Monday, 8 July 2019

Rajasthan ke Lok Nritya - Part 3 | गरासिया जाति के नृत्य

गरासिया जाति के नृत्य

गरासिया जाति के नृत्य

मोरिया नृत्य

  • विवाह के अवसर पर गणपति स्थापना के पश्चात रात्रि को किया जाने चाला नृत्य है ।
  • मोरिया नृत्य पुरुषों द्वारा किया जाता है ।

मांदल नृत्य

  • यह गरासिया महिलाओ द्वारा किया जाने वाला वृत्ताकार नृत्य हैं 
  • इस नृत्य में मांदल वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है ।

वालर नृत्य

  • वालर नृत्य स्त्री-पुरुष द्वारा किया जाने वाला प्रसिद्ध नृत्य है । 
  • इस नृत्य को बिना वाद्य यंत्र के धीमी गति से किया जाता है ।
  • वालर नृत्य में दो अर्द्धवृत बनते है, बाहर के अर्द्धवृत में पुरुष तथ अन्दर के अर्द्धवृत में महिलाएं होती है ।
  • वालर नृत्य का प्रारम्भ एक पुरुष हाथ में छाता या तलवार लेकर करता है। 
  • इस नृत्य में पुरुष-स्त्रियाँ गीत के साथ नृत्य प्रारम्भ करते हैं । पुरुषों के गीत की पंक्ति की समाप्ति से एक पंक्ति पहले स्त्रियाँ गीत उटा लेती है । 
  • वालर नृत्य विशेष कर सिरोही क्षेत्र में किया जाता है ।
  • इस नृत्य में नर्तक व नर्तकी अपने आगे वाले नर्तक व नर्तकी के कंधे पर अपना दायाँ हाथ रखते है । 
  • वालर नृत्य को गरासिया घूमर भी कहते है । 
  • पडियाँ कौढी काल जैसे गीतों के साथ यह नृत्य सम्पन होता है । 
  • यह नृत्य विवाह के अलावा हौली व गणगौर पर भी किया जाता है ।

लूर नृत्य

  • लूरु नृत्य गरासिया महिलाओ द्वारा मुख्यत: मेले व शादी के अवसर पर किया जाता है ।
  • गरासिया स्त्रियों में इस नृत्य को मुख्यत लूर गोत्र की स्त्रियों द्वारा किया जाता है ।
  • लूर नृत्य में एक दल (वर पक्ष) दूसरा दल (वधू पक्ष) से रिश्ते की माँग करता हुआ नृत्य करता है ।
  • यह नृत्य घूमर नृत्य का ही एक रूप है ।

कूद नृत्य

  • गरासिया स्त्रियो-पुरुषो द्वारा सम्मिलित रूप में किया जाता है ।
  • कूद नृत्य बिना वाद्य के किया जाता है ।
  • कूद नृत्य करते समय तालियों का प्रयोग किया जाता है ।

गौर नृत्य

  • गौर नृत्य गणगौर के अवसर पर गरासिया स्त्री-पुरुष द्वारा किया जाने वाला आनुष्ठानिक नृत्य है ।
  • यह नृत्य गणगौर के अवसर पर शिव-पार्वती (गण-गौर यानि शिव पार्वती) को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है ।

जवारा नृत्य

  • होली दहन से पूर्व स्त्री पुरुषों द्वारा किया जाने वाला सामूहिक नृत्य है ।
  • यह नृत्य गोल घेरा बनाकर ढोल के गहरे घोष के साथ किया जाता है ।
  • इस नृत्य में स्त्रियाँ हाथ में जवारों की बालियाँ लिए नृत्य करती है । 

रायण नृत्य

  • इसमें नर्तक केवल पुरुष होते है जो महिलाओं के वेश धारण कर नृत्य करते है ।

गर्वा नृत्य

  • गर्वा नृत्य गरासिया जाति की स्त्रियों के द्वारा किया जाता है
  • गर्व नृत्य मुख्य रूप से उदयपुर-सिरोही में किया जाता है गर्वा नृत्य गरासियों का अत्यन्त मोहक नृत्य है ।

बेरीहाल नृत्य 

  • उदयपुर के खैरचाड़ा के पास भाण्दा गाँव में रंग पंचमी को विशाल आदिवासी मेले का मुख्य आकर्षण बेरीहाल नृत्य है ।

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