चात राजस्थान में भरतपुर जिले की कामा तहसील के जुरेरा गांव से प्रवेश करती है
गुडगाँव नहर से भरतपुर जिले की कामा व डीग तहसीलों में सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध होगी ।
गुडगाँव नहर हरियाणा व राजस्थान की संयुक्त परियोजना हैं गुडगाँव नहर की राजस्थान में कुल लम्बाई 58 किमी है ।
इस नहर के निर्माण का प्रमुख लक्ष्य यमुना नदी के पानी का मानसून काल में उपयोग करना है ।
गुडगाँव नहर का नाम बदलकर पश्चिमी यमुना लिंक नहर परियोजना कर दिया गया ।
इस नहर से भरतपुर जिले को 33959 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है ।

भरतपुर नहर परियोजना


भरतपुर नहर परियोजना का निर्माण 1964 में करवाया गया । भरतपुर नहर को यमुना की आगरा नहर से निकाला गया है ।
उत्तरप्रदेश में बहने के पश्चात् राजस्थान में भरतपुर जिले से प्रवेश करती है ।
भरतपुर नहर की कुल लम्बाई 28 किमी. है जो उतरप्रदेश में 16 किमी तथा राजस्थान में 12 किलोमीटर लम्बी है ।
भरतपुर नहर से पूर्वी राजस्थान में सिंचाई की व्यवस्था की जा रही है

सिद्धमुख नहर परियोजना


सिद्धमुख नहर परियोजना को पूर्ण करने के लिए यूरोपियन आर्थिक समुदाय द्वारा आर्थिक सहायता करवाई जा रही हैं ।

यूरोपीयन आर्थिक समुदाय के आर्थिक सहयोग से 5 अक्टूबर 1989 को स्व. श्री राजीव गाँधी के द्वारा शिलान्यास किया गया ।

सिद्धमुख नहर परियोजना राजस्थान में हनुमानगढ जिले के भिराणी गाँव से प्रवेश करती हैं ।
सिद्धमुख नहर से हनुमानगढ की नोहर व भादरा तथा चूरू की राजगढ़ व तारानगर तहसील को सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाती हैं ।

इस नहर का लोकार्पण श्रीमती सोनिया गाँधी के द्वारा हनुमानगढ जिले की भादरा तहसील के भिरानी गांव में 12 जुलाई 2002 को किया गया ।
सिद्धमुख नहर परियोजना में रावी-व्यास के अतिरिक्त जल का उपयोग किया जाता है ।
इस नहर से राजस्थान को 0.47 एम ए एफ. जल का उपयोग यूरोपियन आर्थिक सहयोग से शूरू हुआ
सिद्धमुख़ नहर परियोजना को राजीव गाँधी नहर परियोजना के नाम से भी जाना जाता है ।

नर्मदा परियोजना


नर्मदा नहर गुजरात में सरदार सरोवर बांध से निकाली गई है ।
यह नहर परियोजना राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र की संयुक्त परियोजना है ।
नर्मदा नहर का जल जालौर जिले की सांचौर तहसील के सीलू गांव के समीप जीरो पांइन्ट तक 18 मार्च 2008 तक पहुंच क्या ।
27 मार्च 2008 को जालौर के सीलू गांव की लालपुर हैड में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जल प्रवाहित कर उद्घाटन किया ।
राजस्थान की यह प्रथम परियोजना है जिसमें सिंचाई केवल स्प्रिकलर ( फव्वारा ) सिंचाई पद्धति से ही करने का प्रावधान है ।
नर्मदा नहर परियोजना से राजस्थान के बाडमेर जिले के गुढामलानी ( बाडमेर ) तथा सांचौर ( जालौर ) को जल की व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाएगी ।
इस नहर से सर्वाधिक जल की व्यवस्था जालौर को उपलब्ध होती है ।
इस नहर की गुजरात में कुल लम्बाई 458 किमी. तथा राजस्थान मे 74 किमी. लम्बाई है ।
नर्मदा जल विवाद प्राधिकरण द्वारा नर्मदा जल में राजस्थान का हिस्सा 0.50 एम.ए.एफ. निर्धारित किया गया है ।
नर्मदा नहर परियोजना की कुल 12 वितरिकाएं है ।

इस परियोजना के तहत जालौर व बाडमेर जिले के 2.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है ।

इस नहर परियोजना में निम्न तीन लिफ्ट नहरों का निर्माण किया जा रहा है


1. सांचौर लिफ्ट नहर
2. भादरेड़ा लिफ्ट नहर
3. पनोरिया लिफ्ट नहर

इस नहर की प्रमुख वितरिकाएं बालेरा, वांक, रतौडा, कैरिया, गांधव, जैसला, मानकी, भीमगुडा है।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना


