Bharat Ke Pramukh Udyog PDF - भारत के प्रमुख उद्योग

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Bharat Ke Pramukh Udyog PDF - भारत के प्रमुख उद्योग


किसी विशेष क्षेत्र में भारी मात्रा में सामान का निर्माण/उत्पादन या वृहद रूप से सेवा प्रदान करने के मानवीय कर्म को उद्योग (industry) कहते हैं। उद्योगों के कारण गुणवत्ता वाले उत्पाद सस्ते दामों पर प्राप्त होते हैpजिससे लोगोंo का रहन-सहन के स्तर में सुधार होता है और जीवन सुविधाजनक होता चला जाता है।

औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका में नये-नये उद्योग-धन्धे आरम्भ हुए। इसके बाद आधुनिक औद्योगीकरण ने पैर पसारना अरम्भ किया। इस काल में नयी-नयी तकनीकें एवं उर्जा के नये साधनों के आगमन ने उद्योगों को जबर्दस्त बढावा दिया।

उद्योगों के दो मुख्य पक्ष हैं:


भारी मात्रा में उत्पादन (मॉस प्रोडक्सन) उद्योगों में मानक डिजाइन के उत्पाद भारी मात्रा में उत्पन्न किये जाते हैं। इसके लिये स्वतः-चालित मशीनें एवं असेम्बली-लाइन आदि का प्रयोग किया जाता है।

कार्य का विभाजन (डिविजन ऑफ् लेबर) उद्योगों में डिजाइन, उत्पादन, मार्कटिंग, प्रबन्धन आदि कार्य अलग-अलग लोगों या समूहों द्वारा किये जाते हैं जबकि परम्परागत कारीगर द्वारा निर्माण में एक ही व्यक्ति सब कुछ करता था/है। इतना ही नहीं, एक ही काम (जैसे उत्पादन) को छोटे-छोटे अनेक कार्यों में बांट दिया जाता है।

Bharat Ke Pramukh Udyog

किसी विशेष क्षेत्र में भारी मात्रा में सामान का निर्माण/उत्पादन या वृहद रूप से सेवा प्रदान करने के मानवीय कर्म को उद्योग (Industry) कहते हैं।
उद्योगों के कारण गुणवत्ता वाले उत्पाद सस्ते दामों पर प्राप्त होते हैं।
इससे लोगों का रहन-सहन के स्तर में सुधार होता है और जीवन सुविधाजनक होता चला जाता है।

औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका में नये-नये उद्योग-धन्धे आरम्भ हुए।
इसके बाद आधुनिक औद्योगीकरण ने पैर पसारना अरम्भ किया।
इस काल में नयी-नयी तकनीकें एवं उर्जा के नये साधनों के आगमन ने उद्योगों को जबर्दस्त बढावा दिया।

उद्योगों के दो मुख्य पक्ष हैं:

1) भारी मात्रा में उत्पादन - उद्योगों में मानक डिजाइन के उत्पाद भारी मात्रा में उत्पन्न किये जाते हैं।
इसके लिये स्वतचालित मशीनें एवं असेम्बली-लाइन आदि का प्रयोग किया जाता है।

2) कार्य का विभाजन - उद्योगों में डिजाइन, उत्पादन, मार्कटिंग, प्रबन्धन आदि कार्य अलग-अलग लोगों या समूहों द्वारा किये जाते हैं।
जबकि परम्परागत कारीगर द्वारा निर्माण में एक ही व्यक्ति सब कुछ करता था/है। 
इतना ही नहीं, एक ही काम (जैसे उत्पादन) को छोटे-छोटे अनेक कार्यों में बांट दिया जाता है। 

वर्गीकरण


औद्योगिक आर्थिक क्रियाकलापों को मुख्यतः चार वर्गों में बांटा जा सकता है:

प्राथमिक क्षेत्र (प्राइमरी सेक्टर)

इसमें मुख्यतः कच्चे माल के निष्कर्षण (extraction) से सम्बन्धित क्रियाकलाप आते हैं। जैसे - खनन (माइनिंग), कृषि आदि

द्वितियक क्षेत्र (सेकेन्डरी सेक्टर)

इसमें तेल-शोषक कारखाने, निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) से जुड़े उद्योग आदि आते हैं

तृतियक क्षेत्र (टर्शियरी सेक्टर)

इसमें सेवायें जैसे कानून, बैंक, स्वास्थ्य एवं उत्पादों के वितरण से सम्बन्धित उद्योग आते हैं।

चतुर्थक क्षेत्र

यह अपेक्षाकृत नवीन क्षेत्र है। इसमें ज्ञान आधारित उद्योग आते हैं। जैसे अनुसंधान, डिजाइअन एवं विकास (R&D); कम्प्यूटर प्रोग्रामन, जैवरसायन आदि आते हैं।

इनके अतिरिक्त एक पांचवा क्षेत्र का अस्तित्व भी माना जाता है जो बिना लाभ के कार्य करने का क्षेत्र है।

भारत के उद्योग

भारत औद्योगिक राष्ट्र नहीं हैं।
यह मिश्रित अर्थव्यवस्था वाला राष्ट्र हैं।
आजादी से पहले भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि था।
आधुनिक उद्योगों या बड़े उद्योगो की स्थापना भारत में 19वीं शताब्दी के मध्य शुरू हुई।
जब कलकत्ता व मुम्बई में यूरोपीय व्यवसायियों या उद्योगों के द्वारा सूती वस्त्र उद्योगो की स्थापना हुईं।
प्रथम विश्व युद्ध के परिणामस्वरूप गुजरात में सूती वस्त्र, बंगाल में जूट की वस्तुयें, उड़ीसा व बंगाल में कोयला उद्योग, असम में चाय उद्योग का विशेष विकास हुआ।
उस समय सूती वस्त्र के अलावा शेष सभी उद्योगों पर विदेशियों का अधिकार था।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद लौह-इस्पात, सीमेंट, कागज, शक्कर, कांच, वस्त्र, चमड़ा उद्योगों में उन्नति हुई।
दूसरे विश्वयुद्ध के समय भारत के ओद्यौगिक विकास के मार्ग में कई कठिनाईयां आयी जैसे:-

  • तकनीकी ज्ञान की कमी
  • यातायात के साधनों की कमी
  • बड़े उद्योगो को सरकार द्वारा हतोत्साहित करना।

