राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले - Rajasthan ke Durg in Hindi

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राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले - राजस्थान की स्थापत्य कला का जनक राणा कुम्भा को माना जाता है । मुगल काल में राजस्थान की स्थापत्य कला पर मुगल शैली का प्रभाव पडा । हिन्दू कारीगरों ने मुस्लिम आर्दशों के अनुरूप जो भवन बनाए, उन्हें सुप्रसिद्ध कला विशेषज्ञ फर्ग्युसन ने इंडो-सारसेनिक शैली की संज्ञा दी है ।

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले - Rajasthan ke Durg in Hindi

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग
राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले 

  • जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह (प्रथम) को हिन्दुषत् कहा जाता था क्योंकि उनकी रूचि स्थापत्य कला में थी ।
  • महाराणा कुम्भा स्वयं शिल्पशास्त्री मंडन द्वारा वास्तुकला पर रचित साहित्य से प्रभावित था ।

15वीं शताब्दी में मेवाड़ के शिल्पी मंडन ने पाँच ग्रन्थ लिखें , जो निम्नलिखित थे

  1. प्रसाद मंडन - इसमें देवालय निर्माण के निर्देश दिये गये है ।
  2. रूपावतार मंडन - इसमें मूर्तियों के निर्माण सम्बन्धी निर्देश दिये गये है ।
  3. रूप मंडन - इसमें भी मूर्ति निर्माण सम्बन्धी सामग्री दी हुई है ।
  4. गृह मंडन - इसमें सामान्य व्यक्तियों के गृह, कुआँ, बावडी, तालाब महल आदि के निर्माण सम्बन्धी सामग्री दी हुई है ।
  5. वास्तुकार मंडन - इसमें विविध तत्वों से सम्बन्धित वर्णन है ।
  • मंडन के निर्देशन में ही चित्तौड़ के कीर्ति स्तम्भ का निर्माण किया गया ।

शुक्र नीति में राजस्थान के दुर्गों का 9 तरह से वर्गीकरण किया गया जो निम्नलिखित प्रकार से है

  1. एरन दुर्ग - यह दुर्ग खाई, काँटों तथा कठोर पत्थरों से निर्मित होता हैं । उदाहरण - रणथम्भीर दुर्ग, चित्तौड़ दुर्ग ।
  2. धान्वन (मरूस्थल) दुर्ग - ये दुर्ग चारों ओर रेत के ऊँचे टीलों से घिरे होते है । उदाहरण - जैसलमेर, बीकानेर व नागौर के दुर्ग ।
  3. औदक दुर्ग (जल दुर्ग) - ये दुर्ग चारों ओर पानी से घिरे होते है । उदाहरण - गागरोण (झालावाड), भैंसरोड़गढ़ दुर्ग (चित्तोंड़गढ़) ।
  4. गिरि दुर्ग - ये पर्वत एकांत में किसी पहाडी पर स्थित होता है तथा इसमे जल संचय का अच्छा प्रबंध होता है । उदाहरण - कुम्भलगढ़, मांडलगढ़ (भीलवाडा), तारागढ़ (अजमेर), जयगढ़, नाहरगढ़ (जयपुर) , अचलगढ (सिरोही), मेहरानगढ (जोधपुर) ।
  5. सैन्य दूर्ग - जो व्यूह रचना में चतुर वीरों से व्याप्त होने से अभेद्य हो ये दुर्ग सर्वश्रेष्ठ समझे जाते है ।
  6. सहाय दुर्ग - जिसमें वीर और सदा साथ देने वाले बंधुजन रहते हो ।
  7. वन दुर्ग - जो चारों और वनों से ढका हुआ हो और कांटेदार वृक्ष हो । जैसे सिवाना दुर्ग, त्रिभुवनगढ़ दुर्ग रणथम्भौर दुर्ग ।
  8. पारिख दुर्ग -वे दुर्ग जिनके चारों और बहुत बडी खाई हो । जैसे लोहागढ़ दुर्ग, भरतपुर ।
  9. पारिध दुर्ग - जिसके चारों ओर ईट, पत्थर तथा मिट्टी से बनी बडी-बडी दीवारों का सुदृढ परकोटा हो जैसे - चित्तोड़गढ़, कुम्भलगढ़ दुर्ग ।
  • महाराणा कुंम्भा ने लगभग 32 दुर्गो का निर्माण करवाया ।
  • बीकानेर का जूनागढ़, कोटा का इन्द्रगढ़ जयपुर का आमेर दुर्ग इंडो सार्सेनिक शैली में बने हुए है । किलों की दीवारों पर हमला करने के लिए रेत आदि से बना ऊँचा चबूतरा पाशीब कहलाता हैं ।
  • किलों में चमड़े से ढका मोटा रास्ता साबात कहलाता है । राजस्थान में गागरोण और भैंसरोड़गढ़ को जल दुर्गों की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है ।