इंदिरा गांधी नहर की प्रारंभिक रूपरेखा इंजीनियर कंवरसेन ने बनाई थी ।
बीकानेर के तत्कालीन इजीनियर कंवरसेन ने 1948 में बीकानेर राज्य में जल की आपूर्ति हेतु एक रिपोर्ट प्रस्तुत की । जिसके अंतर्गत सतलज नदी पर 'हरिके बैराज' बनाकर उससे सिंचाई की व्यवस्था का सुझाव दिया गया था ।
भारत सरकार ने सतलज व व्यास नदी के संगम पर फिरोजपुर में 1952 में 'हरिके बैराज' का निर्माण किया गया ।
I.G.N.P. का शुभारंभ ( श्रीगणेश) 31 मार्च 1958 को तत्कालीन गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत के द्वारा किया गया ।
इंदिरा गांधी नहर (I.G.N.P). का निर्माता, इंजीनियर कंवरसेन को माना जाता है ।
I.G.N.P. को राजस्थान की मरू गंगा के नाम से जाना जाता है प्रारंभ में I.G.N.P को राजस्थान नहर के नाम से जाना जाता था
इंदिरा गांधी की मृत्यु के पश्चात 3 नवम्बर 1984 को इसका नाम इंदिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया ।
I.G.N.P. को सतलज व्यास के संगम हरिके बैराज से निकाला गया है जो कि पंजाब व हरियाणा में बहने के पश्चात राजस्थान हनुमानगढ के टिब्बी तहसील के खारा गांव से प्रवेश करती हैं

I.G.N.P. के दो भाग है राजस्थान फीडर व मुख्य नहर


इंदिरा गांधी नहर की कुल लम्बाई 649 किमी. है ।
राजस्थान फीडर की लम्बाई 204 किमी -पंजाब 150 किमी. , राजस्थान - 35 किमी. , हरियाणा - 19 किमी. ।
राजस्थान फीडर हरि के बैराज ( पंजाब ) से मसीतावली हैड ( हनुमानगढ ) तक है
मुख्य नहर की कुल लम्बाई 445 किमी. है ।

Note - इंदिरा गांधी का निर्माण कार्य दो चरणों में पूर्ण हुआ ।

प्रथम चरण


इस में 11 अक्टूबर 1961 को उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा नौरंगदेसर वितरिका से सर्वप्रथम जल प्रवाहित का उद्घाटन किया गया ।

प्रथम चरण मे 204 किलोमीटेर राजस्थान फीडर नहर तथा 189 किलोमीटर मुख्य नहर शामिल है
प्रथम चरण का कार्य 1958 से 1975 तक लगभग पूर्ण हो गया ।
इस चरण की शाखाएं अनूपगढ़, सूरतगढ़, पूगल ।
प्रथम चरण में कंवर सेन लिफ्ट नहर का निर्माण हुआ ।
वर्ष 1990-91 तक आईजीएनजी (प्रथम चरण) द्वारा 5.7 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन हुआ ।

द्वितीय चरण


द्वितीय चरण का निर्माण कार्य वर्ष 1972-73 में प्रारंभ हुआ ।
इस चरण का निर्माण कार्य 31 दिसम्बर 1986 तक पूरा हुआ
द्वितीय चरण में 1 जनवरी 1987 को तत्कालीन केन्द्रीय वित्तमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के द्वारा इसमें जल प्रवाहित किया गया ।
द्वितीय चरण में मुख्य नहर की लम्बाई 256 किलोमीटर है ।
इस चरण की शाखाएं रावतसर , दांतौर, बरसलपुर, चारणवाला, शहीद बीरबल, सागरमल गोपा

1998 में I.G.N.P. के द्वितीय चरण के अंतर्गत वनारोपण व चारागाह विकास कार्यक्रम जापान की आईसीएफ संस्था के सहयोग से चलाया गया 

नोट - इंदिरा गांधी नहर की उप-शाखाए निम्नलिखित हैं - लीलवा, दीघा, गडरारोड़ ।

गडरारोड़ को बरकतुल्ला खान व वर्तमान में बाबा रामदेव उपशाखा के नाम से भी जाना जाता है ।