दोनो महायुद्धों के बीच आजादी से पहले उद्योगों का सर्वांधिक विकास हुआ।

विश्व युद्ध के दौरान हिन्दुस्तान एयर क्राफ्ट कम्पनी, एल्युमिनियम उद्योग, अस्त्र-शस्त्र उद्योगों का विकास हुआ।
विश्व युद्ध के दौरान हिन्दुस्तन एयर क्राफ्ट कम्पनी, एल्युमिनियम उद्योग, अस्त्र-शस्त्र उद्योग का विकास हुआ।
रोजर मिशन की सिफारिश पर जो सन् 1940 में भारत आया था।
इसने भारत के उद्योगों के विस्तार पर बल दिया था।

Bharat Ke Pramukh Udyog
Bharat Ke Pramukh Udyog 

भारत के प्रमुख उद्योग के प्रकार (Important Industries in India)

  • लौह एवं इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry)
  • सीमेन्ट उद्योग (Cement Industry)
  • कोयला उद्योग (Coal Industry)
  • पेट्रोलियम उद्योग (Petroleum Industry)
  • कपड़ा उद्योग (Cloth Industry)
  • रत्न एवं आभूषण उद्योग (Gems and Jewellery Industry)
  • चीनी उद्योग (Sugar Industry)

लोहा इस्पात उद्योग 

देश में पहला लौह इस्पात कारखाना 1874 ईस्वी में बराकर नदी के किनारे कुल्टी (आसनसोल, पश्चिम बंगाल) नामक स्थान पर बंगाल आयरन वर्क्स के रूप में स्थापित किया गया था।
बाद में यह कंपनी फंड के अभाव में बंद हो गई तो इसे बंगाल सरकार ने अधिग्रहण कर दिया और इसका नाम बराकर आयरन वर्क्स रखा।
लौह इस्पात उद्योग को किसी देश के अर्थिक विकास की धुरी माना जाता है।
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भारत में इसका सबसे पहला बड़े पैमाने का कारख़ाना 1907 में झारखण्ड राज्य में सुवर्णरेखा नदी की घाटी में साकची नामक स्थान पर जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित किया गया गया था।
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् पंचवर्षीय योजनाओं के अन्तर्गत इस पर काफ़ी ध्यान दिया गया और वर्तमान में 7 कारखानों द्वारा लौह इस्पात का उत्पादन किया जा रहा है।
TISCO : Tata Iron & Steel Company limited, Jamshedpur) भारत का पहला सबसे बड़ा कारखाना जहां भारत का 20% इस्पात निर्मित होता हैं। इस उद्योग को बोकरो, जमशेदपुर, उड़ीसा से कोयला व लोहा प्राप्त होता हैं।
देश में सबसे पहला बड़े पैमाने का कारखाना 1907 ईस्वी में तत्कालीन बिहार राज्य की में स्वर्ण रेखा नदी की घाटी में साकची नामक स्थान पर जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित किया गया था।

स्वतंत्रता के पूर्व स्थापित लोहा इस्पात कारखाना

भारतीय लोहा इस्पात कंपनी -

इसकी स्थापना 1918 ई. में पश्चिम बंगाल की दामोदर नदी घाटी में हीरापुर (बाद में इसे बर्नपुर कहा गया) नामक स्थान पर की गई थी।
यहां 1922 ई. से उत्पादन शुरू हुआ आगे चलकर कुल्टी, बर्नपुर तथा हीरापुर स्थित संयंत्रों को इसमें मिला दिया गया।

मैसूर आयरन एंड स्टील वर्क्स -

1923 ईस्वी में मैसूर राज्य (वर्तमान कर्नाटक) के भद्रावती नामक स्थान पर स्थापित की गई थी इसका वर्तमान नाम विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड है।


स्टील कॉरपोरेशन ऑफ बंगाल -

इसकी स्थापना 1937 बर्नपुर (पश्चिम बंगाल) में की गई थी।
बाद में 1953 ई. में इसे भारतीय लौह-इस्पात कंपनी में मिला दिया गया था।

स्वतंत्रता के पश्चात स्थापित लौह इस्पात कारखाना -

दूसरी पंचवर्षीय योजना काल 1956-61 में स्थापित कारखाना

भिलाई इस्पात संयंत्र 

इसकी स्थापना 1955 ई. में तत्कालीन मध्य प्रदेश के भिलाई (दुर्ग जिला, छत्तीसगढ़) में पूर्व सोवियत संघ की सहायता से की गई थी।

हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड, दुर्गापुर 

इसकी स्थापना 1956 ईस्वी. में पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर नामक स्थान पर ब्रिटेन की सहायता से की गई थी।
तृतीय पंचवर्षीय  योजना काल में स्थापित कारखाना

बोकारो स्टील प्लांट 

इसकी स्थापना 1968 में तत्कालीन बिहार राज्य (अब झारखण्ड) के बोकारो नामक स्थान पर पूर्व सोवियत संघ की सहायता से की गई थी।

चौथी पंचवर्षीय योजना काल में स्थापित कारखाना  

सलेम इस्पात सयंत्र: सलेम (तमिलनाडु)
विशाखापत्तन इस्पात सयंत्र: विशाखापत्तन (आंध्रा प्रदेश)
विजयनगर इस्पात सयंत्र: हास्पेट वेलारी जिला (कर्नाटक)

स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAIL):

24 जनवरी 1973 ईस्वी.को 2000 करोड़ की पूंजी के साथ भारत इस्पात प्रधिकरण (स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया) को भिलाई, दुर्गापुर, भोकारो, राउरकेला, बर्नपुर, सलेम एंव विश्वेश्वरैया लौह इस्पात कारखाना को एक साथ मिलाकर संचालन करने की जिम्मेदारी दी गई।
वर्ष 2014 में भारत चीन, जापान तथा अमेरिका के बाद विश्व का चौथा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है।
स्पंज आयरन के उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है।
भारत का पहला तटवर्ती इस्पात कारखाना विशाखापट्नम (आंध्रा) में लगाया गया।