राजस्थान के दुर्गो पर हुए आक्रमण

दुर्ग   
आक्रमणकारी
भटनेर दुर्ग (1091 ईं)
महमूद गजनबी, (1398 ईं (हनुमानगढतैमूरअकबर
रणथम्भीर दुर्ग (1301 ईं॰में
अलाउद्दीन खिलजी।
 (सवाईमाधोपुर)
गागरोण दुर्ग (1303 ईं.)  
अलप खाँ महम्मुद खिलजी।
 ( झालावाड )
सिवाणा दुर्ग (बाडमेर) (1308 ईं.)
अलाउद्दीन खिलजी
शेरगढ़ दुर्गधौलपुर) (1500 ईं.
बहलोल लोदी
चित्तोड़गढ का किला  
अकबरअलाउद्दीन खिलजी,
 बहादुरशाह
जैसलमेर का दुर्ग      
मोहम्मद बिन तुगलक फिरोजशाह  तुगलक,अलाउद्दीन खिलजी
सुवर्ण गिरि दुर्ग (जालौर) (1311-12 ईं.)
अलाउद्दीन खिलजी

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग

Rajasthan ke Durg in Hindi
Rajasthan ke Durg in Hindi

राजस्थान के दुर्गों की पूरी जानकारी जो निम्नलिखित प्रकार से है


भटनेर दुर्ग

bhatner durg in hindi
bhatner fort

पता: वार्ड न .21, किरन भवन के पास, हनुमानगढ़, राजस्थान 335513
  • इसका निर्माण तीसरी शताब्दी में हुआ
  • यह दुर्ग हनुमानगढ़ जिले में स्थित है
  • इस दुर्ग को रेगिस्तान श्रेणी में रखा जाता है
  • तैमूर ने इस दुर्ग के बारे में कहा था कि मैंने इतना सुरक्षित और मजबूत दुर्ग नहीं देखा
  • इस दुर्ग में मुस्लिम महिलाओं का जोहर संपन्न हुआ
  • बीकानेर महाराज दलपत सिंह की मूर्ति उनकी रानियों सहित इसी दुर्ग में स्थित है

भरतपुर दुर्ग

लोहागढ़ किला राजस्थान के में भरतपुर स्थित है। इसका निर्माण भरतपुर जाट शासकों द्वारा किया गया था। महाराजा सूरज मल ने अपने राज्य भर में कई किले और महल बनवाए, उनमें से एक लोहागढ़ किला है, जो भारतीय इतिहास में अब तक का सबसे मजबूत किला है।
Lohagarh Fort in hindi


पता: लोहागढ़ किला, गोपालगढ़, भरतपुर, राजस्थान 321001
  • भारतपुर दुर्ग का निर्माण सूरजमल जाट ने करवाया था
  • इस दुर्ग को पारीख श्रेणी में रखा जाता है
  • भरतपुर को अजय दुर्ग लोहागढ़ आदि नामों से जाना जाता है