I.G.N.P. के अन्य महत्वपूर्ण तथ्य 


I.G.N.P. का अंतिम छोर (बिन्दू) गडरा रोड ( बाडमेर ) है
इंदिरा गांधी नहर (I.G.N.P) की 9 शाखाएं निम्नलिखित है-रावतसर, अनुपगढ, सूरतगढ़, पूगल, दांतोर, बरसलपुर, चारणवाला, शहीद बीरबल सागरमल गोपा
I.G.N.P की सभी शाखांए ( 8 शाखांए ) दायीं तरफ निकाली गई है । अपवाद स्वरूप रावतसर शाखा बायीं तरफ निकाली गई है ।
I.G.N.P पर प्रमुख ऊर्जा उत्पादन केन्द्र निम्नलिखित हैं अनूपगढ, सूरतगढ़, बरसलपुर, चारणवाला व पूगल I.G.N.P के 2010 तक पूर्ण हो जाने पर राज्य के कुल 19.63 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होगी
इंदिरा गांधी नहर (I.G.N.P.) पाकिस्तान की सीमा के समानांतार 40 किमी की औसत दूरी पर स्थित है ।
I.G.N.P. से 7 लिफ्ट नहरें 9 शाखाए तथा 3 उप-शाखाए निकाली गई है ।
I.G.N.P से राजस्थान का उत्तर-पश्चिम क्षेत्र लाभान्वित हो रहा है ।
इंदिरा गांधी नहर (I.G.N.P) के जल से हुई सेम की समस्या को दूर करने के लिये जिप्सम का प्रयोग सर्वाधिक किया जाता है ।

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हनुमानगढ जिले में सेमग्रस्त क्षेत्रों के उपचार का कार्य नीदरलैण्ड ( हॉलैण्ड ) के आर्थिक सहयोग से किया जा रहा है ।
यह योजना इण्डो-डच-योजना के नाम से जानी जाती है ।
I.G.N.P से राजस्थान के लगभग 9 जिले श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाडमेर, जोधपुर, नागौर, झुंझुनूं, चूरू व हनुमानगढ लाभान्वित हो रहे है । 
झुंझुनूं जिले को इसमें केवल पेयजल की व्यवस्था उपलब्ध होती है ।
I.G.N.P का सर्वाधिक कमांड एरिया बीकानेर व जैसलमेर जिले का है ।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना का प्रमुख उद्देश्य रावी व व्यास नदियों के जिले से राजस्थान को आवंटित 8.6 एमएएफ पानी में से 7.59 एमएएफ पानी का उपयोग कर पश्चिमी राजस्थान में पानी की व्यवस्था उपलब्ध करवाना हैं ।
इंदिरा गांधी के निर्माण हेतु 1958 में अंतर्राज्यीय राजस्थान नहर बोर्ड का गठन किया गया ।
इस बोर्ड का प्रथम अध्यक्ष श्री कंवरसेन को बनाया गया

I.G.N.P से 7 लिफ्ट नहर निकाली गई है , जो कि निम्नलिखित हैं


प्राचीन नाम 
नये नाम
प्रभावित जिले
नोहर साहवा लिफ्ट नहर 
चौधरी कुम्भाराम आर्य लिफ्ट नहर
हनुमानगढ , चुरू, झुंझुनूं
लूणकरणसर लिफ्ट नहर 
कंवरसेन लिफ्ट नहर
बीकानेर, गंगानगर 
गजनेर लिफ्ट नहर 
पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर 
बीकानेर, नागौर
बांगडसर लिफ्ट नहर 
वीर तेजा जी लिफ्ट नहर
बीकानेर 
कोलायत लिफ्ट नहर 
डॉ. करणसिंह लिफ्ट नहर
बीकानेर, जोधपुर 
फ्लौदी लिफ्ट नहर 
गुरू जम्मेश्वर लिफ्ट नहर
जैसलमेर, जोधपुर
पोकरण लिफ्ट नहर 
जय नारायण व्यास लिफ्ट नहर
जैसलमेर 


I.G.N.P. की दो लिफ्ट नहरें 8 वीं व 9 वीं निर्माणाधीन है ।
I.G.N.P. की सबसे लम्बी लिफ्ट नहर कंवरसैन लिफ्ट नहर है ।
कंवरसेन लिफ्ट नहर को बीकानेर की जीवन रेखा के नाम से जाना जाता है ।
कंवरसेन लिफ्ट नहर की कुल लम्बाई 151.64 किलोमीटर है ।
आईजीएनजी की सबसे छोटी लिफ्ट नहर बांगडसर या वीर तेजाजी लिफ्ट नहर है ।
बाबा रामदेव व भैरूदान चालानी नामक दो लिफ्ट नहरें जैसलमेर में प्रस्तावित है ।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना मूलतः सिंचाई परियोजना है, किन्तु इस पर जल-विद्युत गृह भी स्थापित किए गए हैं । इसमें पूगल शाखा पर दो, सूरतगढ़ पर दो तथा चारणवाला योजना पर एक विद्युत गृह स्थापित किए जा रहे है ।

Rajasthan ki Sinchai Pariyojana PDF


Name of The Book : *Rajasthan ki Sinchai Pariyojana PDF in Hindi*
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PDF Quality: Normal
PDF Size: 1 MB
Book Credit: S. R. Khand
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