कोयला उद्योग

कोयले का महत्त्वः भारतीय कोयला उद्योग एक आधारभूत उद्योग है।
इस पर अन्य उद्योगों का विकास निर्भर करता है। 
वर्तमान समय में शक्ति के साधन के रूप में कोयला उद्योग का महत्त्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।
पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश गोंडवाना कोयला क्षेत्र है।
भारत में प्राप्त कुल कोयले का 98% भाग गोंडवाना क्षेत्र से ही प्राप्त होता है।
इस क्षेत्र से एन्थ्रेसाइट और बिटुमिनस किस्म के कोयले प्राप्त होते हैं।
जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, तमिलनाडु, असम, मेघालय और उत्तर प्रदेश टर्शियरी कोयला क्षेत्र है।
भारत में प्राप्त कुल कोयले का 2% भाग टर्शियरी कोयला क्षेत्र से प्राप्त होता है।
इस क्षेत्र से लिग्नाइट किस्म का कोयला प्राप्त होता है जिसे ‘भूरा कोयला’ भी कहते हैं।
भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार, ‘भारत में 1 अप्रैल, 2011 तक सुरक्षित कोयले का भंडार 285.87 अरब टन है।
कोयला उद्योग में 800 करोड़ की पूंजी विनियोजित है तथा यह 7 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराता है।
भारत में कोयले के सर्वाधिक भंडार वाले राज्य (जनवरी, 2008 के अनुसार) हैं-
(1) झारखंड,
(2) उड़ीसा,
(3) छत्तीसगढ़,
(4) पश्चिम बंगाल और
(5) आंध्र प्रदेश।

भारत के प्रमुख कोयला क्षेत्र

रानीगंज, झरिया, पू- और पश्चिम बोकारो, तवाघाटी, जलचर, चन्द्रान्वर्धा और गोदावरी की घाठी।

वर्तमान समय में भारतीय कोलया उद्योग का संचालन एवं नियंत्रण सार्वजनिक क्षेत्र की दो प्रमुख संस्थाएं करती हैं:

कोल इंडिया लि. (Coal India Ltd.—CIL)
कोयले के कुल उत्पादन के लगभग 86% भाग पर नियंत्रण यह एक धारक कम्पनी है।
इसके अधीन 7 कम्पनियां कार्यरत हैं।

सिंगरैनी कोलारीज लि- (Singareni Collieries Company Ltd.—SCCL)
यह आंध्र प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार का संयुक्त उपक्रम है।
भारत में सर्वाधिक लिग्नाइट किस्म का कोयला पाया जाता है।


पेट्रोलियम उद्योग

पेट्रोलियम उद्योग का महत्त्व: भारत में पेट्रोलियम उद्योग का महत्त्व उसकी मांग एवं पूर्ति से लगाया जा सकता है।
देश में कच्चे तेल का कुल भंडार 75.6 करोड़ टन अनुमानित है।
परंतु फिर भी भारत अपनी कुल आवश्यकता का मात्र 20% भाग ही स्वदेशी उत्पादन द्वारा प्राप्त कर पाता है।
वर्ष 1956 तक भारत में केवल एक ही खनिज तेल उत्पादन क्षेत्र विकसित थी जो डिग्बोई असम में था।
डिग्बोई के जिस तेल कुएं से तेल निकाला गया था वहां से आज भी तेल निकाला जा रहा है।
वर्तमान में भारत असम, त्रिपुरा, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, मुम्बई, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, केरल के तटीय प्रदेशों तथा अंडमान एवं निकोबार से खनिज तेल प्राप्त करने का कार्य कर रहा है।
भारत में तेल की खोज और इसके उत्पादन का काम व्यापक और व्यवस्थित रूप से 1956 में तेल और प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) के स्थापना के बाद प्रारंभ हुआ।
इसी क्रम में ऑयल इंडिया लि. (OIL) सार्वजनिक क्षेत्र की दूसरी कम्पनी बन गई।
1 फरवरी, 1994 में तेल और प्राकृतिक गैस आयोग का नाम बदलकर Oil and Natural Gas Corporation कर दिया गया।
वर्ष 1999 में केंद्र सरकार ने तेल एवं गैस की खोज एवं उत्खनन के लिए लाइसेंस प्रदान करने की नई नीति न्यू एक्सप्लोरेशन लाइसेंसिंग पॉलिसी तैयार की है।
NELP के 9वें दौर के तहत 33 तेल ब्लाकों के लिए बोलियां लगाने की तिथि 15 अक्टूबर, 2010 से 18 मार्च, 2011 के दौरान सरकार द्वारा आमंत्रित की गई थी जिनमें से 16 ब्लाक आवंटित कर दिए गए हैं।
वर्तमान में देश में 21 Oil Refineries हैं जिनमें 17 सार्वजनिक क्षेत्र, 3 निजी क्षेत्र एवं 1 संयुक्त क्षेत्र की है।
भारत सरकार NELP के बाद तेल की खोज व उत्खनन के लिए ओपेन एक्रीएज लाइसेन्सिग पॉलसी लाने का सरकार का इरादा है।
जिसके तहत तेलकम्पनी कोई भी नया ब्लाक स्वतः ही चुनकर तेल उत्खनन हेतु अपना प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत कर सकेगी।
अतः उन्हें NELP के तहत सरकारी पेशकश की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।

भारत की नवीनतम तेल परिशोधनशाला:

बीना ऑयल रिफाइनरी

मध्य प्रदेश के सागर जिले में 20 मई, 2011 को प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा इसका उदघाटन हुआ।
यह भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लि- (BPCI) व ओमान ऑयल कम्पनी (BOL) का संयुक्त उपक्रम है।
इसमें 1% हिस्सेदारी MP Govt. की, 26% हिस्सेदारी ओमान ऑयल कम्पनी तथा शेष 73% हिस्सेदारी भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लि- की है।
वर्ष 2015–16 में इस रिफाइनरी की क्षमता 150 लाख टन करने की योजना है।

गुरू गोविन्द सिंह रिफाइनरीः

पंजाब के भटिंडा में स्थित इस रिफाइनरी का उदघाटन 28 अप्रैल, 2012 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया।
यह सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लि- (HPCL) तथा लक्ष्मी निवास मित्तल की मित्तल एनर्जी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लि- का संयुक्त उपक्रम है।
इस रिफाइनरी के प्रारंभ होने से भारत में कुल तेलशोधन क्षमता 213 मिलियन मीट्रिक टन सलाना हो गया है।