चूरू का दुर्ग

Churu fort history in hindi
Churu fort history

  • इसका निर्माण ठाकुर कुशाल सिंह ने किया था
  • बीकानेर महाराजा सूरत सिंह के आक्रमण के समय ठाकुर शिव सिंह ने चांदी के गोले बरसाए थे

भैंसरोडगढ़

भैंसरोडगढ़ durg in hindi

भैंसरोडगढ़


  • इस दुर्ग का निर्माण भैंसाशाह और रोड़ा चारण ने करवाया था
  • यह दुर्ग जल दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • भैंसरोडगढ़ चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है
  • यह दुर्ग चंबल में बामणी नदी के संगम पर स्थित है इसे राजस्थान का वेल्लोर भी कहा जाता है
  • कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार इस दुर्ग को व्यापारियों की सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाता था

मैगजीन किला

मैगजीन किला
Magazine fort

  • इस किले का निर्माण अकबर ने करवाया था
  • यह किला अजमेर में स्थित है
  • इस दुर्ग को अकबर का दौलतखाना भी कहा जाता है
  • दुर्ग का निर्माण 1571-72 में हुआ था
  • राजस्थान का एकमात्र इस्लामिक पद्धति से बना हुआ दुर्ग मैगजीन किला ही है
  • जहांगीर और टॉमस रो के मध्य मुलाकात 10 जनवरी 1616 में इसी दुर्ग में हुई थी

शेरगढ़ 

  • यह दुर्ग बारा जिले में स्थित है
  • यह दुर्ग परवन नदी के किनारे पर स्थित है
  • इसका निर्माण नागवंशी नरेश ने करवाया था
  • यह गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • इस दुर्ग को कोसवर्धन दुर्ग भी कहा जाता है
  • इस दुर्ग का नाम शेरशाह सूरी के नाम पर शेरगढ़ कर दिया गया

चोमूहागढ़

  • यह दुर्ग जयपुर में है और इस दुर्ग का निर्माण करण सिंह ने करवाया था
  • इस दुर्ग को धाराधारगढ़ और रघुनाथगढ़ भी कहा जाता है

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ का निर्माण चित्रांगद मौर्य ने करवाया था
  • यह दुर्ग गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • यह दुर्ग गंभीरी और बेडच नदियों के संगम पर स्थित है
  • इस दुर्ग को चित्रकूट खिजराबाद और चित्रकूट नाम से भी जाना जाता है
  • इसे किलो का सिरमोर भी कहा जाता है

रणथंभौर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण रणथंब देव ने करवाया था
  • यह सवाई माधोपुर में स्थित है
  • अबुल फजल ने कहा बाकी दुर्ग नंगे हैं एकमात्र यही बख्तरबंद दुर्ग है
  • इस दुर्ग में राजस्थान का प्रथम साका 1301 ई में अलाउद्दीन खिलजी का हमीर देव चौहान पर आक्रमण के समय हुआ तब महारानी रंगा देवी ने जौहर किया था

बीकानेर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण राय सिंह बीकानेरी ने करवाया था
  • दुर्ग का निर्माण 1589 से 94 के मध्य हुआ
  • बीकानेर दुर्ग का निर्माण मंत्री करमचंद की देखरेख में करवाया गया था
  • इस दुर्ग के अन्य नाम जूनागढ़ और जमीन का जेवर है
  • यह दुर्ग मरुस्थल में स्थित है

