Sunday, 28 July 2019

जैनों के प्रमुख त्यौहार | List of Jain Festivals in Hindi


जैनों के प्रमुख त्यौहार | List of Jain Festivals in Hindi

ऋषभदेव जयन्ती 

  • ऋषभदेव जी जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर थे । 
  • इनके जन्मदिवस के रूप में चैत्र कृष्ण अष्टमी को इम त्यौहार को मनाया जाता है । 
  • जैन धर्म के 23वें तीर्थकर पार्श्वनाथ जी तथा 24वें तीर्थंकर महावीर जी थे । 

महावीर जयन्ती (चैत्र शुक्ल-13) 


  • महावीर जी के जन्म दिवस के रूप में इस त्यौहार को मनाया जाता है ।
  • इस दिन करौली में महावीर जी का मेला लगता है । 

पर्युषण पर्व 

  • जैन धर्म में पर्युषण पर्व महापर्व कहलाता है । 
  • पर्युषण का शाब्दिक अर्थ है निकट बसना । 
  • दिगम्बर परम्परा में इस पर्व का नाम दशलक्षण के साथ जुड़ हुआ है । जिसका प्रारंभ भाद्र शुक्ल पंचमी से होता है और समापन चतुर्दशी को होता है । 
  • श्वेवेताम्बर परम्परा मे इस पर्व का प्रारम्भ भाद्र कृष्ण बारस से होता है व समापन भाद्र शुक्ल पंचमी को होता है अंतिम दिन संवत्सर पर्व मनाया जाता है । 
  • इसके दूसरे दिन अर्थात् आश्विन कृष्णा एकम को क्षमापणी पर्व मनाया जाता है तथा जैन समाज के सभी लोग आपस में अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करते है ।

दशलक्षण पर्व 

  • यह पर्व प्रत्येक वर्ष चैत्र, भाद्रपद व माघ माह की शुक्ल पंचमी से पूर्णिमा तक दिगम्बर जैनों में यह पर्व मनाया जाता है । 
  • यह पर्व किसी व्यक्ति से सबंधित न होकर आत्मा के गुणों से सबंधित है । 

सोहल कारण

  • भाद्र कृष्णा प्रतिपदा से प्रारंभ होकर आश्विन कृष्णा तक सोलह कारण का उत्सव मनाया जाता है । 
  • इन दिनों सोलह भावनाओं-दर्शन का अनुचितंन किया जाता है ।
  • इनके स्वरूप का अध्ययन अथवा श्रावण करके व्रत, उपवास आदि किसे जाते है । 

रत्नत्रय

  • भाद्र शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णमासी तक रत्नत्रय का त्यौहार मनाया जाता है । 
  • इन तीन दिनों में सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र के स्वरूप पर प्रकाश डाला जाता है । 

रोट तीज 

  • भाद्र शुक्ल तृतीय को जैन मतानुयायी रोट तीज का पर्व मनाते है । 
  • इसमें खीर व रोट बनाई जाती है ।  

सुगंध दशमी पर्व

  • भाद्रशुक्ल दशमी को जैन मंदिरों में सुगन्धित द्रव्यों द्वारा सुगन्ध करके यह पर्व मनाया जाता है ।

अष्टाह्रिका 

  • जैनी लोग प्रति चौथे माह आषाढ, कार्तिक एवं फाल्गुन शुक्ल पक्ष में अष्टमी से पूर्णमासी तक अष्टाह्रिका का त्यौहार मनाते है
  • इन दिनों में ये लोग व्रत, उपवास, भजन, कीर्तन आदि करते है । 
  • इस अवसर पर 52 जिन चैत्यालयों की उपासना भी की जाती है ।

पड़वा ढोक

  • यह दिगम्बर जैन समाज का क्षमा याचना पर्व है, जो आश्चिन कृष्ण एकम् को मनाया जाता है ।

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