ONGC द्वारा 3 रिफायनरियां स्थापित करने की योजना है—(1) मंगलौर (कर्नाटक), (2) काकीनाड़ा (आंध्र प्रदेश) और (3) बाड़मेर (राजस्थान)।

IOC द्वारा 2 रिफायनरियां स्थापित करने की योजना है—(1) एन्नोर (तमिलनाडु) और (2) पाराद्वीप में।

खनिज तेल की खपत से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेन्सी के ताजा आंकड़ों के आधार पर अमेरिका का प्रथम, चीन का द्वितीय स्थान है तथा 2025 तक बढ़ रही ऊर्जा जरूरतों के चलते अमेरिका एवं चीन के बाद भारत विश्व का तीसरा विशालतम तेल आयातक देश बन जाएगा तथा इस क्रम में चौथा स्थान जापान का होगा।
वर्ष 2030 तक वैश्विक ऊर्जा जरूरत का 45% हिस्सा भारत और चीन का ही होगा।

एल्युमीनियम उद्योग -

Bharat Ke Pramukh Udyog
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भारत में एलुमिनियम का पहला कारखाना 1937 में पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निकट जेके नगर में स्थापित किया गया था।
1938 में 4 कारखाने, तत्कालीन बिहार राज्य के मुरी, केरल के अंल्वाय, पश्चिम बंगाल के वेल्लूर तथा उड़ीसा के हीराकुंड में स्थापित किए गए।
हिंदुस्तान एलुमिनियम कॉरपोरेशन (हिंडालको) की स्थापना तत्कालीन मध्य प्रदेश के कोरबा नामक स्थान पर की गई।
मद्रास एलुमिनियम कंपनी लिमिटेड तमिलनाडु के मैटूर में स्थापित की गई 


एलुमिनियम उद्योग
कंपनी 
सहायक देश 
प्रमुख केंद्र 
बाल्को 
सोवियत संघ 
कोरबा एंव कोयना 
नाल्को 
फ़्रांस 
दामनजोड़ी (ओडिशा)
हिंडाल्को 
अमेरिका 
रेणुकूट (उत्तर प्रदेश)
इंडाल्को 
कनाडा 
JK नगरी, मूर्ति,  अल्वाय 
माल्को 
इटली 
चेन्नई, मैटूर, सलेम
वेदांता 
जर्मनी 
झारसुगुड़ा (ओडिशा)

एल्युमिनियम उत्पादन करने में भारत का विश्व में आठवां स्थान है।
नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO), देश का सबसे बड़े समन्वित, एलुमिनियम संयंत्र परिसर का गठन 7 जनवरी 1981 को किया गया था।
इसका पंजीकृत कार्यालय भुवनेश्वर (ओडिशा) में है।

सूती वस्त्र उद्योग:

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आधुनिक ढंग से सूती वस्त्र की पहली मिल की स्थापना 1818 में कोलकाता के समीप फोर्ट ग्लास्टर में की गई थी। किंतु यह असफल रही थी।
सबसे पहला सफल आधुनिक सूती कपड़ा कारखाना 1854   में मुंबई में कवासजी डावर द्वारा खोला गया।
इसमें 1856 ई. से उत्पादन प्रारंभ हुआ।
सूती वस्त्र उद्योग का सर्वाधिक केंद्रीकरण महाराष्ट्र एवं गुजरात राज्य में है।
अन्य प्रमुख राज्य हैं - पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल व उत्तर प्रदेश।
मुंबई को भारत के सूती वस्त्रों की राजधानी के उपनाम से जाना जाता है।
कानपुर को उत्तर भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।
कोयंबटूर को दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।
अहमदाबाद को भारत का बोस्टन कहा जाता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में कपड़ा उद्योग का स्थान कृषि के बाद दूसरा है।
यह भारत का सबसे प्राचीन उद्योग है।
यह देश का सबसे बड़ा संगठित एवं व्यापक उद्योग है।
यह उद्योग देश में कृषि के बाद रोजगार प्रदान करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है।
उद्योग उत्पादन में वस्त्र उद्योग का योगदान 14% है।
देश के सकल घरेलू उत्पाद में यह उद्योग 4% तथा देश की निर्यात आय में 11% योगदान है।
रोजगार प्रदान करने की दृष्टि से कृषि के बाद वस्त्र उद्योग दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है।

जूट उद्योग

सोने का रेशा के नाम से मशहूर जूट के रेशों से सामानों का निर्माण करने में भारत का विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त है।
इसका पहला कारखाना कोलकाता के समीप रिशरा नामक स्थान पर 1869 में खोला गाया था।
भारतीय जूट निगम की स्थापना 1971 मेंजूट के आयात, निर्यात तथा आंतरिक बाजार की देखभाल करने के लिए की गई थी।
भारत विश्व के 35% जूट के सामानों का निर्माण करता है और दूसरा बड़ा निर्यातक राष्ट्र है।

जूट उद्योग से सबंधित प्रमुख स्थान:
पश्चिम बंगाल टीटागढ़, रिशरा, बाली, अगरपाड़ा, बाँसबेरिया, कान किनारा, उलबेरिया, सीरामपुर, बजबज, हावड़ा, श्यामनगर एंव शिवपुर   
आंध्रा प्रदेश विशाखापत्तनम, गुण्टूर  
उत्तर प्रदेश कानपूर, सहजनवां (गोरखपुर)
बिहार पूर्णिया, कटिहार, सहरसा एंव दरबंगा   

अंतरराष्ट्रीय जूट संगठन की स्थापना 1984 में हुई थी।
इसका मुख्यालय बांग्लादेश के ढाका में है।

चीनी उद्योग 

भारत में आधुनिक चीनी उद्योग की शुरुआत 1930 में बिहार में पहली चीनी मिल की स्थापना के साथ हुई।