कीर्ति स्तंभ

  • कीर्ति स्तंभ चित्तौड़गढ़ में स्थित है
  • इसकी कुल 9 मंजिलें हैं
  • इसका निर्माण महाराणा कुंभा ने करवाया था
  • कीर्ति स्तंभ की ऊंचाई 122 फीट है
  • इसमें कुल 157 सीढ़ियां है
  • इसका निर्माण कुंभा द्वारा मांडू नरेश महमूद खिलजी को सारंगपुर युद्ध 1437 की विजय स्मृति में करवाया गया
  • इसे विजय स्तंभ विष्णु स्तंभ आदि नामों से जाना जाता है
  • इसे मूर्तियों का अजायबघर शब्दकोश विश्वकोश भी कहा जाता है
  • कर्नल जेम्स टॉड ने इसे कुतुब मीनार से भी उत्तम कहा है
  • इस इमारत के वास्तुकार जैता नापा और पूंजा थे
  • कीर्ति स्तंभ राजस्थान पुलिस और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान का प्रतीक चिन्ह है
  • इसकी तीसरी मंजिल पर 9 बार अरबी में अल्लाह अंकित है
  • नौवीं मंजिल पर कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति स्थित है

नागौर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण सोमदेव चौहान के सामंत केमास ने किया था
  • इस दुर्ग का प्राचीन नाम अहिछतरपुर था
  • यह दुर्ग नगाना और नाग दुर्ग के नाम पर भी प्रसिद्ध है
  • दुर्ग के बाहर से चलाई तोप के गोले महलों को क्षति पहुंचाए बिना ऊपर से निकल जाते थे

गागरोन दुर्ग

  • यह दुर्ग जल दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • यह कालीसिंध को आहु नदी के संगम पर स्थित है
  • इसका निर्माण परमार नरेश बिजल देव ने करवाया था
  • इस दुर्ग में पीपाजी की छतरी स्थित है और यहां मीठे शाह की दरगाह स्थित है

शेरगढ़

  • यह दुर्ग धौलपुर में स्थित है
  • इसका निर्माण राव मालदेव ने करवाया था
  • इस दुर्ग में हुनहुँकार तोप स्थित है
  • इस दुर्ग में मीर सैयद की दरगाह स्थित है

कुंभलगढ़ दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुंभा ने किया था
  • दुर्ग का वास्तुकार मंडल था यह दुर्ग राजसमंद में स्थित है
  • इस दुर्ग को गिरी दुर्ग की श्रेणी में रखा जाता है
  • यह दुर्ग मत्स्येंद्र कुंभलगढ़ माहोर आदि नामों से जाना जाता है
  • इस दूर के बारे में अबुल फजल ने कहा था कि नीचे से ऊपर देखने पर सिर की पगड़ी नीचे गिर जाती है
  • कुंभलगढ़ दुर्ग की परिधि 36 किलोमीटर लंबी है जिसे भारत की महान दीवार के नाम से जाना जाता है
  • इस दुर्ग में स्थित कटारगढ़ को मेवाड़ की तीसरी आंख कहा जाता है

अजमेर 

  • इस दुर्ग का निर्माण अजयराज चौहान ने किया था
  • यह दुर्ग गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • हरविलास शारदा ने अजमेर दुर्ग को भारत का प्राचीनतम गिरी दुर्ग माना है
  • इस दुर्ग को गढ़ बिठली और तारागढ़ नाम से भी जाना जाता है
  • विसप हेबर ने इसको पूर्व का जिब्राल्टर कहां है
  • इस दुर्ग में मीर साहब की दरगाह स्थित है और मीर साहब के घोड़े की मजार की स्थित है

सिवाना दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण वीर नारायण पवार ने करवाया था
  • यह गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • सिवाना दुर्ग बाड़मेर जिले में स्थित है
  • अलाउद्दीन खिलजी ने 1308 में इस दुर्ग को जीतकर इसका नाम खेराबाद रख दिया था
  • इसे मारवाड़ की संकट कालीन राजधानी भी कहा जाता है

जोधपुर दुर्ग

  • जोधपुर दुर्ग का निर्माण राव जोधा ने किया था
  • दुर्ग का निर्माण 1459 में किया गया
  • दुर्ग की आकृति मयूर जैसी है
  • यह दुर्ग चिड़ियाटूक पहाड़ी पर स्थित है
  • इस दुर्ग को मयूरध्वज, गढ़ चिंतामणि, जोधाणा, मेहरानगढ़ नामों से जाना जाता है