उत्तर प्रदेश देवरिया,भटनी, पडरौना, गोरखपुर, गौरी बाजार, सिसवां बाजार, बस्ती, बलरामपपुर, गोंडा, बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, विजनौर, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर, कानपूर, फ़ैजाबाद एंव मुज्जफरनगर।    
बिहार मोतिहारी, सुगौली, मझोलिया, चनपटिया, नरकटियागंज, मण्डौर, सासामुसा, मोतीपुर, गोपालगंज, डालमियानगर एंव दरभंगा। 
महाराष्ट्र मनसद, नासिक, अहमदनगर, पूना, शोलापुर एंव कोल्हापुर। 
पश्चिम बंगाल तेलडांगा, पलासी, हावड़ा एंव मुर्शिदाबाद। 
पंजाब
हमीरा, फगवाड़ा, अमृतसर। 
हरियाणा जगधारी एंव रोहतक 
तमिलनाडु अरकाट, मदुरै, कोयंबटूर, तिरुचिलपल्ली। 
आंध्रा सीतापुरम, पीठापुरम, भेजवाडा, हास्पेट एंव सांभल कोट। 
राजस्थान गंगानगर, भूपालसागर। 


सीमेंट उद्योग 

विश्व में सबसे पहले आधुनिक रूप से सीमेंट का निर्माण 1824 में ब्रिटेन के पोर्टलैंड नामक स्थान पर किया गया था।
सीमेन्ट उद्योग का प्रारंभ से अब तक की स्थितिः वर्ष 1904 में सर्वप्रथम मद्रास (अब चेन्नई) में भारत का पहला सीमेन्ट कारखाना खोला गया जो असफल रहा किंतु 1912–14 के मध्य 3 बड़े सीमेन्ट कारखाने खोले गएः
  1. पोरबंदर (गुजरात)।
  2. कटनी (मध्य प्रदेश)।
  3. लाखेरी।
मद्रास के कारखाने के बाद 1912-13 की अवधि में इंडियन सीमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर कारखाने की स्थापना की गई।
इसमें 1914 से उत्पादन प्रारंभ हुआ।
एसोसिएट सीमेंट कंपनी लिमिटेड की स्थापना 1936 में की गई थी।
1991 में घोषित औद्योगिक नीति के अन्तर्गत सीमेन्ट उद्योग को लाइसेन्स मुक्त कर दिया गया।
मार्च, 2011 के अन्त में देश में 166 बड़े सीमेन्ट संयंत्र है इसके अलावा देश में कुल 350 लघु सीमेन्ट संयंत्र भी है।
वर्ष 2010–11 में सीमेन्ट और ईंट का निर्यात 40 लाख टन रहा।
भारतीय सीमेन्ट ने बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, नेपाल, मध्य पूर्व एशिया (Middle East Asia), म्यांमार, अफ्रीका, आदि देशों के बाजार में अपनी पहुंच बना ली है।
भारत की सीमेन्ट कम्पनियां हैं: बिरला सीमेन्ट, जे-पी- सीमेन्ट, एसीसी सीमेन्ट और बांगर सीमेन्ट।


मध्य प्रदेश 
सतना, कटनी, जब्बलपुर, रतलाम
हरियाणा 
चरखी, दादरी 
छत्तीसगढ़ 
दुर्ग, जामुल, तिलदा, मंधार, अलकतरा। 
ओडिशा 
राजगंगपुर 
झारखण्ड 
जपला, खेलारी, कल्याणपुर, सिंदरी, झींकपानी
उत्तर प्रदेश 
मिर्ज़ापीर, चुर्क। 
आंध्रा 
कृष्णा, विजयवाड़ा, मनचेरियल, मछेरिया, पनयम। 
केरल 
कोटायम। 
कर्नाटक 
भोजपुर, भद्रावती, बागलकोट, बंगलुरु। 
पंजाब 
सूरजपुर
तमिलनाडु 
डालमियापुरम, मधुकराय, तुलकापट्टी, 
राजस्थान 
जयपुर, लखेरी। 


कागज उद्योग 

कागज का पहला सफल कारखाना 1879 में लखनऊ में लगाया गया।
मध्यप्रदेश के नेपानगर में अखबारी कागज तथा होशंगाबाद में नोट छापने के कागज बनाने का सरकारी कारखाना है।

रासायनिक उर्वरक उद्योग 

ऐतिहासिक रूप से देश में सुपर फास्फेट उर्वरक का पहला कारखाना 1996 में तमिलनाडु के रानीपेट नामक स्थान पर स्थापित किया गया था।
1944 में कर्नाटक के बैलेगुला नामक स्थान पर मैसूर केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स के नाम से अमोनिया उर्वरक का कारखाना लगाया गया।
1947 में अमोनिया सल्फेट का पहला कारखाना केरल के अलवाय नामक स्थान पर खोला गया।
भारतीय उर्वरक निगम की स्थापना 1951 में की गई।
इसके तहत एशिया का सबसे बड़ा उर्वरक संयंत्र सिंदरी में स्थापित किया गया।
भारत पोटाश उर्वरक के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है।
भारत में नाइट्रोजन उर्वरक की खपत सबसे अधिक है।
भारत में 2010 11 में NPK उर्वरकों की प्रति हेक्टेयर खपत 140.14 किग्रा थी।
भारत में प्रति हेक्टेयर पूर्वक खपत में प्रथम स्थान पंजाब का है और दूसरा एवं तीसरा स्थान क्रमश: आंध्रप्रदेश तथा हरियाणा का है।
कोक आधारित उर्वरक इकाइयां तालचर (उड़ीसा), रामागुंडम (आंध्रप्रदेश) तथा कोरबा (छत्तीसगढ़) में अवस्थित है।
क्रभको का गैस आधारित यूरिया-अमोनिया सयंत्र हजीरा (गुजरात) में है।
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर तथा जगदीशपुर के कारखाना भी गैस आधारित है।

जलयान निर्माण उद्योग: 

भारत में जलयान निर्माण का प्रथम कारखाना 1941 ई. में सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी द्वारा विशाखापट्टनम में स्थापित किया गया था।
1952 में भारत सरकार द्वारा इसका अधिग्रहण करके हिंदुस्तान शिपयार्ड विशाखापट्टनम नाम दिया गया था।
सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य इकाइयां जो जलयानों का निर्माण करती हैं -
गर्डे नरिच वर्कशॉप लिमिटेड - कोलकात्ता
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड - गोवा
मंझ गांव डाक लिमिटेड - मुम्बई

वायुयान निर्माण उद्योग 

भारत में हवाई का निर्माण का प्रथम कारखाना 1940 में बेंगलुरु में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट कंपनी के नाम से स्थापित किया गया है।
अब इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नाम से जाना जाता है।
आज बेंगलुरु में ही 5 इकाइयां तथा कोरापुट, कोरवा, नासिक, बैरकपुर, लखनऊ, हैदराबाद तथा कानपुर में 11 अन्य वायुयानों के निर्माण कार्य में सलंग्न है।