जालौर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण नागभट्ट प्रतिहार ने करवाया था
  • इसे सोनगढ़ सोनलगढ़ जलालाबाद नामों से जाना जाता है
  • यहां पर परमार कालीन कीर्ति स्तंभ स्थित है

जैसलमेर दुर्ग

  • इस दुर्ग का निर्माण राय जैसल ने किया था
  • दुर्ग का निर्माण 1155 में करवाया गया
  • किस दुर्ग को त्रिकूटाकृतिगढ़, सोनारगढ़, सोनगढ़ नामों से जाना जाता है
  • इस दुर्ग को उत्तरी सीमा का पहरी भी कहा जाता है
  • यह दुर्ग ढाई साके के लिए प्रसिद्ध है

कुचामन किला

  • इसका निर्माण जालिम सिंह ने किया था
  • यह किला नागौर जिले में स्थित है
  • इसे जागीरी किलो का सिरमौर कहा जाता है

जयगढ़ 

  • इस दुर्ग का निर्माण मानसिंह प्रथम कछवाहा के सवाई जयसिंह द्वितीय तक करवाया गया
  • यह भी गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • मिर्जा राजा जयसिंह के नाम पर इस दुर्ग का नामकरण जयगढ़ हुआ
  • इस दुर्ग को रहस्यम दुर्ग भी कहा जाता है
  • इस दुर्ग में प्रवेश की अनुमति महाराजा के अलावा मात्र दो दुर्ग रक्षकों को थी
  • कछवाहा राजवंश का खजाना इसी दुर्ग में रखा गया था
  • एशिया की सबसे बड़ी जयबाण तोप इसी दुर्ग में है

दोसा का किला

  • इसे गिरी दुर्ग की श्रेणी में रखा जाता है
  • इसका निर्माण बडगूजर प्रतिहार राजाओं द्वारा करवाया गया
  • यह दुर्ग देवगिरी पहाड़ी पर स्थित है

नाहरगढ़ दुर्ग

  • इसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था
  • इसका निर्माण 1734 में करवाया गया
  • यहां पर सवाई माधव सिंह द्वितीय ने अपने पासबना के लिए एक समान 9 महलों का निर्माण करवाया
  • इस दुर्ग के निर्माण का उद्देश्य मराठा आक्रमण से बचना था

आमेर 

  • इस दुर्ग का निर्माण भारमल और मानसिंह ने करवाया था
  • यह दुर्ग गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है
  • दुर्ग में सौभाग्य मंदिर कदमी महल प्रसिद्ध स्मारक स्थित है

बूंदी का किला

  • बूंदी के किले का निर्माण 1354 ईसवी में हुआ था
  • इसका निर्माण रावबर सिंह हाडा ने करवाया था
  • कर्नल जेम्स टॉड ने इसे राजस्थान के समस्त रजवाड़ों में श्रेष्ठ राज प्रसाद बूंदी राज महल को कहा था
  • बूंदी का किला भीति चित्रों के स्वर्ग के रूप में प्रसिद्ध है
राजस्थान के दुर्ग देखने हर साल विदेशों से लाखों लोग आते हैं यह पर्यटक राजस्थान के स्थानीय लोगों के लिए रोजगार उत्पन्न करते हैं और भारत के विदेशी मुद्रा कोष में वृद्धि करते हैं राजस्थान के दुर्गों को देखने आने वाले विदेशी लोग राजस्थान की संस्कृति से भी परिचित होते हैं जिससे हमारा सांस्कृतिक विस्तार विदेशों में भी होता है

Rajasthan ke Durg PDF File Details


Name of The Book : *Rajasthan ke Durg PDF File*
Document Format: PDF
Total Pages: 8
PDF Quality: Very Good
PDF Size: 2 MB
Book Credit: S. R. Khand

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