मोटरगाड़ी उद्योग 

मोटरगाड़ी उद्योग को विकास उद्योग के नाम से जाना जाता है।
इससे सबंधित प्रमुख इकाइयां -
हिंदुस्तान मोटर - (कोलकत्ता)
प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स लि. - (मुंबई)
अशोक लीलैंड - (चेन्नई)
टाटा इंजिनियरिंग एन्ड लोकोमोटिव कम्पनी लि. - (जमशेदपुर)
महिंद्रा एन्ड महिंद्रा लिमिटेड - (पुणे)
मारुती उद्योग लि. - गुड़गांव (हरियाणा)
सनराइज इंडस्ट्रीज - (बंगलुरु)

दवा निर्मण उद्योग 

प्रमुख स्थान  -  मुंबई, दिल्ली, कानपूर, हरिद्वार, ऋषिकेश, अहमदाबाद, पुणे, मथुरा एंव हैदराबाद।

शीशा उद्योग 

भारत में शीशा उद्योग का केन्द्रीकरण रेन की सुविधा वाले स्थानों में देखने को मिलता है।
इस उद्योग का विकास मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व तमिलनाडु राज्य में हुआ है।
फिरोजाबाद एंव शिकोहाबाद भारत में शीशा उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। 


पश्चिम बंगाल 
बेलगछिया, सीतारामपुर, रिसड़ा, बर्द्धवान, रानीगंज एंव आसनसोल।
झारखंड
जमशेदपुर, हजारीबाग, धनबाद।
महाराष्ट्र
मुंबई, पुणे, दादर, सतारा, शोलापुर एंव नागपुर।
गुजरात
बड़ौदा, मौरवी
बिहार
पटना एंव कुहलगाँव
राजस्थान
जयपुर
उत्तर प्रदेश
नैनी, रामनगर, बहजोई, बालाबाली एंव फिरोजाबाद।
अन्य स्थान
अम्बाला, अमृतसर, हैदराबाद, जबलपुर एंव गुवाहाटी।

अभियांत्रिकी उद्योग 

देश में हटिया, दुर्गापुर, अजमेर, जादवपुर आदि प्रथम स्थान पर है।
भारी इंजीनयरिंग निगम लिमिटेड (HEC) रांची की स्थापना 1958 में की गई थी।
कुटीर उद्योग बोर्ड : 1948
केंद्रीय सिल्क बोर्ड : 1949
अखिल भारतीय हथकरघा बोर्ड : 1950
अखिल भारतीय खादी एंव ग्रामोद्योग  बोर्ड : 1954
अखिल भारतीय हस्तकला बोर्ड : 1953
लघु उद्योग बोर्ड : 1954
केंद्रीय विक्रय संगठन : 1958



रेल उपकरण उद्योग 

चित्तरंजन (पश्चिम बंगाल) रेल इंजन बनाने का सबसे पुराना कारखाना है। 
इसकी स्थापना 26 जनवरी 1950 के दिन चित्तरंजन लोकोमेटिव वर्क्स  नाम से शुरू हुई। 
वर्तमान  यहां विधुत इंजन का निर्माण किया जा रहा है। 
डीज़ल से चलने वाले इंजन निर्माण वाराणसी में होता ही। 
रेलवे इंजन का निर्मण कार्य जमशेदपुर (झारखण्ड) में भी किया जाता है। 
रेल के डिब्बे बनाने  प्रमुख केंद्र चेन्नई के समीप पेरंबूर नामक स्थान पर 1952 में स्थापित किया गया और इसने उत्पादन की शुरुआत 2 अक्टूबर 1955 से हुई इसके अन्य प्रमुख केंद्र बेंगलुरु तथा कोलकाता में है।
पंजाब के कपूरथला में इंट्री कल कोच फैक्ट्री की स्थापना की गई है।
रायबरेली उत्तर प्रदेश कचरापारा पश्चिम बंगाल में रेलवे कोच फैक्ट्री की नई उत्पादन इकाइयां लगाई गई है।
केरल के पाला कार्ड में भी रेल कोच फैक्ट्री लगाई जा रही है।
बिहार के मंडोरा में डीजल इंजन में मधेपुरा में विद्युत इंजन कारखाना लगाया जा रहा है।
छपरा बिहार में रेल वहीं फैक्ट्री स्थापित की गई है।
पश्चिम बंगाल के धनकुनी में विद्युत व डीजल इंजन के अवयव बनाने की फैक्ट्री लगाई जा रही है
आईआईटी रुड़की मैं देश के पहले रेलवे इंजन थॉमसन को सुरक्षित किया गया है।
ऊनी वस्त्र उद्योग भारत में उन्नी वस्त्र की पहली मेल 18 क्षेत्र में कानपुर में स्थापित की गई परंतु इस उद्योग का वास्तविक विकास 1950 के बाद ही हुआ।
पंजाब में लुधियाना जालंधर धारीवाल अमृतसर इस दोगे महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
ब्रिटेन अमेरिका कनाडा जर्मनी आदि भारतीय कालीनों के महत्वपूर्ण आयातक हैं।

बिजली के सामान 

भोपाल, हरिद्वार, रामचंद्रपुरम, हैदराबाद, तिरुचिरापल्ली तथा कोलकाता बिजली के सामान बनाने के महत्वपूर्ण केंद्र हैं

टेलीफोन उद्योग 

बंगलुरु तथा रूपनारायणपुर टेलीफोन उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्र है।

रेशम उद्योग 

भारत एक ऐसा देश है जहां शहतूती, एरी, तसर एवं मूंगा सभी 4 किस्मों की रेशम का उत्पादन होता है।
मूंगा रेशम उत्पादन में भारत को एकाधिकार प्राप्त है।
कर्नाटक देश का 41% से अधिक कच्चा रेशम उत्पादन करता है।
यहां शाहतूती रेशम बनाया जाता है।
यह देश का 56% रेशमी धागा बनाया जाता है।
भारत में कुल कपड़ा निर्यात में रेशमी वस्त्रों का योगदान लगभग 3% है।
गैर शहतुती रेशम मुख्य असम बिहार और मध्य प्रदेश से प्राप्त होता है।

चर्म उद्योग 

भारत में चर्म उद्योग के मुख्य केंद्र कानपुर, आगरा, मुंबई, कोलकाता, पटना तथा  बेंगलुरु में है।
कानपुर चर्म उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है।
यह जूते बनाने के लिए प्रसिद्ध है।

उद्योगों से सबंधित कुछ परिभाषाएँ -

1. कृषि पर आधारित उद्योग : जो उद्योग कृषि उत्पादों को औद्योगिक उत्पादों में परिवर्तित करता है

2. आधारभूत उद्योग : ये भारी उद्योग हैं जो अन्य उद्योगों के लिए आधारभूत हैं।
जैसे-लोहा तथा इस्पात उद्योग।

3. सहकारी उद्योग : ये उद्योग लोगों के समूह द्वारा व्यवस्थित किए जाते हैं जो कि कच्चे माल के उत्पादक होने के साथ-साथ एक दूसरे के सहयोग से उद्योगों को चलाने में भी मदद करते हैं।

4. उपभोक्ता उद्योग : ये उद्योग प्रमुख रूप से लोगों के उपभोग के लिए वस्तुएँ प्रदान करते हैं।

5. कुटीर उद्योग : ये उद्योग घरों या गाँवों में छोटे पैमाने पर चलाए जाते हैं।

6. भारी उद्योग : ये उद्योग भारी कच्चे माल का प्रयोग कर भारी तैयार माल का निर्माण करते है।
जैसे : लोहा और इस्पात उद्योग।

7. उद्योग : कारखाने की उत्पादन क्रिया के द्वारा कच्चे माल के मूल्य में वृद्धि को उद्योग कहते हैं

8. संयुक्त उद्योग : वे उद्योग जो राज्य सरकार तथा निजी क्षेत्रा के संयुक्त प्रयास से चलाए जाते हैं।

9. हल्के उद्योग : ये उद्योग कम भार वाले कच्चे माल का प्रयोग कर हल्के तैयार माल का उत्पादन करते हैं। जैसे- इलेक्ट्रॉनिक्स, पंखे आदि।

10. बड़े पैमाने के उद्योग : हर इकार्इ में बड़ी संख्या में लोगों को राजगार देने तथा उत्पादन स्तर में वृद्धि करने वाले उद्योग।
जैसे जूट या पटसन उद्योग।

11. खनिज आधारित उद्योग : जो उद्योग खनिज उत्पादों को तैयार माल में परिवर्तित करते हैं।

12. सार्वजनिक क्षेत्रा के उद्योग : इन उद्योगों का स्वामित्व केन्द्र तथा राज्य दोनों सरकारों के पास होता है। जैसे- बी.एच.र्इ.एल., एच.र्इ.सी. तथा एन.टी.पी.सी.।

13. प्राथमिक उद्योग : ये कच्चे माल के उत्पादन के उद्योग हैं।

14. निजी क्षेत्रा के उद्योग : इन उद्योगों का स्वामित्व तथा नियंत्राण एक व्यक्ति, फर्म या कंपनी के हाथ में होता है।

15. द्वितीयक उद्योग : ये उद्योग प्राथमिक उद्योगों द्वारा तैयार किए माल का प्रयोग करके वस्तुओं का निर्माण करते हैं।

16. छोटे पैमाने के उद्योग : कम संख्या में लोगों को रोजगार देना तथा लगभग दो करोड़ पूँजी निवेश करने वाले उद्योग जैसे-सिले-सिलाए वस्त्रों का उद्योग।


FAQ

1. उद्योग-धन्धे किस प्रकार की मानवीय आर्थिक क्रिया के अन्तर्गत आते हैं ?
(a) प्राथमिक
(b) द्वितीयक 
(c) तृतीयक
(d) चतुर्थक

2. वह उद्योग जो अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल का उत्पादन करता है, कहलाता है ?
(a) कुटीर उद्योग
(b) मूलभूत उद्योग 
(c) लघु उद्योग
(d) प्राथमिक उद्योग

3. वे उद्योग जो स्थानीय कच्चे मालों का उपयोग करते हैं, निम्न में से क्या कहलाते हैं ? 
(a) आधारभूत उद्योग
(b) प्राथमिक उद्योग
(c) कुटीर उद्योग 
(d) उपभोक्ता सामग्री उद्योग

4. निम्नलिखित में से कौन श्रम आधारित उद्योग है ?
(a) इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग 
(b) हीरा तराशना
(c) पेट्रोलियम शोधन
(d) घड़ी निर्माण

5. 'आइसोडोपेन' (Isodopen) शब्द का प्रयोग किया जाता है-
(a) औद्योगिक स्थानीयकरण में
(b) कृषि प्रदेशों के सीमांकन में । 
(c) जलवायु कटिबंधों के विभाजन में
(d) वनस्पति प्रदेशों के विभाजन में

6. उद्योगों में स्थानीयकरण हेतु ‘आइसोडोपेन' शब्द का उपयोग सर्वप्रथम किसने किया?
(a) ब्लॉश
(b) वेबर
(c) इजार्ड
(d) हूवर 

7. औद्योगिक अवस्थापना के लिए मुख्य भौगोलिक कारक है-
(a) कच्चा माल
(b) शक्ति के साधन व श्रमिक
(c) बाजार एवं परिवहन 
(d) इनमें से सभी

8. निम्न में से कौन-सा आधारित रूप से छोटे पैमाने का उद्योग है? 
(a) रसायन उद्योग
(b) उर्वरक उद्योग
(c) माचिस उद्योग 
(d) जूट उद्योग

9. उद्योगों के स्थानीयकरण का प्रतिरूप किसने प्रतिपादित किया था ?
(a) जिमरमैन
(b) वेबर  
(c) इजार्ड
(d) अलेक्जेण्डर

10. वैसे उद्योग जिनके स्थानीयकरण के लिए कच्चा माल, परिवहन, बाजार आदि की .सुविधा के आधार किसी विशेष स्थान की आवश्यकता नहीं होती है, कहलाते हैं? 
(a) द्वितीयक उद्योग
(b) फूट-लूज उद्योग  
(c) उपभोक्ता उद्योग
(d) प्राथमिक उद्योग

11. निम्न में से कौन-सा एक फूट लूज (Foot Loose) उद्योग है? 
(a) इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग 
(b) चमड़ा उद्योग
(c) कागज उद्योग
(d) सीमेन्ट उद्योग

12. निम्न में से कौन एक फूट लूज (Foot Loose) उद्योग है? 
(a) सीमेन्ट
(b) होजरी  
(c) चीनी
(d) जूट

13. निम्नलिखित में से किस उद्योग के स्थानीयकरण में कुशल श्रम का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है? 
(a) रेशम उद्योग
(b) लौह-इस्पात उद्योग
(c) हीरा कटाई उद्योग  
(d) जूट उद्योग

14. निम्नलिखित में से किस देश का लौह-इस्पात उद्योग पूर्णतः आयातित कच्चे माल पर आधारित है?
(a) ब्रिटेन
(b) जापान  
(c) पोलैंड
(d) जर्मनी

15. संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा लौह-इस्पात उत्पादक क्षेत्र कौन है ?
(a) पिट्सबर्ग क्षेत्र  
(b) मध्य अटलांटिक तट क्षेत्र
(c) बर्मिंघम क्षेत्र
(d) झील तटीय क्षेत्र

16. निम्नलिखित में से किस देश का लौह-इस्पात उद्योग आयातित कोयला पर आधारित है?
(a) आस्ट्रेलिया
(b) ग्रेट ब्रिटेन
(c) फ्रांस  
(d) जर्मनी

17. आस्ट्रेलिया में लौह-इस्पात उद्योग का प्रमुख केन्द्र है-
(a) सिडनी
(b) एडिलेड
(c) मेलबॉर्न
(d) न्यू कैसल  

18. वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कौन-सा उद्योग आधारभूत उद्योग कहा जा सकता है ? 
(a) सूत्री वस्त्र उद्योग
(b) रासायनिक उद्योग
(c) लौह-इस्पात उद्योग  
(d) इंजीनियरिंग उद्योग

19. मैग्निटोगोर्क, नोवोकुजनेत्सक, शिकागो, पिट्सबर्ग आदि किस उद्योग का प्रमुख केन्द्र है? 
(a) सूत्री-वस्त्र उद्योग
(b) लौह-इस्पात उद्योग  
(c) कागज उद्योग
(d) चीनी उद्योग

20. विश्व के एक-तिहाई से अधिक कच्चे इस्पात का उत्पादन प्राप्त होता है? [UPPCS, 2011]
(a) चीन से  
(b) जापान से
 (c) रूस से
(d) अमेरिका  से

21. निम्नांकित देशों में कौन लौह-इस्पात उद्योग में अधिक उन्नत है ?
(a) फ्रांस
(b) ब्राजील
(c) भारत
(d) जापान  

22. बोकारो, भिलाई, चेलियाबिन्स्क किस उद्योग के लिए प्रसिद्ध हैं? 
(a) रसायन उद्योग
(b) मोटरगाड़ी उद्योग
(c) इंजीनियरिंग उद्योग
(d) लोहा एवं इस्पात उद्योग  

23. विश्व में ऐलुमिनियम उद्योग की स्थिति सर्वाधिक प्रभावित होती है-
(a) बाजार से
(b) कच्चे माल से
(c) सस्ती जल-विद्युत् से  
(d) यातायात की सस्ती दरों से

24. ऐलुमिनियम उद्योग के स्थानीयकरण का आधार है-
(a) बाजार की सुविधा
(b) कच्चे माल की सुविधा
(c) कुशल श्रम की सुविधा
(d) विद्युत् की सुविधा  

25. किस देश ने सर्वप्रथम कागज बनाना प्रारम्भ किया ?
(a) जापान
(b) जर्मनी
(c) चीन  
(d) भारत

26. निम्न में से कौन-सा प्रमुख कागज उत्पादक देश है?
(a) कनाडा  
(b) ब्राजील
(c) पोलैंड
(d) इण्डोनेशिया

27. विश्व में अखबारी कागज का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन है ?
(a) कनाडा   
(b) USA
(c) ग्रेट ब्रिटेन
(d) भारत

28. वर्तमान समय में जूट उद्योग की दृष्टि से विश्व में प्रथम स्थान किसका है ?
(a) भारत  
(b) बांग्लादेश
(c) ब्राजील
(d) पाकिस्तान

29. वर्तमान समय में जूट उद्योग का केन्द्रीयकरण देखने को मिलता है-
(a) भारत एवं पाकिस्तान में
(b) भारत एवं बांग्लादेश में  
(c) भारत एवं स्कॉटलैंड में
(d) पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में

30. विश्व का पहला जूट मिल कहाँ स्थापित किया गया? 
(a) भारत के रिसरा में
(b) स्कॉटलैंड के कुंडी में  
(c) बांग्लादेश के ढाका में
(d) ब्रिटेन के मैनचेस्टर में

31. कनाडा विश्व का सबसे बड़ा लुग्दी का निर्यातक देश है, जिसका कारण निम्न में से कौन-सा है?
a)यहाँ कोणधारी वन का अक्षय स्रोत विद्यमान है।
(b) यहाँ लकड़ियों के परिवहन के लिए नदी मार्गों तथा अल्प व्ययी जल-विद्युत्श क्ति पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
(c) कनाडा को वृहत् निर्यात बाजार उपलब्ध है जहाँ हमेशा लुग्दी की मांग रहती है।
(d) उपर्युक्त सभी  

32. विश्व में सबसे अधिक लुग्दी का उत्पादन कहाँ होता है?
(a) जापान
(b) कनाडा  
(c) आस्ट्रेलिया
(d) भारत

33. वर्तमान समय में सूती वस्त्र के उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान किस देश का है ?
(a) भारत
(b) चीन  
(c) संयुक्त राज्य अमेरिका
(d) जापान

34. निम्नलिखित में से किस नगर को चीन का मैनचेस्टर कहा जाता है?
(a) शंघाई  
(b) कैन्टन
(c) वुहान
(d) बीजिंग

35. भारत का सबसे बड़ा एवं संगठित उद्योग कौन माना जाता है?
(a) लोहा एवं इस्पात उद्योग
(b) सूती वस्त्र उद्योग  
(c) सीमेन्ट उद्योग
(d) चीनी उद्योग

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